मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने फरवरी 2011 के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि कोली को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया

उत्तर प्रदेश के नोएडा में वर्ष 2006 में हुए निठारी कांड में मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को देश की सर्वोच्च न्यायलय ने बरी कर दिया है। उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में हुए निठारी कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद कोली की जेल से तत्काल रिहाई का मार्ग साफ हो गया है। कोली पहले ही 12 मामलों में बरी हो चुका था और केवल रिम्पा हलदर मामले में दोषी पाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में आए अपने फैसले को पलटते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने फरवरी 2011 के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि कोली को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया - याचिकाकर्ता को आरोपों से बरी किया जाता है। सजा रद्द की जाती है। अभियुक्त को तुरंत रिहा किया जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले ही सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया था। शेष एक मामले में उसे दोषी ठहराया गया था। इसके बाद कोली ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर की थी, जिसमें उसने अपने खिलाफ 2011 के फैसले की समीक्षा की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोषसिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर हुई थी। कोर्ट ने यह भी माना कि बाकी मामलों में कोली के बरी होने के बाद यह एक असामान्य स्थिति बन गई थी।
निठारी हत्याकांड 2005 और 2006 के बीच घटित हुआ। मामला दिसंबर 2006 में सामने आया जब नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास नाले से मानव कंकाल बरामद हुए। जांच में यह पता चला कि मोनिंदर सिंह पंढेर उस घर के मालिक थे और सुरेंद्र कोली उनका घरेलू नौकर था। इस फैसले के साथ ही 19 साल बाद कोली को न्याय मिला और उसे लंबे समय से इंतजार की गई राहत मिली।