
संगीता सुरभि गौरव, तरुण कार्तिकेय इन सब में पूरा जोश भर जाता है। छोटे बच्चों को थोड़े बड़े बच्चे प्रोग्राम्स की तैयारियों के लिए लेकर जाते हैं। बाकायदा काफी प्रैक्टिस रिहर्सलस के बाद ही कोई कार्यक्रम तैयार होता है। उसके बाद की बागडोर संभालते हैं सेक्टर के युवा। यूं सेक्टरवासियों के सहयोग के कारण ही यह कार्यक्रम अत्यंत सफल हो पाते हैं।
सेक्टर-11 आरडब्लूए की अध्यक्ष अंजना भागी के ने बताया कि आज के समय में जब आए दिन युवा बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, छोटे बच्चे एक-दूसरे को जानते तक नहीं, घरों में फोन के साथ कैद रहते हैं। ऐसे में इस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रमों की अत्यधिक आवश्यकता है। सच तो यह है कि हम सब इन कार्यक्रमों के द्वारा ही पूरे सेक्टर को अपना एक परिवार बना सकते हैं। हमारे यहाँ तीन साल के बच्चे से लेकर 75 साल के सीनियर्स तक इसमें प्रतिभाग करते हैं। सीखने सिखाने का भी अपना ही हिसाब दादी, पोते, पोतियाँ एक घर में रिहर्सल करते हैं तो युवा अलग तथा कुछ ऐतिहासिक गौरव की बातें भी हम अपने बच्चों को इन्हीं के द्वारा सिखाते हैं। जैसे वीर शिवाजी मराठा समुद्र के राजा कहलाते थे। जबकि उनका जन्म पूना की पहाडिय़ों में हुआ था।