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नोएडा में पानी को लेकर खतरे की घंटी अब और तेज सुनाई देने लगी है। गौतमबुद्ध नगर में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और सबसे चिंताजनक तस्वीर नोएडा से सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों में नोएडा का भूजल 6.22 मीटर, यानी करीब 20.41 फीट तक नीचे चला गया है।

Noida News : नोएडा में पानी को लेकर खतरे की घंटी अब और तेज सुनाई देने लगी है। गौतमबुद्ध नगर में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और सबसे चिंताजनक तस्वीर नोएडा से सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों में नोएडा का भूजल 6.22 मीटर, यानी करीब 20.41 फीट तक नीचे चला गया है। कई इलाकों में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पानी 120 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। Noida News
प्रशासनिक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 में मानसून से पहले नोएडा का भूजल स्तर करीब तीन मीटर तक और नीचे चला गया था। बाद में अच्छी बारिश और कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बनने के बावजूद जलस्तर में जो सुधार दर्ज हुआ, वह बेहद मामूली रहा। यानी नोएडा को मानसून से जितनी राहत मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट रही है। पहले जहां अधिकतम एक या दो मीटर तक का उतार-चढ़ाव दर्ज होता था, वहीं अब नोएडा में गिरावट की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज होती दिख रही है। यही रुझान आने वाले समय के लिए बड़ा खतरे का संकेत माना जा रहा है। Noida News
आंकड़ों पर नजर डालें तो नोएडा में भूजल संकट की गंभीरता साफ समझ आती है। वर्ष 2017 में मानसून से पहले भूजल स्तर 19.56 मीटर यानी 64.17 फीट के आसपास था, जबकि वर्ष 2025 में यही स्तर गिरकर 25.78 मीटर यानी 84.54 फीट तक पहुंच गया। इसका मतलब साफ है कि कुछ ही वर्षों में नोएडा का पानी धरती के काफी और नीचे खिसक गया है। वहीं, ग्रेटर नोएडा में भी भूजल स्तर में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। वहां मानसून से पहले जलस्तर 13.52 मीटर और मानसून के बाद 13.33 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि ग्रेटर नोएडा में कुछ सुधार दिखा, लेकिन संवेदनशील इलाकों की स्थिति अब भी चिंता पैदा करने वाली है। Noida News
नोएडा के कई स्थानों पर भूजल स्तर बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है। गढ़ी चौखंडी प्राथमिक विद्यालय क्षेत्र में भूजल लगभग 37 मीटर यानी 120 फीट तक दर्ज किया गया है। छिजारसी राजकीय डिग्री कॉलेज क्षेत्र में यह स्तर करीब 36 मीटर यानी 118.11 फीट पर है। सेक्टर-39 स्थित डिग्री कॉलेज और कोतवाली क्षेत्र का भूजल भी 30 मीटर यानी 98.43 फीट से अधिक नीचे जा चुका है। Noida News
नोएडा में भूजल गिरने के पीछे वर्षा जल संचयन प्रणाली का कमजोर होना भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टरों और सोसाइटियों में लगे करीब 95 प्रतिशत वर्षा जल संचय संयंत्र या तो खराब हैं या प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे। इसका नतीजा यह है कि बारिश का बड़ा हिस्सा जमीन के भीतर जाने के बजाय बहकर निकल जाता है। अगर नोएडा में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सही हालत में होते, तो भूजल स्तर में गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता था। लेकिन मौजूदा हालत यह दिखाती है कि शहर में जल संरक्षण को लेकर अब भी गंभीर अमल की कमी बनी हुई है। Noida News
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