नोएडा के यादव सिंह प्रकरण में नया मोड़, निलंबित इंजीनियर की बहाली संभव
नोएडा के बहुचर्चित 954 करोड़ रुपये के अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से निलंबन झेल रहे प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह की बहाली का रास्ता अब खुलता नजर आ रहा है।

Noida News : नोएडा के बहुचर्चित 954 करोड़ रुपये के अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से निलंबन झेल रहे प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह की बहाली का रास्ता अब खुलता नजर आ रहा है। करीब 12 साल से सस्पेंड चल रहे इस इंजीनियर ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण में अपना पक्ष दाखिल कर दिया है। अब प्राधिकरण इस पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार, रामेंद्र सिंह का निलंबन शासन स्तर से हुआ था, इसलिए उनकी बहाली पर अंतिम फैसला भी शासन को ही लेना है। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण उनके सब्मिशन और अपने अभिमत के साथ विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित करेगा।
नोएडा में फिर चर्चा में आया पुराना घोटाला
करीब एक दशक पहले नोएडा प्राधिकरण में सामने आए अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया था। 954 करोड़ रुपये से जुड़े इस मामले में टेंडर प्रक्रिया, कंपनियों को लाभ पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। अब इस मामले में निलंबित इंजीनियर की संभावित बहाली ने नोएडा में एक बार फिर इस पुराने प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
तीन अधिकारियों पर विभागीय जांच शुरू
इस मामले में सिर्फ बहाली की प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ रही, बल्कि नोएडा प्राधिकरण के तीन अधिकारियों पर विभागीय शिकंजा भी कसता दिख रहा है। आरपी सिंह, जो इस समय महाप्रबंधक जल-सीवर एवं ईएंडएम के पद पर तैनात हैं, के अलावा निजामुद्दीन और प्रमोद के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। दोनों अधिकारियों का नोएडा से तबादला हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, ओएसडी स्तर के अधिकारी इस जांच को देख रहे हैं। जल्द ही तीनों अधिकारियों से जमीनी स्तर पर पूछताछ की जाएगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिससे आगे की कार्रवाई तय होगी।
2020 में जारी हुई थी चार्जशीट
इस पूरे प्रकरण में वर्ष 2020 में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी। आरोप था कि अंडरग्राउंड केबलिंग से जुड़े कार्यों में कुछ पसंदीदा कंपनियों को टेंडर देकर अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी मामले में यादव सिंह समेत 20 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई थी। उसी चार्जशीट में प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह का नाम भी शामिल था। उस समय वह नोएडा प्राधिकरण के इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस-2 डिवीजन में तैनात थे। जांच के दौरान नाम सामने आने पर शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने राहत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली।
नोएडा प्राधिकरण ने क्या कहा
नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी के मुताबिक, प्रोजेक्ट इंजीनियर की ओर से अपना पक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत कर दिया गया है। अब प्राधिकरण पूरे मामले का परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजेगा। इस प्रकरण में आगे की दिशा और अगला प्रशासनिक कदम शासन के निर्णय के बाद ही तय होगा। Noida News
Noida News : नोएडा के बहुचर्चित 954 करोड़ रुपये के अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से निलंबन झेल रहे प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह की बहाली का रास्ता अब खुलता नजर आ रहा है। करीब 12 साल से सस्पेंड चल रहे इस इंजीनियर ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण में अपना पक्ष दाखिल कर दिया है। अब प्राधिकरण इस पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार, रामेंद्र सिंह का निलंबन शासन स्तर से हुआ था, इसलिए उनकी बहाली पर अंतिम फैसला भी शासन को ही लेना है। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण उनके सब्मिशन और अपने अभिमत के साथ विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित करेगा।
नोएडा में फिर चर्चा में आया पुराना घोटाला
करीब एक दशक पहले नोएडा प्राधिकरण में सामने आए अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया था। 954 करोड़ रुपये से जुड़े इस मामले में टेंडर प्रक्रिया, कंपनियों को लाभ पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। अब इस मामले में निलंबित इंजीनियर की संभावित बहाली ने नोएडा में एक बार फिर इस पुराने प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
तीन अधिकारियों पर विभागीय जांच शुरू
इस मामले में सिर्फ बहाली की प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ रही, बल्कि नोएडा प्राधिकरण के तीन अधिकारियों पर विभागीय शिकंजा भी कसता दिख रहा है। आरपी सिंह, जो इस समय महाप्रबंधक जल-सीवर एवं ईएंडएम के पद पर तैनात हैं, के अलावा निजामुद्दीन और प्रमोद के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। दोनों अधिकारियों का नोएडा से तबादला हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, ओएसडी स्तर के अधिकारी इस जांच को देख रहे हैं। जल्द ही तीनों अधिकारियों से जमीनी स्तर पर पूछताछ की जाएगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिससे आगे की कार्रवाई तय होगी।
2020 में जारी हुई थी चार्जशीट
इस पूरे प्रकरण में वर्ष 2020 में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी। आरोप था कि अंडरग्राउंड केबलिंग से जुड़े कार्यों में कुछ पसंदीदा कंपनियों को टेंडर देकर अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी मामले में यादव सिंह समेत 20 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई थी। उसी चार्जशीट में प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह का नाम भी शामिल था। उस समय वह नोएडा प्राधिकरण के इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस-2 डिवीजन में तैनात थे। जांच के दौरान नाम सामने आने पर शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने राहत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली।
नोएडा प्राधिकरण ने क्या कहा
नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी के मुताबिक, प्रोजेक्ट इंजीनियर की ओर से अपना पक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत कर दिया गया है। अब प्राधिकरण पूरे मामले का परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजेगा। इस प्रकरण में आगे की दिशा और अगला प्रशासनिक कदम शासन के निर्णय के बाद ही तय होगा। Noida News












