नोएडा के सेक्टर-17 स्थित एसीसी कॉन्वेंट स्कूल में महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

Noida News। समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान उनके पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति से नहीं, बल्कि उनके सेवा भाव और दूसरों के जीवन में लाए गए बदलाव से बनती है। नोएडा की वयोवृद्ध समाजसेविका और एसीसी कॉन्वेंट स्कूल की पूर्व प्रधानाचार्य सिस्टर सेलीन ऐसी ही शख्सियत हैं। जरूरतमंदों और रिक्शा चालकों की वर्षों से मदद कर रही सिस्टर सेलीन को लोग प्यार और सम्मान से ‘रिक्शा वाली दीदी’ कहते हैं। गांधी जयंती पर उन्होंने एक बार फिर अपने सेवाभाव की अनूठी मिसाल पेश करते हुए 300 रिक्शा चालकों को टी-शर्ट वितरित कीं। उनकी यह पहल केवल वस्त्र वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के मेहनतकश वर्ग के प्रति सम्मान, संवेदना और आत्मीयता का संदेश भी है। करीब तीन दशक से समाजसेवा में सक्रिय सिस्टर सेलीन अब तक लगभग 550 रिक्शा चालकों को निशुल्क रिक्शे उपलब्ध कराने में योगदान दे चुकी हैं। उनका प्रयास रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को केवल सहायता देकर कुछ समय के लिए राहत न दी जाए, बल्कि उन्हें ऐसा साधन उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे खुद मेहनत करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। इसी सोच ने उन्हें रिक्शा चालकों के बीच एक अलग पहचान दिलाई है। Noida News

नोएडा के सेक्टर-17 स्थित एसीसी कॉन्वेंट स्कूल में महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने लघु नाटकों के माध्यम से महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, विचारों तथा आदर्शों को प्रस्तुत किया। बच्चों की प्रस्तुतियों में सत्य, सादगी, देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भाव का संदेश देखने को मिला। दोनों महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के समापन के बाद सिस्टर सेलीन ने उपस्थित 300 रिक्शा चालकों को टी-शर्ट वितरित कीं। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंदों के साथ खुशियां साझा करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करने का संदेश दिया। सिस्टर सेलीन ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्श हमें सादगी के साथ जीवन जीने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने की प्रेरणा देते हैं। इन महान विभूतियों के विचारों को वास्तविक जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम में फादर आशीष, श्रीमती रिया, फादर सीनू, क्रिस्टोफर, अनिल, अजीज और डॉक्टर विजय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।Noida News
सिस्टर सेलीन की समाजसेवा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाने की उनकी सोच है। रिक्शा चलाकर आजीविका कमाने वाले अनेक लोग आर्थिक तंगी के कारण अपना रिक्शा खरीदने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में उन्हें किराये पर रिक्शा चलाना पड़ता है, जिससे उनकी रोजाना की कमाई का एक हिस्सा किराये में चला जाता है।
इस समस्या को समझते हुए सिस्टर सेलीन ने रिक्शा चालकों को निशुल्क रिक्शे उपलब्ध कराने का प्रयास शुरू किया। करीब 30 वर्षों से जारी इस पहल के तहत अब तक लगभग 550 रिक्शा चालकों को रिक्शे दिए जा चुके हैं। अपना रिक्शा मिलने से चालक अपनी मेहनत की कमाई का अधिक हिस्सा बचा सकते हैं और परिवार की जरूरतें पूरी करने में बेहतर योगदान दे सकते हैं। इस तरह एक रिक्शा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकता है।
उनकी सेवा का दायरा केवल रिक्शे उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। सिस्टर सेलीन विभिन्न अवसरों पर रिक्शा चालकों के बीच पहुंचकर उनके साथ खुशियां साझा करती हैं। क्रिसमस हो या कोई अन्य त्योहार, वह जरूरतमंदों को याद रखना नहीं भूलतीं।Noida News
सिस्टर सेलीन की सेवा भावना का एक और प्रेरक उदाहरण उनकी सम्मान राशि से जुड़ा है। समाज के प्रति उनके योगदान के लिए विभिन्न संस्थाओं की ओर से उन्हें समय-समय पर सम्मानित किया जाता रहा है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव समिति की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया था। इस अवसर पर उन्हें 25 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। आमतौर पर सम्मान में मिली राशि को व्यक्तिगत जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सिस्टर सेलीन ने इसे भी समाजसेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पूरी राशि प्रोविंशियल सिस्टर एंजेल ग्रेस को सौंप दी। इसके बाद प्रोविंशियल सिस्टर एंजेल ग्रेस ने अपनी ओर से 45 हजार रुपये और दिए। इस प्रकार कुल 70 हजार रुपये की राशि से रिक्शा चालकों के लिए टी-शर्ट खरीदी गईं। गांधी जयंती के अवसर पर इन्हीं टी-शर्ट का 300 रिक्शा चालकों के बीच वितरण किया गया। यह पहल दिखाती है कि सिस्टर सेलीन के लिए सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी है।Noida News
आज के दौर में जब समाज में सफलता को अक्सर आर्थिक उपलब्धियों और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है, सिस्टर सेलीन का जीवन सेवा और संवेदना की एक अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि समाज के कमजोर वर्ग की सहायता करना केवल दान देने का विषय नहीं, बल्कि उसे सम्मान और बराबरी का एहसास कराने का भी प्रयास है। गांधी जयंती पर 300 रिक्शा चालकों को टी-शर्ट बांटने की पहल इसी भावना का विस्तार है। एक ओर जहां बच्चों ने गांधी और शास्त्री के आदर्शों को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से याद किया, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों के साथ खुशियां साझा करके उन आदर्शों को व्यवहार में उतारने का प्रयास भी किया गया।
लगभग 550 रिक्शा चालकों को रोजगार का साधन उपलब्ध कराने से लेकर विभिन्न अवसरों पर उनकी मदद करने तक, सिस्टर सेलीन का सफर बताता है कि निरंतर किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। नोएडा में ‘रिक्शा वाली दीदी’ के नाम से पहचानी जाने वाली सिस्टर सेलीन की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि समाजसेवा की असली पहचान सहायता की राशि से नहीं, बल्कि उससे किसी व्यक्ति के जीवन में आने वाले बदलाव से होती है।Noida News
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