नोएडा में लंबे समय से अटकी स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं को लेकर बड़ी राहत सामने आई है। नोएडा प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक में लिए गए अहम फैसले के बाद स्पोर्ट्स सिटी के चार भूखंडों से जुड़ी 84 परियोजनाओं में काम आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।

Noida News : नोएडा में लंबे समय से अटकी स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं को लेकर बड़ी राहत सामने आई है। नोएडा प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक में लिए गए अहम फैसले के बाद स्पोर्ट्स सिटी के चार भूखंडों से जुड़ी 84 परियोजनाओं में काम आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। इसके साथ ही करीब 40 हजार फ्लैट खरीदारों के लिए रजिस्ट्री और कब्जे की उम्मीद फिर से मजबूत हुई है। हालांकि, नोएडा में रजिस्ट्री की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब संबंधित बिल्डर प्राधिकरण का बकाया जमा करना शुरू करेंगे।
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े हजारों खरीदार लंबे समय से इस इंतजार में थे कि उनकी परियोजनाओं पर लगी रुकावट कब हटेगी। अब बोर्ड बैठक के फैसले ने उन्हें राहत दी है। प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक जिन परियोजनाओं में काफी काम पूरा हो चुका है और जहां खेल सुविधाओं की दिशा में भी प्रगति हुई है, वहां बिल्डरों को बकाया चुकाने के लिए एक से तीन साल तक का समय दिया जाएगा। फिलहाल बिल्डरों को कुल बकाया राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा जमा करना होगा, जबकि शेष 80 प्रतिशत रकम तीन साल के भीतर देनी होगी। नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि जैसे ही बकाया राशि मिलनी शुरू होगी, वैसे ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा दी जाएगी।
नोएडा प्राधिकरण ने इस बार साफ कर दिया है कि स्पोर्ट्स सिटी की मूल अवधारणा से कोई समझौता नहीं होगा। जिन बिल्डरों को संशोधित ले-आउट प्लान की मंजूरी चाहिए, उन्हें खेल सुविधाओं के विकास की पूरी और स्पष्ट योजना प्रस्तुत करनी होगी। प्राधिकरण ने संकेत दिया है कि केवल आवासीय निर्माण के आधार पर आगे राहत नहीं दी जाएगी। खेल सुविधाएं जमीन पर विकसित होने के बाद ही अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। नोएडा में स्पोर्ट्स सिटी को केवल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक समग्र शहरी विकास मॉडल के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके अलावा नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एससी-02 भूखंड के संशोधित ले-आउट प्लान को बोर्ड बैठक में मंजूरी दी गई है। इस मंजूरी के तहत 70 प्रतिशत जमीन को खुला और हरित क्षेत्र बनाए रखने का फैसला किया गया है, जबकि केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर निर्माण की अनुमति होगी। इससे साफ है कि नोएडा प्राधिकरण अब सेक्टर-150 जैसे प्रीमियम इलाकों में अनियंत्रित निर्माण के बजाय नियोजित और संतुलित विकास पर जोर देना चाहता है। यह फैसला पर्यावरणीय संतुलन और बेहतर शहरी जीवनशैली, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वर्ष 2021 में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी परियोजनाओं पर रोक इसलिए लगाई गई थी क्योंकि कई बिल्डरों ने आवंटन की मूल शर्तों का पालन नहीं किया। नियम यह था कि पहले खेल सुविधाएं तैयार की जाएं और उसके बाद आवासीय व व्यावसायिक निर्माण किया जाए, लेकिन कई परियोजनाओं में बिल्डरों ने पहले फ्लैट बनाने पर ध्यान दिया। इस वजह से स्पोर्ट्स सिटी की मूल पहचान और उद्देश्य पर सवाल उठने लगे थे। मामला तब और गंभीर हो गया जब सीएजी की जांच में इस पूरी योजना में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले की बात सामने आई। इसके बाद नोएडा में इस परियोजना से जुड़े निर्णयों पर सख्ती बढ़ा दी गई थी।
नोएडा बोर्ड बैठक में सेक्टर-150 के एससी-02 भूखंड के संशोधित ले-आउट को मंजूरी मिलना एक अहम मोड़ माना जा रहा है। यह भूखंड करीब 13 लाख 29 हजार 745 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें करीब 29.47 प्रतिशत जमीन, यानी लगभग 3 लाख 91 हजार 930 वर्गमीटर क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग के तहत फ्लैट बनाए जा सकेंगे। अब इस भूखंड पर परियोजनाओं के नक्शे स्वीकृति के लिए आएंगे और उसके बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू हो सकेगा। इस भूखंड का मुख्य आवंटी मैसर्स लोटस ग्रीन्स है। नोएडा के रियल एस्टेट बाजार में इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। इसमें क्रिकेट स्टेडियम, गोल्फ कोर्स, टेनिस सेंटर, स्विमिंग ट्रैक और मल्टीपर्पज ग्राउंड जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। योजना के अनुसार बिल्डरों को पहले तीन साल के भीतर खेल सुविधाएं तैयार करनी होंगी। इसके बाद अगले दो वर्षों में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना होगा। यानी नोएडा में अब पहले स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और फिर हाउसिंग मॉडल पर काम होगा।
क्रेडाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता ने नोएडा प्राधिकरण के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सभी स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं से रोक हटाना एक सकारात्मक निर्णय है, जिससे 40 हजार से अधिक खरीदारों को राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले सेक्टर-150 के भूखंड संख्या-2 पर ही करीब 8 हजार फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हुआ है। नोएडा के संपत्ति बाजार में यह फैसला भरोसा लौटाने वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से फंसे खरीदार कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं के बीच परेशान थे।
नोएडा 17 अप्रैल को अपने गठन के 50 वर्ष पूरे करने जा रहा है। स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर प्राधिकरण ने बकायेदारों को राहत देने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार ग्रुप हाउसिंग, आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत, औद्योगिक, आईटी-आईटीईएस और सामान्य प्रशासन विभागों से जुड़ी संपत्तियों के लिए एकमुश्त समाधान योजना 2026 को मंजूरी दे दी गई है। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। बताया गया है कि नोएडा में इन विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों पर 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि लंबित है।
नोएडा प्राधिकरण ने शहर में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। सेक्टर-150 में कुछ महीने पहले पानी में डूबने से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद बचाव संसाधनों को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। इसी पृष्ठभूमि में अब 154 करोड़ रुपये की लागत से रोबोट समेत आधुनिक उपकरण खरीदने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नोएडा सेसमिक जोन-4 में आता है और यहां तेजी से ऊंची इमारतों का विकास हो रहा है। ऐसे में अग्निकांड, रेस्क्यू ऑपरेशन और भूकंप जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी मामले में 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में प्राधिकरण के इस फैसले के बाद अब अगली नजर अदालत की कार्यवाही पर रहेगी। यदि कानूनी स्तर पर स्थिति और स्पष्ट होती है, तो नोएडा में अटकी परियोजनाओं के लिए आगे की राह और भी आसान हो सकती है। Noida News