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नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन की गूंज भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के गलियारे तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील महेश जेठमलानी ने नोएडा के श्रमिक आंदोलन के मुद्दे को सोशल मीडिया पर प्रमुखता के साथ उठाया है।

Noida News : नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन की गूंज भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के गलियारे तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील महेश जेठमलानी ने नोएडा के श्रमिक आंदोलन के मुद्दे को सोशल मीडिया पर प्रमुखता के साथ उठाया है। महेश जेठमलानी एडवोकेट के द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद से नोएडा का यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के बीच में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। महेश जेठमलानी एडवोकेट ने नोएडा में हुए बवाल को एक टेस्ट केस बताते हुए कहा है कि भारत के बड़े नगरों में बवाल मचाने की यह एक सोची-समझी बहुत बड़ी साजिश थी। Noida News
सुप्रीम कोर्ट के वकील महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया X पर एक ट्वीट किया है। उनका यह ट्वीट बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि ‘‘अस्थिरता (Destabilisation) यही साफ़ तौर पर असली मकसद था। और मेरे अनुसार नोएडा सिर्फ एक गिनी पिग (प्रयोग का मैदान) जैसा लगता है — एक टेस्ट केस। असल उद्देश्य इसे महानगरों में अशांति फैलाने के एक टेम्पलेट के रूप में विकसित करना था। नोएडा ने जो उजागर किया है, वह एक ऐसे शहरी कट्टरपंथी नेटवर्क की संरचना है, जो पूरी तरह जानता है कि कैसे कृत्रिम गुस्से को हथियार बनाना है, अव्यवस्था को बढ़ाना है और फिर भीड़ में छिपकर गायब हो जाना है। उन्होंने लिखा है कि व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, क्यूआर कोड के जरिए मजदूरों को जोड़ा गया, भडक़ाऊ संदेश तेजी से फैलाए गए, और जब मजदूर पहले ही जा चुके थे तब "बाहरी लोगों" ने आंदोलन को और भडक़ाने की कोशिश की। इसे मोबिलाइजेशन आर्किटेक्चर कहा जाता है। आदित्य आनंद उर्फ रस्टी, रुपेश रॉय और मनीषा चौहान; साथ ही मज़दूर बिगुल, दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन, RWPI और नौजवान भारत सभा जैसे संगठन ये सभी एक बड़ी साजिश के सिर्फ मोहरे हैं, लेकिन इनके जरिए उनके असली संचालकों तक पहुंचा जा सकता है। इसीलिए अब बड़ा सवाल टाला नहीं जा सकता कि भारत के महानगरों में अशांति का ऐसा तंत्र खड़ा करने की कोशिश कौन कर रहा है? नोएडा में इस तरह का मॉडल बनाने की कोशिश के पीछे डिजिटल स्तर पर किसने योजना बनाई? क्योंकि यही आधुनिक अति-वामपंथी तरीका है, जब वह शहरी कट्टरपंथ में बदल जाता है। गलत सूचनाएं भी X (ट्विटर) हैंडल्स के जरिए फैलाई गईं, जिन्हें पाकिस्तान से जोड़ा गया बताया गया है, और कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN का इस्तेमाल किया गया। इसी वजह से नोएडा का मामला सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं है। पूरी रणनीति सीधी है कि नेटवर्क डालो, टकराव पैदा करो, शोर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाओ और व्यवस्था व सरकारी क्षमता पर लोगों का भरोसा कमजोर करो।’आप भी पढ़े महेश जेठमलानी का ट्वीट Noida News
आपको बता दें कि नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आड़ में मचाए गए बवाल को उत्तर प्रदेश के CM योगी भी बड़ी साजिश बता चुके हैं। नोएडा में हुए बवाल के तुरन्त बाद CM योगी ने कहा कि यह घटनाक्रम देश में नक्सलवाद को दोबारा जिंदा करने की संभावित साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि "कुछ ताकतें कानून-व्यवस्था को बिगाडऩे के लिए हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि हाल के प्रदर्शनों में भडक़ाऊ और विध्वंसक तत्वों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। CM योगी ने साफ कहा कि यह एक सोच-समझी साजिश है। इस साजिश को उत्तर प्रदेश पुलिस ने नाकाम कर दिया है।’ Noida News
नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह नोएडा में हुए बवाल की साजिश का पूरा खुलासा कर चुकी हैं। नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने अपने खुलासे में सबूत के साथ यह साबित किया है कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की साजिश थी। इस साजिश के तार पाकिस्तान तक से जुड़े हुए हैं। इस बीच नोएडा पुलिस की टीम असली साजिशकर्ता की तलाश में जांच को तेजी के साथ आगे बढ़ा रही है। नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने दावा किया है कि पूरी साजिश को एक-एक सबूत के साथ जनता के सामने पेश किया जाएगा।
आपको बता दें कि नोएडा में हुए बवाल के मामले में नोएडा पुलिस इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों व इनसे जुड़े संगठनों के बैंक खातों की जांच की जा रही है। इन आरोपियों के 11 बैंक खातों में लेनदेन के बारे में पता लगाया जा रहा पुलिस व एसटीएफ हिंसा में शामिल आरोपियों की फंडिंग की जांच कर रही हैं। वहीं अभी भी कई आरोपी पुलिस के रडार पर हैं और उनकी भूमिका के बारे में पता लगाया जा रहा है।
नोएडा के अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच चल रही है। पुलिस इस हिंसा के मास्टरमाइंड आदित्य आनंद को कस्टडी रिमांड पर लेगी। इसकी तैयारी की जा रही है। विवेचक ने जिला अदालत में पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए याचिका दाखिल की है। आदित्य आनंद के मामले में पुलिस की ओर से पांच से सात दिन की रिमांड मांगी गई है। यूपी एसटीएफ और पुलिस की टीमें तीन राज्यों में चिह्नित आरोपियों को तलाश में अभी भी दबिश दे रही है। पुलिस व एसटीएफ की टीम अब उन लोगों के बारे में पता लगा रही हैं जो नकाबपोश होकर हिंसा में शामिल हुए थे। आगजनी करने वाले आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।
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