नोएडा के सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक कर्मवीर नागर ने जनप्रतिनिधियों के घटते प्रभाव और सरकारी आदेशों के अनुपालन में लापरवाही पर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से अधिकारियों के कामकाज की नियमित समीक्षा करने, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करने और उनका वार्षिक रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की मांग की।
Noida News : जनप्रतिनिधियों की जिस तरह की ठसक और हनक 1990 के दशक तक देखने और सुनने को मिलती थी अब निरंतर उसमें गिरावट आ रही है। जनप्रतिनिधियों के घटते प्रभाव और सरकारी आदेशों के अनुपालन में लापरवाही को लेकर नोएडा के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता व चिंतक कर्मवीर नागर प्रमुख ने सरकार से व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों की प्रभावी छवि बनाए रखने के लिए सरकार को उनके साथ समीक्षा बैठक करनी चाहिए। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के कामकाज की रिपोर्ट ली जानी चाहिए। साथ ही, सरकारी आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनका वार्षिक रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया जाना चाहिए।
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कर्मवीर नागर के मुताबिक, 1990 के दशक तक जनप्रतिनिधियों की जिस तरह की ठसक और प्रभाव देखने को मिलता था, उसमें समय के साथ गिरावट आई है। उनका मानना है कि आज आम लोगों की मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक बढ़ी पहुंच के कारण प्रशासनिक व्यवस्था में संवाद का स्वरूप बदला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारी जनप्रतिनिधियों से बहस करते हैं और अधिकारी उनकी बातों को अनदेखा कर देते हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है, ताकि जनसमस्याओं का समाधान समय पर हो सके। Noida News :
कर्मवीर नागर ने सुझाव दिया कि सरकार और शासन को जनप्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। समीक्षा बैठकों में विभिन्न विभागों के कामकाज, जनता की शिकायतों और सरकारी आदेशों के अनुपालन की स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही या भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, अधिकारियों के कामकाज का आकलन करते समय पारदर्शिता बरती जाए, ताकि किसी निर्दोष अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ राजनीतिक रंजिश अथवा दुर्भावना से कार्रवाई न हो।
कर्मवीर नागर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। जिस तरह सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के कामकाज का वार्षिक आकलन किया जाता है, उसी तरह विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर जनप्रतिनिधियों के कार्यों की समीक्षा के लिए रिपोर्ट कार्ड तैयार करने पर विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, इस रिपोर्ट कार्ड में क्षेत्र की जनसमस्याओं के समाधान, विकास कार्यों की प्रगति, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी आदेशों के अनुपालन जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। इसकी प्रतिवर्ष समीक्षा होनी चाहिए, ताकि जनप्रतिनिधियों के कामकाज का आकलन स्पष्ट मानकों के आधार पर किया जा सके।
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कर्मवीर नागर ने उत्तर प्रदेश में अवैध कॉलोनियों और भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भूमाफिया और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद कई जगहों पर उनके प्रभावी अनुपालन को लेकर सवाल उठते हैं। उनका सुझाव है कि ऐसे मामलों में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। इससे सरकारी आदेशों के क्रियान्वयन की निगरानी मजबूत हो सकती है और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। Noida News :
कर्मवीर नागर का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों, दोनों के कामकाज का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है। अधिकारियों की जवाबदेही के साथ जनप्रतिनिधियों के लिए भी स्पष्ट मानक तय किए जाने चाहिए, ताकि जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का आकलन हो सके। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जनप्रतिनिधियों के वार्षिक रिपोर्ट कार्ड की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनके मुताबिक, ऐसी व्यवस्था से सरकारी आदेशों के अनुपालन, भ्रष्टाचार की शिकायतों और कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। Noida News :
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