Supertech घोटाला: हो रहे है नए खुलासे,आर.के. अरोड़ा ने डकारे थे सरकारी खजाने से हजारो करोड़ रुपये
Supertech घोटाला
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 09:11 AM
Supertech घोटाला: नोएडा शहर की तथाकथित नामी बिल्डर कंपनी सुपरटेक का मालिक आर.के. अरोड़ा इस समय जेल में है। यह बात तो अब तक सबको पता लग चुकी है, किन्तु शायद यह बात आपको नहीं पता होगी कि बिल्डरों के एक पूरे गिरोह के मुखिया आर.के. अरोड़ा की नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना विकास प्राधिकरणों में तूती बोलती थी। जमीनों के बदले हजारों करोड़ रूपये की जो धनराशि इसे प्राधिकरणों यानि सरकार के खजाने में जमा करानी थी। उस पैसे को यह अपने बाप का पैसा समझकर अनाप-शनाप ढंग से खर्च कर रहा था।
Supertech घोटाला : कौन है सुपरटेक का मालिक आर. के. अरोड़ा ?
सच्ची व निडर पत्रकारिता करके पाठकों का लोकप्रिय पोर्टल बने Chetnamanch.com ने 29 जून को आर.के. अरोड़ा के काले चिटठे का कड़वा सच प्रकाशित किया था। हमने बताया था कि यह मामला आर.के. अरोड़ा की ई.डी. द्वारा गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं होता है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी के बाजार पर नजर रखने वालों का मानना है कि आर.के. अरोड़ा ने एक संगठन के नाम पर बिल्डरों का पूरा गिरोह बना रखा है। इस गिरोह में एक दर्जन से भी अधिक बिल्डर शामिल हैं। जानकारों का साफ मत है कि यदि सुपरटेक के मालिक आर.के. अरोड़ा के प्रकरण की ठीक से जांच हुई तो इस मामले में कई राजनेता, बड़े अफसर व खाकपति से करोड़पति बने दर्जनों तथाकथित बिल्डर्स भी जेल जाएंगे। जांच एजेंसी से जुड़े एक अफसर ने चेतना मंच को बताया कि बिल्डरों का यह घोटाला अरबों रूपये का है। इन बिल्डरों के कारनामों के कारण घर खरीदने का सपना देखने वाले लाखों लोग इनके जाल में फंसकर बर्बाद हो गए हैं। फ्लैट खरीददारों की मोटी रकम भी डूब गई और उन्हें घर भी नहीं मिले। हमने यह भी बताया था कि तथाकथित बिल्डरों का रातोंरात साम्राज्य कैसे खड़ा होता चला गया।
आपको बता दें कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व आसपास के क्षेत्र में आजकल गली-गली में बिल्डर दिखाई देते हैं। इन बिल्डरों के पैदा होने का सिलसिला दरअसल 10 प्रतिशत वाले खेल से शुरू हुआ था। आपको बताते दें कि क्या था यह 10 प्रतिशत वाला खेल। दरअसल, यह खेल वर्ष-2010 में शुरू हुआ था। उस समय उत्तर प्रदेश में सुश्री मायावती की सरकार थी। प्रदेश में सरकार तो मायावती की थी, किन्तु उनके नाम पर नोएडा व ग्रेटर नोएडा में सरकार चलाते थे सुश्री मायावती के चर्चित भाई आनंद कुमार। उन्हीं दिनों नोएडा व ग्रेटर नोएडा में बड़ी मात्रा में ग्रुप हाउसिंग (बिल्डर फ्लैट) की योजना के नाम पर हजारों एकड़ भूमि का आवंटन किया जा रहा था। नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में आवंटन का यह नियम था कि जमीन आवंटन के लिए बाकायदा योजना घोषित की जाएगी। योजना की घोषणा के बाद जो कंपनी अथवा व्यापारी आवेदन करता था, उन्हें जमीन की कीमत का 10 प्रतिशत धनराशि आवेदन फार्म के साथ प्राधिकरण में जमा करानी होती थी। जमीन का आवंटन होने के तीन महीने के अंदर उसे 20 प्रतिशत राशि और देनी होती थी। इस प्रकार 30 प्रतिशत राशि देने के बाद ही किसी बिल्डर को विधिवत भूमि मिलती थी। अपनी मुख्यमंत्री बहिन सुश्री मायावती की हनक से उनके भाई आनंद कुमार ने उस वक्त के सबसे पॉवरफुल अफसर माने जाने वाले नोएडा के चेयरमैन सरदार मोहिंदर सिंह से यह नियम बनवा दिया कि प्राधिकरण को मात्र 10 प्रतिशत धनराशि देकर कोई भी बिल्डर वाला भूखंड ले सकता है। शर्त यह होती थी कि उस बिल्डर को एक ‘मोटा चढ़ावा’ पहले ‘भाई जी’ के दरबार में चढ़ाना होता था। यह ‘चढ़ावा’ आर.के. अरोड़ा, उसके गिरोह में शामिल एक दर्जन बिल्डरों के माध्यम से चढ़ाया जाता था। इस प्रकार छोटी-छोटी पूंजी के दम पर सैकड़ों प्रॉपर्टी डीलर व दूसरे व्यवसाय से जुड़े हुए अनेक लोग रातोंरात ‘चढ़ावा’ चढ़ाकर बिल्डर प्लॉट हथियाने में कामयाब हो गए। भूखंड मिलते ही लम्बे-चौड़े, बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाकर घर खरीदने के इच्छुक लोगों को सपने दिखाए गए। विज्ञापनों के जाल में फंसकर लाखों लोगों ने फ्लैट बुकिंग के नाम पर बिल्डरों को खूब धन दिया। बुकिंग कराने वाले ये बेचारे आज तक फंसे हुए हैं। बुकिंग से सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये कमाकर ‘चढ़ावा’ चढ़ाने वाले खाकपति से करोड़पति बनते चले गए।
Supertech घोटाला : कैसे बोलती थी आर.के. अरोड़ा की तूती
आपको बता दें कि उप्र में बहुजन समाज पार्टी की सरकार रही हो या फिर समाजवादी पार्टी की सरकार रही हो। दोनों ही सरकारों के दौरान नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना विकास प्राधिकरण में आर.के. अरोड़ा की तूती बोलती थी। इन प्राधिकरणों में चेयरमैन अथवा मुख्य कार्यपालक अधिकारी {CEO} कोई भी रहा हो बिल्डर को जमीनों का आवंटन से लेकर रेट तय करने तक तथा लोकेशन सब-कुछ आर.के. अरोड़ा व उसके गिरोह के सदस्य तय करते थे। एक समय वह भी था जब यमुना विकास प्राधिकरण के तत्कालिक कार्यपालक अधिकारी (CEO) व प्रसिद्ध आईएएस अधिकारी संतोष कुमार यादव का 2 घंटे में तबादला करा दिया गया था। मामला बस इतना था कि अपनी ईमानदारी के कारण संतोष कुमार यादव ने नियमों के मुताबिक आर.के. अरोड़ा की कंपनी सुपरटेक पर जुर्माना लगा दिया था। एक प्रसिद्ध समाचार पत्र के रिपोर्टर ने आर.के. अरोड़ा द्वारा सेक्टर-93 - A में बनाए जा रहे चर्चित प्रोजेक्ट ट्विन टॉवर (Twin Tower) के कारनामों पर खबर लिख दी थी तो उस पत्रकार को जबरन छुटटी पर भेज दिया गया था।
Supertech घोटाला : कैसे किए सरकार के 5611 करोड़ रूपये हजम?
आपको बता दें कि आर.के. अरोड़ा सरकारी प्राधिकरणों को अपनी बपौती समझता था। वह बार-बार नोटिस देने पर भी प्राधिकरणों का पैसा जमा नहीं करा रहा था। पिछले 6 वर्षों से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में भी आर.के. अरोड़ा ने सरकारी पैसे को हजम करना जारी रखा है। बता दें कि सुपरटेक बिल्डर्स के चेयरमैन आर.के. अरोड़ा पर नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तथा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का 5611.51 करोड़ रूपये बकाया है। अकेले नोएडा प्राधिकरण का सुपरटेक बिल्डर पर 3068.15 करोड़ रूपये की राशि बकाया है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण का 1428.96 करोड़ रूपये तथा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का 1114 करोड़ रूपये बकाया है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-94 में वर्ष-2012 से निर्माणाधीन सुपरटेक सुपरनोवा प्रोजेक्ट पर नोएडा प्राधिकरण की 1966 करोड़ रूपये की राशि बकाया है। यहां पर करीब 70 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में सुपरटेक की 80 मंजिला टॉवर का निर्माण किया जाना है। लेकिन अभी तक 56 मंजिल का ही निर्माण हो पाया है। प्राधिकरण के अभिलेखों में यह प्रोजेक्ट कॉमर्शियल है। इसके अलावा सेक्टर-96 में बने सुपरटेक के कार्यालय हॉट शॉट प्रोजेक्ट पर भी नोएडा प्राधिकरण का 273.34 करोड़ रूपये बकाया है। नोएडा में सुपरटेक के चार ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं इसमें दो प्रोजेक्ट एनसीएलटी में चले गये। जबकि सेक्टर-74 के भूखंड संख्या जीएच-01/ए कैपटाउन तथा नार्थ आई प्रोजेक्ट पर 704.26 करोड़ रूपये का बकाया है। दूसरा सुपरटेक का प्रोजेक्ट सेक्टर-137 के भूखंड संख्या जीएच-03 में है। इस पर भी 124.94 करोड़ रूपये बकाया है।
इसी तरह ग्रेटर नोएडा में सुपरटेक के 4 बड़े प्रोजेक्ट हैं। इसमें इको विलेज-1 पर 235 करोड़ रूपये, इको विलेज-2 पर 310 करोड़ रूपये, इको विलेज-3 पर 165 तथा ईजेडएआर प्रोजेक्ट पर 80 करोड़ रूपये की धनराशि बकाया है। इसी तरह यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का 1114 करोड़ रूपये बकाया है।
Supertech घोटाला : नए खुलासो के लिए बने रहिए हमारे साथ चेतना मंच पर।