नोएडा में सांसद एवं विधायक खेल स्पर्धा का हुआ भव्य आगाज

नोएडा में आयोजित इस खेल महोत्सव को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला। शहर के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे युवा खिलाड़ियों ने आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की। नोएडा स्टेडियम पूरे दिन खेल भावना, ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा के माहौल से गुलजार रहा।

नोएडा में खेल महोत्सव का शुभारंभ
नोएडा में खेल महोत्सव का शुभारंभ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 12:32 PM
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Noida News : नोएडा में खेल प्रतिभाओं को मंच देने की दिशा में एक बड़ा आयोजन शुरू हो गया है। नोएडा स्टेडियम में शनिवार से दो दिवसीय सांसद खेल महोत्सव और विधायक खेल स्पर्धा का शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर गौतमबुद्धनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा और नोएडा के विधायक पंकज सिंह ने कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। नोएडा में आयोजित इस खेल महोत्सव को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला। शहर के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे युवा खिलाड़ियों ने आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की। नोएडा स्टेडियम पूरे दिन खेल भावना, ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा के माहौल से गुलजार रहा।

नोएडा के खिलाड़ियों को मिलेगा अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका

इस खेल स्पर्धा के तहत विभिन्न आयु वर्गों में मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में कुल 8 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, भारोत्तोलन, जूडो और बैडमिंटन जैसे खेल शामिल हैं। नोएडा के उभरते खिलाड़ियों के लिए यह आयोजन खुद को साबित करने का अहम मंच माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस तरह के आयोजन स्थानीय स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का भी काम करते हैं।

भाजपा पदाधिकारी और खेल विभाग के अधिकारी रहे मौजूद

नोएडा में आयोजित सांसद खेल महोत्सव और विधायक खेल स्पर्धा को केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं को खेलों के माध्यम से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से नोएडा की खेल प्रतिभाओं को पहचान मिलने में मदद मिलेगी और युवाओं में फिटनेस व अनुशासन के प्रति रुझान भी बढ़ेगा। नोएडा स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान भाजपा और खेल विभाग से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इस मौके पर भाजपा नोएडा महानगर अध्यक्ष महेश चौहान, डिम्पल आनंद, चंदगीराम यादव, मनीष शर्मा, अमित त्यागी, विनोद शर्मा, युवा मोर्चा अध्यक्ष रामनिवास यादव, महामंत्री विपुल शर्मा, भूपेश चौधरी, चमन अवाना और जिला क्रीड़ा अधिकारी डॉ. परवेज अली सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। Noida News

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नोएडा में घर खरीदारों को मिली बड़ी राहत, फिर से शुरू हुई रजिस्ट्री प्रक्रिया

नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में यह मामला काफी समय से चर्चा में था, क्योंकि सोसाइटी में लोग रह रहे थे, कब्जा मिल चुका था, लेकिन मालिकाना हक से जुड़ी औपचारिकताएं अधूरी थीं। अब बकाया रकम जमा होने के बाद इस अटके हुए मामले में निर्णायक मोड़ आ गया है।

नोएडा में फ्लैट रजिस्ट्री को मिली रफ्तार
नोएडा में फ्लैट रजिस्ट्री को मिली रफ्तार
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userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 11:28 AM
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Noida News : नोएडा के सेक्टर-137 स्थित पैरामाउंट फ्लोराविले सोसाइटी के हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से रजिस्ट्री की प्रतीक्षा कर रहे 1521 फ्लैटों के मालिकों के लिए अब रास्ता लगभग पूरी तरह साफ हो गया है। परियोजना से जुड़े बिल्डर ने नोएडा प्राधिकरण के पास लंबित 80.48 करोड़ रुपये की बकाया राशि जमा करा दी है, जिसके बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में यह मामला काफी समय से चर्चा में था, क्योंकि सोसाइटी में लोग रह रहे थे, कब्जा मिल चुका था, लेकिन मालिकाना हक से जुड़ी औपचारिकताएं अधूरी थीं। अब बकाया रकम जमा होने के बाद इस अटके हुए मामले में निर्णायक मोड़ आ गया है।

सेक्टर-137 की अटकी रजिस्ट्री को मिली रफ्तार

नोएडा के उभरते आवासीय क्षेत्रों में शामिल सेक्टर-137 स्थित यह परियोजना करीब 12.375 एकड़ में फैली हुई है। पैरामाउंट फ्लोराविले में कुल 16 टावर बनाए गए हैं, जिनमें 1521 फ्लैट शामिल हैं। इनमें से 14 टावरों को 10 मार्च 2015 को ही अधिभोग प्रमाणपत्र मिल चुका था, लेकिन नोएडा प्राधिकरण से जुड़े बकाये और वित्तीय विवाद के कारण सभी खरीदारों की रजिस्ट्री समय पर नहीं हो पाई। अब बिल्डर द्वारा बकाया राशि जमा करने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने शेष दो टावरों का भी अधिभोग प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। इससे उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो वर्षों से अपने घर की वैधानिक रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे थे।

अमिताभ कांत समिति के पैकेज से सुलझा मामला

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डर ने यह भुगतान अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के आधार पर लागू राहत पैकेज के तहत किया है। इस पैकेज का उद्देश्य नोएडा समेत प्रदेश की उन आवासीय परियोजनाओं को राहत देना है, जो लंबे समय से फंसी हुई हैं और जहां खरीदारों का हित प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि पैरामाउंट फ्लोराविले परियोजना फिलहाल यूपी रेरा के दायरे में नहीं आती। साथ ही अब इस परियोजना पर नोएडा प्राधिकरण का कोई वित्तीय बकाया शेष नहीं बचा है। हालांकि, प्राधिकरण और बिल्डर के बीच बकाये को लेकर जो विवाद पहले से चला आ रहा था, वह अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

खरीदारों को मिलेगा मालिकाना हक

बिल्डर प्रबंधन का कहना है कि मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद खरीदारों के हित को सर्वोपरि रखते हुए बकाया राशि ‘अंडर प्रोटेस्ट’ जमा कर दी गई, ताकि नोएडा में रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। कंपनी का दावा है कि अब रजिस्ट्री का काम नियमित रूप से जारी रहेगा। नोएडा के इस फैसले से उन परिवारों में नई उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से अपने आशियाने पर कानूनी अधिकार पाने का इंतजार कर रहे थे। यह मामला सिर्फ सेक्टर-137 तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी के हजारों खरीदारों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र के खरीदारों को भी मिल सकती है राहत

पैरामाउंट फ्लोराविले का मामला आगे बढ़ने के बाद यह संभावना भी मजबूत हुई है कि ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी की कई अन्य परियोजनाओं में भी रजिस्ट्री और मालिकाना हक के लंबित मामलों का समाधान निकल सकता है। जानकारी के अनुसार, चार हजार से अधिक खरीदारों को भी इससे अप्रत्यक्ष राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा क्षेत्र के प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि इसी तरह वित्तीय अड़चनें दूर की जाती रहीं, तो लंबे समय से फंसी हाउसिंग परियोजनाओं को नई दिशा मिल सकती है।

रजिस्ट्री में देरी पर बिल्डर को आयोग का झटका

इस बीच, समय पर रजिस्ट्री न करने के मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिल्डर के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव और सदस्य सुधा उपाध्याय शामिल थे, ने सुनवाई के बाद बिल्डर को पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने बिल्डर को 50 हजार रुपये मानसिक पीड़ा के लिए, 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में और स्टांप शुल्क के रूप में जमा धनराशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया है। मामले के अनुसार, गोलागंज जगत नारायण रोड निवासी अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ खान की पत्नी सुरैया बेगम ने जनवरी 2016 में नोएडा की पैरामाउंट फ्लोराविले सोसाइटी के सेल्सिया टावर में 3 बीएचके फ्लैट बुक कराया था। इसके लिए करीब 70 लाख रुपये जमा किए गए थे। बाद में बिल्डर ने कब्जा तो दे दिया, लेकिन रजिस्ट्री पूरी नहीं हुई। रजिस्ट्री के लिए 4,55,500 रुपये स्टांप ड्यूटी के रूप में भी जमा करा दिए गए थे। इसी दौरान वर्ष 2019 में आवंटी सुरैया बेगम का निधन हो गया। इसके बाद फ्लैट मोहम्मद आरिफ खान के नाम ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन रजिस्ट्री फिर भी नहीं की गई। पीड़ित पक्ष का आरोप था कि बिल्डर लगातार यह कहकर जिम्मेदारी टालता रहा कि रजिस्ट्री नोएडा प्राधिकरण करेगा। आखिरकार मामले को लेकर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बाद में जनवरी 2025 में जाकर रजिस्ट्री पूरी हो सकी।

रखरखाव शुल्क और ब्याज पर आयोग ने दिया स्पष्ट आदेश

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि बिल्डर ने वर्ष 2022 से रखरखाव शुल्क वसूलना शुरू कर दिया था। इस पर आयोग ने साफ कहा कि मेंटेनेंस चार्ज केवल ओसी/सीसी जारी होने की तारीख से ही वसूला जा सकता है। साथ ही, पहले से जमा धनराशि को समायोजित करने का भी निर्देश दिया गया। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि 28 जुलाई 2016 से 27 जनवरी 2025 तक स्टांप शुल्क के रूप में जमा रकम पर 8 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज अदा किया जाए। मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमे का खर्च भी एक महीने के भीतर देने को कहा गया है। Noida News

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नोएडा की फिजा हुई और जहरीली, CREA रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट ने नोएडा की हवा को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 की सर्दियों में नोएडा देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर दर्ज हुआ। इस सूची में गाजियाबाद पहले नंबर पर रहा।

नोएडा की हवा पर बड़ा खुलासा
नोएडा की हवा पर बड़ा खुलासा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 10:58 AM
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Noida News : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा को अब तक तेज रफ्तार विकास, ऊंची इमारतों, एक्सप्रेसवे और कॉरपोरेट कल्चर वाले शहर के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब इसी नोएडा की पहचान पर प्रदूषण का गहरा साया पड़ता नजर आ रहा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट ने नोएडा की हवा को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 की सर्दियों में नोएडा देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर दर्ज हुआ। इस सूची में गाजियाबाद पहले नंबर पर रहा। यह रिपोर्ट केवल आंकड़े नहीं बताती, बल्कि यह भी संकेत देती है कि NCR के इस तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के दावे फिलहाल जमीन पर कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर नोएडा और आसपास के इलाकों में अभी ठोस, सख्त और लगातार कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यहां की हवा और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

सर्दियों में नोएडा की हवा रही बेहद खराब

CREA की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों के दौरान नोएडा में पीएम 2.5 का औसत स्तर 166 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। वहीं ग्रेटर नोएडा में यह स्तर 151 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। पड़ोसी गाजियाबाद में पीएम 2.5 का औसत 172 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो उसे देश में सबसे ऊपर ले गया। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे शीतकालीन सीजन में नोएडा केवल पांच दिन ही संतोषजनक वायु गुणवत्ता दर्ज कर सका। दूसरी ओर ग्रेटर नोएडा में सिर्फ सात दिन ऐसे रहे, जब हवा अपेक्षाकृत बेहतर श्रेणी में रही। यानी ज्यादातर दिनों में नोएडा के लोगों को खराब या बेहद खराब हवा में सांस लेनी पड़ी।

विकास की रफ्तार के साथ बढ़ा प्रदूषण का दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्य, सड़कों पर वाहनों का दबाव, औद्योगिक गतिविधियां और आसपास के इलाकों में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण को लगातार बढ़ा रही हैं। नोएडा में बड़े पैमाने पर चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, नई आवासीय परियोजनाएं और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल भी हवा की गुणवत्ता को बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभा रही है। इसके अलावा सड़क किनारे जमा धूल, निर्माण सामग्री का खुले में पड़ा रहना और डस्ट कंट्रोल नियमों का कमजोर पालन भी स्थिति को और खराब कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहर में निर्माण गतिविधियों पर सख्त निगरानी के बिना प्रदूषण पर काबू पाना मुश्किल है।

नोएडा में प्रशासनिक सख्ती की कमी भी बनी वजह

रिपोर्ट के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर प्रशासनिक सख्ती अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने, सड़कों की नियमित मैकेनिकल सफाई कराने और धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने में ढिलाई साफ नजर आती है। नोएडा में सार्वजनिक परिवहन की सीमित व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। शहर के विस्तार के मुकाबले मजबूत सिटी बस नेटवर्क और लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अभाव लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर बना रहा है। यही वजह है कि ट्रैफिक का दबाव बढ़ने के साथ प्रदूषण का ग्राफ भी ऊपर जा रहा है।

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक संकेत

विशेषज्ञों ने चेताया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की खराब होती हवा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि यह सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा संकट है। लंबे समय तक उच्च स्तर के पीएम 2.5 के संपर्क में रहने से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। सांस संबंधी दिक्कतें, एलर्जी, फेफड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याएं ऐसे प्रदूषण से और बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि CREA की यह रिपोर्ट नोएडा के लिए एक चेतावनी की तरह देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है। Noida News

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