नोएडा की ‘स्पोर्ट्स सिटी’ बनी भ्रष्टाचार का अड्डा, CBI के शिकंजे में बिल्डर
Noida News
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 06:21 AM
Noida News : नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में हुए कथित घोटाले और अनियमितताओं की गहराई को समझने के लिए नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) ने ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए एक विस्तृत सर्वे शुरू किया है। इसका उद्देश्य खेल सुविधाओं, आवासीय परियोजनाओं और खाली पड़े प्लॉट्स की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करना है। खास बात यह है कि इस सर्वे में यह भी जांच की जा रही है कि कहीं बिल्डरों ने बिना अनुमति निर्माण तो नहीं किया।
प्राधिकरण यह सर्वे अपनी आंतरिक जांच के अलावा पीएसी (लोक लेखा समिति) में चल रही सुनवाई और सीबीआई की पूछताछ में मदद के लिए करवा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सर्वे में यह भी देखा जा रहा है कि जिन स्थानों पर खेल सुविधाएं विकसित की जानी थीं, वहां वाकई खेल गतिविधियों के लिए आवश्यक ढांचा खड़ा हुआ या नहीं। यदि नहीं हुआ तो उस स्थान का उपयोग किस प्रकार किया गया है क्या वह खाली है या किसी और तरह का निर्माण कर लिया गया है।
इन सभी पहलुओं को किया जा रहा बारिकी से इकट्ठा
स्पोर्ट्स सिटी के तहत कितनी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां पूरी हो चुकी हैं, कितनी अधूरी हैं और उनमें कितने लोग रह रहे हैं, उनके भुगतान की स्थिति क्या है? इन सभी पहलुओं पर बारीकी से डाटा इकट्ठा किया जा रहा है। सेक्टर-78, 79, 150 और 152 में विकसित की जा रही स्पोर्ट्स सिटी में डेवलपर्स की भूमिका और उनके द्वारा किए गए निर्माण कार्यों की वैधता की भी जांच की जा रही है।
विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही निगरानी
इस सर्वेक्षण की निगरानी विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही है और सभी रिपोर्टों को एकत्र कर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पीएसी की लखनऊ में चल रही सुनवाई में बार-बार ग्राउंड रियलिटी रिपोर्ट की आवश्यकता जताई गई है। ऐसे में यह सर्वे आगामी सुनवाई में अहम भूमिका निभा सकता है।
CBI ने दर्ज की तीन FIR
सीबीआई ने भी इस मामले में स्वतंत्र रूप से सर्वेक्षण कराया है और जरूरत पड़ने पर नोएडा प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट उनके साथ साझा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा स्पोर्ट्स सिटी मामले में CBI और ED से जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद सीबीआई ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें लॉजिक्स इंफ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और जनायडू स्टेट के नाम शामिल हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने 2011 से 2017 के बीच नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर घर खरीदारों के पैसे हड़प लिए।
डेवलपर्स को सस्ते दामों में दी गई जमीन
CNG की ऑडिट रिपोर्ट में पहले ही इस पूरे प्रकरण में भारी वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, डेवलपर्स को जमीन सस्ते दामों पर दी गई, और उन्होंने नोएडा प्राधिकरण की जानकारी के बिना स्वामित्व का गैरकानूनी हस्तांतरण किया। न तो लीज प्रीमियम दिया गया, न ही जुर्माना और ट्रांसफर चार्ज अदा किए गए।
9000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका
सबसे गंभीर आरोप यह है कि खेल के बुनियादी ढांचे के अधूरे होने के बावजूद कई बिल्डरों को अधिभोग प्रमाण पत्र (OC) जारी कर दिए गए। इस पूरे प्रकरण से राज्य सरकार और नोएडा प्राधिकरण को करीब 9000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है। अब जबकि CBI जांच की गति तेज हो चुकी है और PAC की निगरानी जारी है, यह सर्वे आगामी कार्रवाई की दिशा तय करने में एक अहम दस्तावेज साबित हो सकता है। Noida News