नोएडा में मेट्रो और एलिवेटेड रोड के पिलरों पर बने वर्टिकल गार्डन की हरियाली पर संकट है। पौधे सूखने की शिकायतों पर प्राधिकरण ने ठेकेदारों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है।

UP News: उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने के लिए मेट्रो तथा एलिवेटेड रोड के पिलरों के नीचे तैयार किए गए वर्टिकल गार्डन अब रखरखाव की कमी से अपनी खूबसूरती खोता जा रहा है। नोएडा में स्थित बॉटेनिकल गार्डन में कई स्थानों पर पौधे सूख रहे हैं और गार्डन में हरियाली लगातार कम होती दिखाई दे रही है। इस स्थिति को लेकर शहर के नागरिकों में नाराजगी है। नागरिकों का आरोप है कि हॉर्टिकल्चर विभाग से जुड़े ठेकेदारों की कथित लापरवाही और नियमित रखरखाव की कमी का खामियाजा शहर की हरियाली को भुगतना पड़ रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। ठेकेदारों से जवाब मांगा गया है कि वर्टिकल गार्डन का नियमित रखरखाव क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है। इस दौरान गार्डन की स्थिति सुधारने के साथ-साथ पौधों के रखरखाव को लेकर जवाब भी देना होगा। प्राधिकरण ने अधिकारियों को विभिन्न स्थानों पर बने वर्टिकल गार्डन का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
नोएडा में अलग-अलग प्रमुख मार्गों पर मेट्रो पिलरों और एलिवेटेड रोड के पिलरों को आकर्षक बनाने तथा शहर में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से वर्टिकल गार्डन विकसित किए गए थे। इन गार्डन में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं और इनके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदारों को सौंपी गई है। लेकिन नागरिकों का कहना है कि कई जगह स्थिति ऐसी हो गई है कि जिस हरियाली और सुंदरता के लिए यह व्यवस्था बनाई गई थी, वही हरियाली गायब होती जा रही है। समय पर पानी नहीं मिलने, पौधों की कटाई-छंटाई और नियमित देखभाल नहीं होने के कारण पौधों के खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। नागरिकों का सवाल है कि यदि किसी ठेकेदार को पौधों की देखभाल और गार्डन के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है तो उसके लिए निर्धारित मानकों का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
नोएडा में पार्कों और सार्वजनिक स्थानों की हरियाली को लेकर लंबे समय से नागरिक अपनी आवाज उठाते रहे हैं। पौधों से प्रेम करने वाले अनेक नागरिकों ने नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र और शिकायतें भेजकर पार्कों तथा ग्रीन बेल्ट में पौधों के सूखने और रखरखाव की कमी का मुद्दा उठाया है। नागरिकों की ओर से इस संबंध में नोएडा क्षेत्र के सांसद डॉ. महेश शर्मा, विधायक पंकज सिंह तथा नोएडा महानगर भाजपा अध्यक्ष महेश चौहान को भी शिकायतें भेजे जाने की बात सामने आई है। इन शिकायतों में हॉर्टिकल्चर विभाग के अंतर्गत काम करने वाले ठेकेदारों की कार्यप्रणाली और पार्कों के रखरखाव पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ शिकायतकर्ताओं ने ठेकेदारी व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
नागरिकों की लगातार शिकायतों के बीच अब नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने हॉर्टिकल्चर से जुड़े कार्यों की निगरानी तेज करने के संकेत दिए हैं। वर्टिकल गार्डन के मामले में एसीईओ वंदना त्रिपाठी द्वारा एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि निरीक्षण और जांच में संबंधित ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का समाधान होगा या फिर जिन स्थानों पर पौधे सूख चुके हैं, वहां नए पौधे लगाने और नियमित सिंचाई एवं रखरखाव की ठोस व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
वर्टिकल गार्डन के साथ-साथ नोएडा के अनेक पार्कों में पौधों के सूखने को लेकर भी नागरिक शिकायतें कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि नोएडा को देश के सबसे सुंदर और हरे-भरे शहरों में शामिल करने के लिए बड़े स्तर पर हॉर्टिकल्चर कार्य कराए गए हैं, लेकिन यदि इनके रखरखाव पर पर्याप्त निगरानी नहीं होगी तो करोड़ों रुपये के सौंदर्यीकरण कार्यों का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। नागरिकों की मांग है कि प्राधिकरण केवल पौधों के सूखने के बाद कार्रवाई न करे, बल्कि हॉर्टिकल्चर ठेकेदारों के काम की नियमित निगरानी, पानी की उपलब्धता, पौधों की जीवित रहने की दर और मेंटेनेंस की गुणवत्ता की भी नियमित जांच करे।
इसी समीक्षा के दौरान एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने डी-पार्क में चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। कार्य की गति धीमी मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारी को ठेकेदार कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए। एसीईओ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ठेकेदारों को निर्धारित समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुसार काम पूरा करना होगा। वर्टिकल गार्डन को लेकर प्राधिकरण की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नोएडा में सौंदर्यीकरण और हरियाली पर लगातार बड़ी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में पौधों के सूखने और गार्डन के खराब होने की शिकायतें सीधे तौर पर रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि एक सप्ताह में संबंधित ठेकेदार क्या जवाब देते हैं और प्राधिकरण सूख चुके पौधों तथा खराब हो चुके वर्टिकल गार्डन को दोबारा हरा-भरा बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। UP News:
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