नोएडा के बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच शहर को बड़ी राहत देने वाली एक अहम परियोजना ने अब रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। मास्टर प्लान रोड-1 पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए आईआईटी रुड़की ने जमीनी सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Noida News : नोएडा के बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच शहर को बड़ी राहत देने वाली एक अहम परियोजना ने अब रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। मास्टर प्लान रोड-1 पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए आईआईटी रुड़की ने जमीनी सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार को विशेषज्ञों की टीम ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ रजनीगंधा अंडरपास से सेक्टर-57 चौराहे तक लगभग 6 किलोमीटर लंबे हिस्से का विस्तृत निरीक्षण किया, जहां ट्रैफिक प्रवाह, मौजूदा ढांचे और निर्माण की संभावनाओं को बारीकी से परखा गया।
नोएडा का यह हिस्सा लंबे समय से भारी ट्रैफिक दबाव झेल रहा है। सुबह और शाम के पीक ऑवर में यहां वाहनों की रफ्तार काफी धीमी हो जाती है। ऐसे में रजनीगंधा अंडरपास से सेक्टर-57 तक एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव नोएडा के लिए बड़ी राहत देने वाला कदम माना जा रहा है। इस परियोजना के जरिए न सिर्फ यात्रा समय घटाने की कोशिश होगी, बल्कि सड़क पर मौजूदा दबाव भी कम किया जा सकेगा।
आईआईटी रुड़की की टीम ने नोएडा के इस पूरे कॉरिडोर पर कई अहम बिंदुओं का अध्ययन किया। सर्वे के दौरान यह देखा गया कि किन जगहों पर ट्रैफिक को ऊपर चढ़ाने या नीचे उतारने के लिए लूप और रैंप की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने यह भी परखा कि एलिवेटेड रोड का ढांचा सड़क के बीचों-बीच बनना ज्यादा व्यावहारिक होगा या किनारों पर निर्माण करना बेहतर रहेगा। नोएडा के इस मार्ग पर पहले से कई जगह डबल यू-टर्न बने हुए हैं। वहीं नोएडा स्टेडियम चौराहा और सेक्टर-12/22 तिराहा अब भी खुले हैं, जबकि बाकी कई कट और चौराहों को पहले ही बंद कर यू-टर्न आधारित व्यवस्था लागू की जा चुकी है। यही वजह है कि पूरे ट्रैफिक सिस्टम को समझने के लिए विस्तृत फिजिबिलिटी सर्वे को जरूरी माना गया है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-16 स्थित रजनीगंधा अंडरपास के आगे सेक्टर-3 से सेक्टर-57 तक एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पहले भी तैयार की गई थी। हालांकि बीते कुछ वर्षों में नोएडा की इस सड़क पर यातायात का स्वरूप काफी बदला है। नए यू-टर्न, बंद किए गए कट, बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या ने इस परियोजना को नए सिरे से देखने की जरूरत पैदा की है। अब नोएडा में इसी बदले हुए ट्रैफिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए सर्वे कराया जा रहा है, ताकि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बेहतर रोड प्लान तैयार किया जा सके। नोएडा में इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि रजनीगंधा अंडरपास के ऊपर से मेट्रो लाइन गुजर रही है। ऐसे में एलिवेटेड रोड की डिजाइन तैयार करना और निर्माण के लिए सुरक्षित विकल्प चुनना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि आईआईटी रुड़की की टीम तकनीकी पहलुओं को बारीकी से जांच रही है, ताकि नोएडा में यह परियोजना बिना किसी बड़े व्यवधान के आगे बढ़ सके। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि आईआईटी रुड़की की टीम सर्वे पूरा करने के बाद इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट में यह तय होगा कि नोएडा में एलिवेटेड रोड का अंतिम स्वरूप क्या होगा, कहां से एंट्री और एग्जिट होंगे, और ट्रैफिक प्रबंधन किस मॉडल पर किया जाएगा। डीपीआर आने के बाद ही यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि नोएडा के इस 6 किलोमीटर लंबे रूट पर निर्माण का काम किस चरण में और किस समयसीमा में शुरू किया जाएगा।
नोएडा में सिर्फ रजनीगंधा अंडरपास से सेक्टर-57 तक ही नहीं, बल्कि एक और एलिवेटेड रोड परियोजना पर भी काम चल रहा है। आईआईटी रुड़की की टीम ने महामाया फ्लाईओवर के पास से सेक्टर-94 तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का भी सर्वे किया है। यह मार्ग करीब पौने दो किलोमीटर लंबा बताया जा रहा है। नोएडा के इस हिस्से में पहले से फ्लाईओवर और मेट्रो जैसी संरचनाएं मौजूद हैं। ऐसे में यहां निर्माण को लेकर तकनीकी व्यवहार्यता, ट्रैफिक डायवर्जन और डिजाइन की संभावनाओं का अलग से अध्ययन किया जा रहा है। Noida News