
Noida News (चेतना मंच)। सेक्टर-56 में स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल को प्राधिकरण द्वारा सील किए जाने के बाद आज सैकड़ों अभिभावकों का आक्रोश भडक़ गया। ऑल नोएडा स्कूल पैरेंटस एसोसिएशन (ANSPA) के नेतृत्व में सैकड़ों अभिभावकों ने आज स्कूल गेट पर तथा पुलिस के रोकने पर बाद में स्मृति वन के पास जमकर विरोध प्रदर्शन किया तथा स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
एएनएसपीए के अध्यक्ष यतेन्द्र कसाना तथा सैकड़ों अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल प्रबंधन के काले कारनामों की सजा हजारों छात्रों को क्यों दी जा रही है। छात्रों व अभिभावकों का इसमें क्या कसूर है। वे तो हर माह स्कूल को फीस अदा कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने यदि प्राधिकरण को जमीन आवंटन की बकाया राशि जमा नहीं की तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए न कि छात्रों पर।
उनकी मांग है कि प्राधिकरण बकाया राशि की वसूली के लिए स्कूल प्रबंधन तथा ट्रस्ट के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर करें तथा उनकी संपत्ति की कुर्की करके बकाया राशि की वसूली करें। स्कूल को चलने दिया जाए जिससे यहां पढ़ रहे करीब 1500 छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
मालूम हो कि उत्तराखंड जनकल्याण परिषद को वर्ष-1991 में प्राधिकरण ने 3549 वर्गमीटर जमीन आवंटित की थी। उस वक्त स्कूल प्रबंधन ने 20 फीसदी राशि जमा की थी इसके बाद से प्राधिकरण को एक रूपया भी जमा नहीं कराया। प्राधिकरण पिछले तीन वर्षों से नोटिस देकर बकाया राशि जमा करने की चेतावनी दे रहा है। स्कूल की जमीन का आवंटन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। स्कूल पर 15 करोड़ रुपये बकाया है। अब सोमवार को सील भी कर दिया गया है।
प्रदर्शन में ए.एन.एस.पी.के अध्यक्ष यतेन्द्र कसाना, महासचिव के. अरूणाचलम, उपाध्यक्ष विकास बंसल, मनोज कटारिया, नरेश रावत, संतोष खंडूरी, बृजेश गुर्जर, रमेश भारती, बेनी प्रसाद, शैलेन्द्र, देवेन्द्र रावत, पुष्कर, अतुल बंधु, विनोद कुमार, संदीप, वीरेद्र सिंह, वेदवती, ज्योति, प्रीति, ललिता भंडारी, निर्मला जोशी, कविता शाह समेत सैकड़ों अभिभावक मौजूद थे।
एएनएसपीए तथा अभिभावकों ने कोतवाली सेक्टर-58 में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ छात्रों के साथ ठगी करने की तहरीर दी है। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि अभिभावक लगातार फीस जमा कर रहे हैं। जबकि प्राधिकरण ने सितंबर 2020 में ही स्कूल जमीन की लीजडीड निरस्त कर दी थी। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को धोखे में रखा तथा दाखिला लेते रहे एवं लाखों रूपये बतौर शुल्क वसूलते रहे। अब छात्र पढऩे से वंचित हैं। अत: स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया जाए।