
Noida News: नोएडा उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध शहर है। हर कोई नोएडा के विषय में जानना चाहता है। यहां नोएडा के प्रतिदिन के सभी समाचार अखबारों के हवाले से हम समाचार प्रकाशित करते हैं। नोएडा शहर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों में 28 मई को क्या खास समाचार प्रकाशित हुए हैं यहां एक साथ पढऩे को मिलेंगे।
Noida News: समाचार अमर उजाला से
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “वह कौन था... जिसने सिपाही को मारी गोली, कादिर गैंग की कुंडली खंगाल रही जिले की पुलिस, गाजियाबाद में डाला डेरा” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में कुख्यात बदमाश कादिर को पकड़ने में सिपाही सौरभदेशवाल की हत्या में नोएडा पुलिस को कई सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं। सबसे अहम सवाल यह भी है कि वह कौन था? जिसने भीड़ के बीच से फायरिंग की और सौरभ को गोली लगी। इसके लिए कमिश्नरेट पुलिस पूरा कादिर गैंग खंगाल रही है।
सूत्रों की मानें तो जांच गाजियाबाद पुलिस कर रही है, लेकिन नोएडा पुलिस की टीम गोली मारने वाले और अन्य का ब्यौरा जुटा रही है। नोएडा में भी इनके संभावित व जुड़े ठिकानों पर सोमवार रात और मंगलवार को पुलिस ने छिजारसी से लेकर ग्रेटर नोएडा तक कई ठिकानों पर दबिश दी। इसके अलावा सिपाही की हत्या के बाद मुठभेड़ में गाजियाबाद पुलिस ने दो बदमाशों को सोमवार को ही पकड़ा था। मुख्य आरोपी कादिर, जो हिस्ट्रीशीटर भी है। वह भी पकड़ा जा चुका है। ऐसे में कमिश्नरेट पुलिस ने डासना जेल से जुड़े मुखबिरों को भी सक्रिय किया है, ताकि जेल पहुंचने वाले आरोपी यह कहीं बताएं तो जानकारी मिल जाए कि सिपाही को गोली किसने मारी थी। चोरी की वह घटना जिसमें कादिर की तलाश में पुलिस गई थी। उसकी जांच को भी और विस्तृत रूप में किया जा रहा है। इससे भी यह पता लगाने की कोशिश है कि कादिर के गैंग में शामिल और कोई बदमाश स्थानीय नोएडा का तो नहीं है। चोरी सेक्टर-121 गढ़ी चौखंडी में 2 मई की रात गेस्ट हाउस के बाहर वरना कार का शीशा तोड़कर हुई थी। घटना को चुनौती की तरह लेकर खुलासे के लिए फेज-3 थाना पुलिस की टीम लगी थी। इस टीम का अहम हिस्सा सौरभ भी थे। सूत्रों के मुताबिक रविवार रात मुखबिर की सूचना थाने पर आई कि कुख्यात बदमाश कादिर गाजियाबाद के नाहल में छिपा हुआ है। इसके बाद कार व बाइक से 7 पुलिसकर्मी उसे पकड़ने के लिए रवाना हुए थे। जो टीम दबिश देनी गई थी उसमें दारोगा सचिन राठी, दरोगा उदित सिंह, निखिल, सिपाही सचिन, सौरभ, संदीप कुमार और सोनित शामिल थे।
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “जिले में कोरोना के पांच और मरीज मिले, 15 हुई संख्या” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि जिले में मंगलवार को कोरोना के पांच और मरीज सामने आए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। सभी होम आइसोलेशन में हैं। अब कुल मरीजों का आंकड़ा 15 पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग ने नए मरीजों की निगरानी शुरू कर दी है। जिला अस्पताल में एक भी संदिग्ध मरीज का सैंपल नहीं लिया गया। जो लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं उन्होंने सर्दी, जुकाम और सांस लेने में दिक्कत के बाद निजी अस्पताल में जांच कराई थी। संक्रमित मरीजों में वायरस के वेरिएंट के लिए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। अधिकतर कोविड मरीज बिसरख ब्लॉक से हैं। मरीजों के संपर्क में आए लोगों में कोविड के लक्षण नहीं दिख रहे हैं।
एसीएमओ डॉ. टीकम सिंह ने बताया कि संक्रमितों में 9 महिलाएं हैं। सभी की स्थिति ठीक है। कोविड से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी बरतें। कोविड के संदिग्ध मरीजों की जांच चाइल्ड पीजीआई में होगी और सैंपल जिला अस्पताल में लिए जाएंगे।
Hindi News:
अमर उजाला ने 28 मई 2025 के अंक में प्रमुख समाचार “युवती को किया डिजिटल अरेस्ट 14 लाख रुपये कराए ट्रांसफर, मोबाइल नंबर बंद करने की धमकी देकर सेक्टर-50 निवासी युवती से की ठगी” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि सेक्टर-50 निवासी एक युवती को साइबर जालसाजों ने टेलीकॉम कंपनी कर्मचारी बन मोबाइल नंबर बंद करने की धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट किया। इसके बाद पुलिस, सीबीआई अधिकारी बन वीडियो कॉल पर जांच शुरू करने का नाटक किया। डर दिखाते हुए डिजिटल अरेस्ट कर युवती को बैंक भी 'भेजा। 5 घंटे की इस समयावधि में ठगों ने 14 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। गनीमत रही कि बैंक से लौटी डरी-सहमी युवती की मां ने देख लिया, जिनको डिजिटल अरेस्ट कर हो रही ठगी की जानकारी थी। फिर मां ने बेटी को डिजिटल अरेस्ट से मुक्त करवाया। सोमवार को मिली शिकायत पर साइबर क्राइम थाना सेक्टर-36 पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। धोखाधड़ी का शिकार हुई युवती एक निजी कंपनी में कार्यरत है। थाना पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक शिकायत सेक्टर-50 निवासी निधि ने दी है। बताया है कि जनवरी में उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आई। दूसरी तरफ से कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का कर्मचारी अंकित कुमार बताया। उसने निधि से कहा कि उसके मोबाइल नंबर पर 17 एफआईआर दर्ज हैं और जल्द ही नंबर बंद कर दिया जाएगा। एक मोबाइल नंबर भी बताया इस पर निधि ने कहा ये नंबर मेरा नहीं है। फिर जालसाज ने वह नंबर निधि के नाम पर ही दर्ज होने की जानकारी दी। भविष्य में कानूनी पचड़े से बचने के लिए मुंबई पुलिस में तत्काल शिकायत करने की सलाह दी। फिर कॉल दूसरे जालसाजों को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर ट्रांसफर कर दी। इसके बाद दूसरे जालसाज जिसने अपना नाम सावंत बताया, उसने प पुलिसकर्मी बन वीडियो कॉल बयान दर्ज करने के लिए कहा। फिर ठगों ने पुलिस और सीबीआई अधिकारी बन पूछताछ शुरू की।
गिरफ्तारी से बचने के लिए निधि को उसके खाते में जमा सारी रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर करने को कहा गया। जांच के बाद रकम मूल खाते में वापस करने का दावा भी ठगों ने किया। खाते की जानकारी ठगों ने निधि वि को दे दी। निधि ट्रांसफर की प्रक्रिया के लिए ( बैंक गई। इस दौरान भी ठग वीडियो कॉल से उसकी निगरानी करते रहे। शिकायतकर्ता युवती कि ने ठगों द्वारा दिए गए बैंक खाते में 14 लाख रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर कर दी। पुलिस का कहना है कि उन बैंक खातों की जांच की जा रही है जिनमें रकम ट्रांसफर करवाई गई है।
Noida News: समाचार दैनिक जागरण से
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में 28 मई 2025 का प्रमुख समाचार “…..तो क्या जमीन निगल गई सीवर लाइन” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा के 64 गांवों में 2007 से 2012 तक बसपा शासन काल के दौरान एक हजार करोड़ की लागत से रास्तों में डाली गई सीवर लाइन गायब हो गई है। इसका पर्दाफाश प्राधिकरण द्वारा गांव के रास्तों को फिर से दुरुस्त कराने के लिए कराए जा रहे विकास कार्यों के दौरान हुआ है। ठेकेदारों ने मरम्मत के लिए रास्तों की खोदाई की तो कई गांवों में सीवर लाइन नहीं मिली। प्राधिकरण में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर सीवर लाइन कहां गायब हो गई। सूत्रों का दावा है कि सीवर लाइन डाली ही नहीं गई थी। टेंडर जारी कर ठेकेदारों को प्राधिकरण ने सीवर लाइन डाले बिना ही भुगतान कर दिया गया। फाइलों में कार्य पूर्ण होना दिखा दिया गया। बंदरबाट में अधिकारियों को भी हिस्सा मिला।
प्रदेश में 2007 में बसपा सरकार बनने पर नोएडा व ग्रेनो प्राधिकरण ने गांवों में निर्माण कार्य के टेंडर बड़े पैमाने पर जारी किए। अकेले ग्रेटर नोएडा में सीवर लाइन बिछाने के लिए एक हजार करोड़ से अधिक के टेंडर छोड़े गए। 60 से अधिक ठेकेदारों को निर्माण कार्यों का टेंडर दिया गया। विकास कार्यों के नाम पर उन गांवों में भी सीवर लाइन बिछाने के टेंडर निकाले दिए गए थे, जहां तक मुख्य लाइन नहीं बनी थी। यही कारण है कि गिरधरपुर, पतला खेड़ा, कनारसी, कनरसा, चिरसी आदि दो दर्जन गांवों में लाइन बिछाए जाने के बावजूद सीवर शुरू नहीं हो सके हैं। ग्रामीणों की मांग पर ग्रेनो प्राधिकरण ने हबीबपुर, जलपुरा, कासना, चिपियाना, कुलेसरा, सुनपुरा, वैदपुरा आदि अनेक गांवों में फिर से विकास कार्यों के टेंडर निकाले। ठेकेदारों ने ग्रामीणों की मांग पर सीवर लाइन को भी दुरुस्त करने के लिए खोदाई की तो कई फीट जमीन खोदने के बाद भी वहां सीवर लाइन के पाइप नहीं मिले। रास्ते के नीचे से पाइप गायब मिले। सूत्रों की मानें तो सीवर लाइन के लिए पाइप डाले ही नहीं गए थे।
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में प्रमुख समाचार “14 लाख रुपये गंवा चुकी डिजिटल अरेस्ट बेटी को मां ने कराया मुक्त” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि नोएडा सेक्टर 50 की रहने वाली प्राइवेट कंपनी कर्मी महिला को जनवरी में साइबर ठगों ने पांच घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। नरेश गोयल मनी लांड्रिंग केस से जुड़े सिम उनके दस्तावेज पर अलाट होने का डर दिखाया। सहयोग करने और आरबीआइ से धनराशि वेरीफाई कराने के नाम पर 14 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। मां ने बेटी को परेशान देखकर कारण पूछा, तब वह डिजिटल अरेस्ट से मुक्त हुई। पीड़िता ने जनवरी में एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत की थी। अब सोमवार को साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ठगों की पहचान और तलाश में जुटी है।
निधि सिंह के पास तीन जनवरी की सुबह नौ बजे इंटरनेशनल नंबर से अंकित नाम के व्यक्ति की काल आई। उसने खुद को टेलीकाम विभाग का कर्मी बताते हुए दो घंटे में सिम बंद होने की जानकारी दी थी। कारण पूछने पर बोला कि सिम पर 17 मामले दर्ज हैं। उनके दस्तावेज पर अलाट अन्य सिम नरेश गोयल केस से जुड़े हैं। अंकित ने काल मुंबई पुलिस के पास ट्रांसफर कर कथित मुख्य आरक्षी राकेश शिंदे से बात कराई। उसने भी 17 केस दर्ज होने की पुष्टि की। वाट्सएप पर केस की कापी भी भेजी। राकेश ने कथित जांच अधिकारी प्रदीप सावंत का नंबर दिया। प्रदीप ने निधि को वाट्सएप वीडियो काल पर जोड़कर पूछताछ की। निधि को पीछे से सायरन बजाकर चिल्लाते हुए तत्काल गिरफ्तार करने जैसी आवाज सुनाकर डराया गया। सीबीआइ के कथित विशेष अधिकारी आकाश शर्मा ने भी पूछताछ की। मदद के नाम पर निधि से उनकी जमा पूंजी की जानकारी ली। रकम को आरबीआइ के सीक्रेट बैंक खाते में जांच के लिए ट्रांसफर करने को राजी किया। बैंक स्टाफ के रकम ट्रांसफर के बारे में पूछने पर किसी परिचित की सर्जरी या शादी का बहाना बनाने को प्रशिक्षित किया। निधि चुपचाप बैंक शाखा गईं। ठगों के दिए नोवाफ्लेयर कंपनी के दिल्ली रोहिणी यस बैंक की शाखा में 14.05 लाख रुपये ट्रांसफर कर आ गईं। घर पहुंचने पर मां के पूछने पर निधि टूट गई और आपबीती बयां की। इससे निधि को साइबर ठगी होने का एहसास हुआ। डीसीपी प्रीति यादव ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ठगी की रकम जाने वाले बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में 28 मई का प्रमुख समाचार “दो स्कूलों को मान्यता रद करने की दी गई चेतावनी” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश नहीं लेने वाले पांच स्कूलों के प्रतिनिधियों को मंगलवार को कलक्ट्रेट में अभिभावकों के सामने लाया गया। नोएडा स्थित रामाज्ञा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रतिनिधि नहीं आए। इससे 10 से 12 अभिभावकों की सुनवाई नहीं हो पाई। एडीएम प्रशासन मंगलेश दुबे ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार को दोनों स्कूलों की मान्यता रद करने के फाइल चलाने के निर्देश दिए। रिपोर्ट शासन को जल्द भेजने को कहा है। बीएसए राहुल पंवार ने बताया कि आरटीई के तहत चारों चरण की प्रकिया पूरी हो चुकी है। दिसंबर में ही पहले चरण की प्रकिया शुरू कर दी गई थी, ताकि सभी पात्र छात्रों को समय से प्रवेश मिल सके। हजारों के प्रतिनिधि नहीं आए छात्रों को प्रवेश दिलाया जा चुका है। कुछ स्कूलों की ओर से प्रवेश में टालम टोल की जा रही है। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए अभिभावकों के सामने ही स्कूलों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। पूछा गया कि अब तक प्रवेश क्यों नहीं दिया गया। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि दो दिन में सभी पात्र छात्रों का दाखिला कराया जाए। कहा इन स्कूलों की ओर से भी यदि प्रवेश नहीं लिया गया तो मान्यता रद करने की कार्रवाई की जाएगी।
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