नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़े हिंसा मामले में आरोपी पत्रकार और अनुवादक सत्यम वर्मा को अदालत से राहत मिली है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एक एफआईआर में जमानत मंजूर कर दी।

Noida News : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़े हिंसा मामले में आरोपी पत्रकार और अनुवादक सत्यम वर्मा को अदालत से राहत मिली है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एक एफआईआर में जमानत मंजूर कर दी। अदालत के समक्ष पेश सामग्री के आधार पर वर्मा को हिंसक गतिविधियों से जोड़ने वाले पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। सत्यम वर्मा को पुलिस ने 13 अप्रैल को नोएडा के औद्योगिक इलाकों में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि उन्होंने श्रमिकों को उकसाने और हिंसा को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। Noida News
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में 13 अप्रैल को श्रमिकों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था। प्रदर्शन के दौरान पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग थानों में कई एफआईआर दर्ज कीं और जांच के दौरान कई लोगों को आरोपी बनाया। पुलिस ने सत्यम वर्मा के अलावा आदित्य आनंद, हिमांशु ठाकुर और अन्य लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया। जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि कुछ आरोपियों ने श्रमिकों को भड़काने और प्रदर्शन को हिंसक बनाने में भूमिका निभाई। पुलिस ने वर्मा को 17 अप्रैल को लखनऊ से पकड़ा था और बाद में उनके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई। मई में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की गई थी। Noida News
पुलिस के मुताबिक, सत्यम वर्मा का संबंध ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ से जुड़े लोगों से रहा है और जांच में उनके संपर्कों को भी खंगाला गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्होंने श्रमिकों को कथित तौर पर उकसाने और आंदोलन को आक्रामक दिशा देने में भूमिका निभाई। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य खुफिया इनपुट का हवाला देते हुए वर्मा को हिंसा से जोड़ने का दावा किया था। पुलिस का यह भी आरोप था कि उनके बैंक खातों में विदेश से एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम आई थी। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अदालत में बचाव पक्ष ने पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर सवाल उठाए। जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन का मुद्दा उठाया। वकील की दलील थी कि किसी बैंक खाते में रकम का आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसका संबंध नोएडा की हिंसा या किसी कथित आपराधिक साजिश से है। बचाव पक्ष ने पुलिस से कथित वित्तीय लेनदेन और हिंसा के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाले ठोस दस्तावेज पेश किए जाने की मांग की। इसी तरह के आरोपों का उल्लेख पुलिस ने पहले भी किया था। Noida News
जमानत पर सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह रहा कि उपलब्ध सामग्री से सत्यम वर्मा की कथित हिंसक गतिविधियों में प्रत्यक्ष भूमिका कितनी स्थापित होती है। अदालत ने संबंधित एफआईआर में उपलब्ध सामग्री का परीक्षण किया और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर जमानत दी। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि जमानत का आदेश आरोपी को मामले से पूरी तरह बरी किए जाने के बराबर नहीं होता। सत्यम वर्मा के खिलाफ अन्य एफआईआर और कानूनी कार्यवाही अलग से जारी है। Noida News
सत्यम वर्मा को इस मामले में पहले भी अदालत से राहत नहीं मिली थी। अप्रैल में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर में जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। उस समय अदालत ने आरोपों को गंभीर और गैर-जमानती प्रकृति का माना था। जून में जिला अदालत ने भी एक अन्य जमानत याचिका खारिज कर दी थी। Noida News
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