बड़ी खबर : कृष्ण करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया

निर्देशों के अनुसार IAS कृष्ण करुणेश को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का कार्यभार सौंपा गया है। 2011 बैच के आइएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। वह गाजियाबाद में एसडीएम एवं मुख्य विकास अधिकारी के पद पर भी रहे हैं।

कृष्ण करुणेश
कृष्ण करुणेश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Jan 2026 01:24 PM
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Noida News : नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ए सीईओ कृष्ण करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीईओ बनाया गया है l लखनऊ से इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं l निर्देशों के अनुसार IAS कृष्ण करुणेश को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का कार्यभार सौंपा गया है। 2011 बैच के आइएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। वह गाजियाबाद में एसडीएम एवं मुख्य विकास अधिकारी के पद पर भी रहे हैं।

हापुड़ व बलरामपुर में भी रह चुके हैं डीएम

हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। जनवरी 2021 से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

हापुड़ और बलरामपुर में डीएम के तौर पर निभाई बड़ी जिम्मेदारी

वह हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी रह चुके हैं। दोनों जिलों में उन्होंने कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं और प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। यही वजह है कि नोएडा-एनसीआर के प्रशासनिक ढांचे में भी उनके अनुभव को खास महत्व दिया जाता है।

शहरी विकास का लंबा अनुभव

जनवरी 2021 से कृष्णा करुणेश गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग और नियोजन जैसे क्षेत्रों में उनकी कार्यशैली को प्रभावी माना जाता है जिसका असर नोएडा जैसे शहरों के विकास मॉडल से भी जोड़ा जा रहा है। Noida News

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90 मिनट की देरी पर नोएडा में घमासान, युवराज केस की SIT रिपोर्ट तैयार

सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए

इंजीनियर युवराज
इंजीनियर युवराज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Jan 2026 11:10 AM
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Noida News : नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत ने शहर की प्रशासनिक तत्परता और रेस्क्यू सिस्टम की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की परतें खोलने के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी फैक्ट-फाइंडिंग लगभग पूरी कर ली है और अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक भेजने की तैयारी बताई जा रही है। SIT की जांच का केंद्र यही रहा लापरवाही आखिर किस स्तर पर हुई, निर्णय लेने में देरी क्यों हुई और जिम्मेदार कौन की जवाबदेही तय कैसे होगी।

नोएडा अथॉरिटी में देर रात तक चली पूछताछ

शुक्रवार को जांच की रफ्तार और सख्त हुई, जब SIT टीम दोपहर में नोएडा अथॉरिटी के मुख्यालय पहुंची और देर रात तक वहीं जमी रही। सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए। इसी दौरान SDRF के जवान और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी फाइलों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड के साथ SIT के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि पूछताछ से एक दिन पहले टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया था और ग्राउंड रियलिटी समझने के बाद सीधे नोएडा अथॉरिटी में उन अधिकारियों से जवाब मांगा, जिनके कंधों पर रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक तालमेल की जिम्मेदारी थी।

90 मिनट की देरी पर SIT का फोकस

जांच के दौरान सबसे अहम बिंदु यही रहा कि मदद की गुहार के बावजूद करीब 90 मिनट तक युवराज को बचाया क्यों नहीं जा सका। SIT ने रेस्क्यू में इस्तेमाल किए गए उपकरणों की उपलब्धता, संसाधनों की तैनाती, मौके पर मौजूद टीम के प्रतिक्रिया समय और जवानों के समय पर पानी में न उतरने जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई, या फिर निर्णय प्रक्रिया में देरी, गलत आकलन और समन्वय की कमी ने स्थिति को गंभीर बनाया। SIT ने रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल जवानों के बयान दर्ज किए हैं और उनसे स्पष्ट करने को कहा गया है कि मौके पर मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया गया, किसने निर्देश दिए और किस स्तर पर निर्णय लेने में देरी हुई। जांच का एक अहम पहलू यह भी रहा कि मौके पर मौजूद अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के बीच तालमेल में कमी तो नहीं थी और अगर थी, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।

रिपोर्ट सीएम को सौंपने की तैयारी

सूत्रों का दावा है कि SIT ने तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से जुड़े लगभग सभी तथ्य, दस्तावेज और बयान जांच में शामिल कर लिए हैं। अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की तैयारी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। नोएडा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अगर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नोएडा अथॉरिटी के संबंधित विभागों के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की आशंका भी जताई जा रही है। Noida News

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नोएडा के बिल्डर का वारंट जारी, जल्दी ही होगी कुर्की

नोएडा कमिश्नरी पुलिस के सूत्रों का दावा है कि जल्दी ही गिरफ्तारी ना होने पर बिल्डर की सारी प्रोपर्टी तथा दफ्तर की कुर्की कर ली जाएगी। नोएडा की पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह ने बिल्डर को हर हाल में गिरफ्तार करने के निर्देश जारी किए हैं।

भगोड़े बिल्डर पर पुलिस का बड़ा एक्शन
भगोड़े बिल्डर पर पुलिस का बड़ा एक्शन
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Jan 2026 04:57 PM
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Noida News : नोएडा कमिश्नरी पुलिस ने एक भगोड़े बिल्डर के विरूद्ध बड़ा एक्शन लिया है। नोएडा कमिश्नरी पुलिस  ने अदालत के आदेश पर नोएडा के चर्चित बिल्डर के विरूद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। नोएडा पुलिस की अलग-अलग टीम इस चर्चित बिल्डर की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही हैं। नोएडा कमिश्नरी पुलिस के सूत्रों का दावा है कि जल्दी ही गिरफ्तारी ना होने पर बिल्डर की सारी प्रोपर्टी तथा दफ्तर की कुर्की कर ली जाएगी। नोएडा की पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह ने बिल्डर को हर हाल में गिरफ्तार करने के निर्देश जारी किए हैं।

बहुत बड़ा फ्रॉड है नोएडा का यह बिल्डर

नोएडा कमिश्नरी पुलिस ने नोएडा के जिस बिल्डर के विरूद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया है उस बिल्डर का नाम सरदार निर्मल सिंह है। सरदार निर्मल सिंह थ्री सी के नाम से बिल्डर कंपनी चलाता था। वर्ष-2017 से पहले नोएडा प्राधिकरण में सरदार मोहिन्दर सिंह CEO के पद पर तैनात था। सरदार मोहिन्दर सिंह के साथ मिलकर निर्मल सिंह ने नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में अरबों रूपए के फ्रॉड किए थे। हाल ही में नोएडा के सेक्टर-150 के जिस प्लॉट पर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हुई है वह मौत के कुएं वाला प्लाट भी सरदार निर्मल सिंह का ही है। सरदार निर्मल सिंह ही सही मायने में विवादित बिल्डर कंपनी लोटस ग्रीन का भी मालिक है।

इंजीनियर युवराज मेहता के केस में जारी हुआ वारंट

नोएडा के सेक्टर-150 में हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नोएडा कमिश्नरी पुलिस तीन बिल्डरों को पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है। अब बारी चर्चित बिल्डर सरदार निर्मल सिंह की है। नोएडा कमिश्नरी पुलिस ने निर्मल सिंह के विरूद्ध गैर जमानती वारंटी जारी कर दिया है साथ ही नोएडा पुलिस निर्मल सिंह की प्रोपर्टी की कुर्की करने की भी तैयारी कर रही है।

बिल्डर के कारण गई युवराज मेहता की जान

आपको बता दें कि नोएडा के सेक्टर-150 में 16-17 जनवरी की दरमियानी रात को घने कोहरे के बीच युवराज मेहता गुरुग्राम से घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी कार एक तीखे मोड़ पर सडक़ से फिसलकर निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। ये गड्ढा कई सालों से बिना बैरिकेडिंग, लाइटिंग या सुरक्षा उपायों के खुला पड़ा था। युवराज ने कार की छत पर चढक़र फ्लैश लाइट जलाकर मदद मांगी, लेकिन देर रात तक कोई सहायता नहीं पहुंची और वे डूब गए। गुस्साए परिजनों का आरोप है कि ये घटना न केवल एक हादसा, बल्कि प्रशासनिक और बिल्डरों की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर पुलिस ने एमजेड विज टाउन और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। Noida News

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