राकेश टिकैत ने 17 सितंबर 2026 को मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत का बड़ा ऐलान किया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सोमवार 14 सितंबर को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आंदोलनरत किसानों के बीच पहुंचे और किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की।

Noida News: प्रसिद्ध किसान नेता तथा भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है। सोमवार 14 सितंबर 2027 को राकेश टिकैत नोएडा में आंदोलनरत किसानों की अगुवाई कर रहे थे। इसी दौरान राकेश टिकैत ने घोषणा कर दी कि 17 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसानों की महा पंचायत की जाएगी। उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में 14 सितंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और देश के प्रमुख किसान नेताओं में शामिल राकेश टिकैत सोमवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किसानों के बीच सक्रिय नजर आए। दिनभर किसानों की समस्याओं, प्राधिकरणों की नीतियों और लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद करने के बाद राकेश टिकैत ने अब 17 सितंबर को मुजफ्फरनगर में बड़ी किसान महापंचायत का ऐलान कर दिया है। राकेश टिकैत के इस ऐलान से पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत पूरे प्रदेश में किसान राजनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है। टिकैत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर भी महापंचायत को लेकर विस्तार से जानकारी साझा की है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार 17 सितंबर को मुजफ्फरनगर में प्रस्तावित महापंचायत में किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

14 सितंबर को राकेश टिकैत का नोएडा और ग्रेटर नोएडा दौरा पूरी तरह किसान मुद्दों के नाम रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान उनके साथ दिखाई दिए। किसानों ने नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) से जुड़े अपने मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। ग्रेटर नोएडा में किसानों का प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन पहले से ही जारी है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया है। हाल के दिनों में भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का धरना लगातार जारी रहा है और किसानों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे माहौल में राकेश टिकैत का किसानों के बीच पहुंचना आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम देता दिखाई दे रहा है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र के किसानों की समस्याएं लंबे समय से अलग-अलग मंचों पर उठती रही हैं। जमीन अधिग्रहण, मुआवजा, आबादी, विकसित भूखंड, रोजगार, पुनर्वास और प्राधिकरणों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर किसानों में नाराजगी बनी हुई है। राकेश टिकैत ने किसानों के बीच पहुंचकर साफ संदेश देने की कोशिश की कि किसानों की समस्याओं को केवल स्थानीय मुद्दा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनकी सक्रियता का असर इस रूप में भी देखा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर चल रहे किसान आंदोलनों को अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापक किसान आंदोलन से जोड़ने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसानों के बीच सक्रिय रहने के बाद राकेश टिकैत ने 17 सितंबर को मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में किसान महापंचायत का ऐलान किया है। टिकैत के अनुसार इस महापंचायत में किसानों से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। किसान आंदोलन से जुड़े व्यापक सवालों के साथ-साथ कृषि, फसलों के दाम, गन्ना किसानों की समस्याओं और किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। गन्ने के मूल्य को लेकर भी टिकैत पहले ही सरकार पर दबाव बनाने की बात कह चुके हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चीनी के बढ़ते दामों के बीच गन्ने की कीमत बढ़ाने और पेराई शुरू होने से पहले गन्ने का उचित मूल्य घोषित करने की मांग उठाई है।
मुजफ्फरनगर को लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में राकेश टिकैत द्वारा वहीं से किसान महापंचायत का ऐलान करना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 14 सितंबर को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किसानों के बीच उनकी सक्रियता और इसके तत्काल बाद 17 सितंबर की महापंचायत का ऐलान यह संकेत देता है कि किसान मुद्दों को लेकर आंदोलन की रणनीति को स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर व्यापक स्तर पर ले जाने की तैयारी है। किसानों के अलग-अलग संगठनों और क्षेत्रों के मुद्दों को एक मंच पर लाने की कोशिश इस महापंचायत में दिखाई दे सकती है।
राकेश टिकैत लंबे समय से किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं। इस बार मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत को लेकर भी उनका फोकस केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। महापंचायत में कृषि व्यवस्था, किसानों की आय, फसलों के उचित मूल्य, गन्ना किसानों की समस्याओं, खेती की लागत और किसानों से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज उठने की उम्मीद है। टिकैत के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद किसान संगठनों और किसानों के बीच इस महापंचायत को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसानों की प्राधिकरणों से जुड़ी मांगें लंबे समय से आंदोलन का विषय रही हैं। अब राकेश टिकैत की सक्रियता के बाद इन मुद्दों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापक किसान आंदोलन के मंच पर उठाए जाने की संभावना बढ़ गई है। खास तौर पर नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण से जुड़े किसानों की समस्याओं को लेकर 14 सितंबर की गतिविधियां महत्वपूर्ण रही हैं। राकेश टिकैत ने किसानों के बीच पहुंचकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसान अपनी मांगों के लिए संगठित होकर संघर्ष करें और स्थानीय समस्याओं को बड़े किसान आंदोलन से जोड़ा जाए।
अब किसान संगठनों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की नजरें 17 सितंबर की मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि महापंचायत में राकेश टिकैत किसानों के लिए आगे की क्या रणनीति घोषित करते हैं? क्या नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र के किसानों के मुद्दों को भी व्यापक आंदोलन का हिस्सा बनाया जाएगा? क्या सरकार और प्राधिकरणों के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने की घोषणा होगी? इन सवालों के जवाब 17 सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत से सामने आ सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि 14 सितंबर को नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसानों के बीच राकेश टिकैत की सक्रियता और 17 सितंबर को मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत का ऐलान उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। एक तरफ प्राधिकरणों के खिलाफ स्थानीय किसानों का आंदोलन जारी है, वहीं दूसरी तरफ राकेश टिकैत राष्ट्रीय स्तर के किसान मुद्दों को लेकर बड़े मंच की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में 17 सितंबर की मुजफ्फरनगर महापंचायत पर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नजर रहेगी।
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