प्राधिकरण ने बकायदारों से राहत पैकेज हटाने का प्रस्ताव बोर्ड में गया था। शासन के अप्रूवल का इंतजार था। नियमानुसार एक्शन लेने का अप्रूवल मिल गया है। डेवलपर की फाइलों को केस टू केस देखा जाएगा।

नोएडा में गगनचुंबी इमारतें बनाने वाले बकायेदार बिल्डर्स पर अब नोएडा प्राधिकरण का चाबुक चलेगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश शासन ने भी हरी झंडी दे दी है। इन बिल्डर्स का भूमि आवंटन भी रद्द किया जा सकता है।
मालूम हो नोएडा में कि करीब 42 प्रोजेक्ट्स के बिल्डर्स पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 5500 करोड़ रूपये की देनदारी बकाया है। इस बीच बिल्डर्स को अमिताभ कांत समिति के तहत काफी राहत भी दी गई थी। इसके बावजूद भी बिल्डर्स ने बकाया रकम जमा नहीं कराई।
नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि प्राधिकरण ने बकायदारों से राहत पैकेज हटाने का प्रस्ताव बोर्ड में गया था। शासन के अप्रूवल का इंतजार था। नियमानुसार एक्शन लेने का अप्रूवल मिल गया है। डेवलपर की फाइलों को केस टू केस देखा जाएगा। प्रत्येक केस पर क्या निर्णय लिया जाएगा ये बोर्ड तय करेगा। आगामी बोर्ड में सभी केस की स्टडी करके प्रस्ताव लाया जाएगा। बता दें कि बिल्डर पर करीब साढ़े पांच हजार करोड़ का बकाया है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत यूपी सरकार ने 21 दिसंबर 2023 को शासनादेश जारी किया था। इसके बाद प्राधिकरण ने पहले चरण में उन 57 बिल्डर परियोजनाओं को शामिल किया, जिनका किसी न्यायालय में मामला विचाराधीन नहीं था। मार्च-अप्रैल 2024 से बिल्डरों ने बकाया जमा करवाना शुरू कर दिया था।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि 57 में से जिन 35 बिल्डरों ने कुल बकाया में से 25 प्रतिशत राशि जमा की है, वह आगे किस्ते नहीं दे रहे, जबकि 100 करोड़ रुपये तक के बकायेदार को एक साल में पूरी राशि जमा करनी थी। इनके अलावा 12 परियोजना के बिल्डरों ने कुछ-कुछ बकाया राशि जमा की है। 10 परियोजना के बिल्डरों ने कोई बकाया जमा नहीं किया। इस महीने हुई बोर्ड बैठक में प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार ने आदेश दिया था कि बिल्डरों को बकाया जमा करने के लिए 31 अक्टूबर तक का अंतिम समय दिया गया था। अगर इस दौरान भी बिल्डर बकाया जमा नहीं करते हैं तो उनको दिया राहत पैकेज समाप्त कर दिया जाए। प्राधिकरण ने राहत पैकेज के अंतर्गत कोविड काल के दौरान दो साल का जीरो पीरियड और एनजीटी के आदेश के तहत अलग भी जीरो पीरियड का लाभ दे रखा है। अब इस मामले में शासन से अप्रूवल आ गया है।