नोएडा में रहने वाले एक वरिष्ठ नागरिक ने देश के 70 लाख खास नागरिकों की उम्मीद को मीडिया के सामने रखा है। यहां हम देश के जिन 70 लाख नागरिकों की बात कर रहे हैं वें सभी नागरिक सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके वरिष्ठ नागरिक हैं।

Noida News : नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे देश के 70 लाख खास नागरिकों को केन्द्र सरकार के बजट से बहुत ही बड़ी उम्मीद है। नोएडा में रहने वाले एक वरिष्ठ नागरिक ने देश के 70 लाख खास नागरिकों की उम्मीद को मीडिया के सामने रखा है। यहां हम देश के जिन 70 लाख नागरिकों की बात कर रहे हैं वें सभी नागरिक सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके वरिष्ठ नागरिक हैं।
नोएडा शहर में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता अजीत सिंह ने देश के 70 लाख रिटायर सरकारी कर्मचारियों का दर्द मीडिया के साथ साझा किया है। नोएडा के सेक्टर-26 में रहने वाले अजीत सिंह ने चेतना मंच को भेजे गए एक पत्र में देश के 70 लाख नागरिकों की आवाज को उठाया है। नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा सहित भारत के अलग-अलग शहरों में रहने वाले नागरिकों के विषय में इस पत्र में विस्तार से जिक्र किया गया है।
नोएडा के सेक्टर-26 में रहने वाले अजीत सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि आगामी यूनियन बजट से लगभग 70 लाख नौकरी से रिटायर्ड बजुर्ग व्यक्ति यह उम्मीद लगाकर बैठे हैं कि उनकी जो मिनिमम श्वक्कस्न की पेंशन इस समय केवल एक हजार रुपए मात्र हैं उस राशि को बड़ा कर क्रह्य 7500 रूपये हो जानी चाहिए ताकि देश के बजुर्ग भाई बहनों ने अपने नौकरी के सेवाकाल में देश के उन्नति के लिए जो योगदान दिया है और वह अब सम्मान पूर्वक जी सकें और अन्य व्यक्ति आश्रित न होकर जीवन निर्वाह न करना पड़े। लगभग दस वर्ष से ऐसी उम्मीद लगाकर बैठे हैं और देश के कोने-कोने में संघर्ष भी हो रहा है। श्रम मंत्रालय को इसकी चिंता करनी चाहिए और इस वर्ष बजट में लाखों बजुर्ग लोगों की मांग स्वीकार कर लेनी चाहिए। जो नौजवान आज प्राइवेट क्षेत्र में आज नौकरी कर रहे हैं यह उन के भी सेवानिवृत होने के पश्चात कल्याण की योजना बनेगी। हम लोग केवल अपनी इस छोटी से मांग को पूरा करने की आशा लगा कर बैठे हैं। इस विषय पर समय-समय पर देश के अनेकों संसद सदस्यों ने संसद में भी अनेकों बार बुजुर्ग ईपीएफ पेंशनर्स के न्यूनतम पेंशन के मानक को लेकर बहुत ही मजबूती से दोहराया लेकिन आंदोलन को ईपीएफ पेंशनर्स के लीडर्स को केवल मुंह कीखानी पड़ी। जबकि इस पेंशन के बढ़ोतरी का संघर्ष को लगभग सात आठ वर्ष होने वाले हैं। हर वर्ष का बजट सेशन उम्मीद में ही बीत जाता है। कई लाखों आंदोलन के समय से अपने वैकुंठ धाम तक चले गए। यही समस्या आने वाले समय में रिटायर्ड होने वाले व्यक्तियों को भी फेस करनी पड़ेगी। इस स्कीम को जिस उद्देश्य से बनाया गया था कि कर्मचारी अपनी नौकरी से रिेटायर होने के पश्चात सम्मान की जिंदगी जी सकेगा लेकिन इस स्कीम के गणना क्वात्रिक हे गलत था जिससे रिटायरमेंट के पश्चात व्यक्तियों को अपने गुजरे के लिए एक छोटा सा अंश ही नहीं मिल पाता है। बढ़ती हुई महंगाई में एक हजार रुपए का कुछ भी योग नहीं मिल पाता है। वित्त मंत्रालय से लाखों ईपीएफ पेंशनर्स के जिहाज से अनुरोध करता हूं कि उनकी उम्मीद को और आगे बढ़ाया जाए क्योंकि मंत्रियों के पद सदा बदलते रहते है और किसी का पद स्थाई नहीं है। आज के समय में एक बार डॉक्टर के पास जाना पड़ जावे तो एक हजार रुपए से ज्यादा तो डॉक्टर हे ले जाता है। लगभग 14 साल हो गए जब प्रधानमंत्री ने न्यूनतम पेंशन रुपए एक हजार किए थे और बारह साल बाद तो उसका बढ़ती हुई महंगाई के अनुरूप बढऩा बनता है और ईपीएफ ऑर्गेनाइजेशन सब से धन वाली संस्था है और इसका धन हर माह बढ़ता ही रहता है । Noida News