
Swami Rambhadracharya / नोएडा। इन दिनों यूपी के नोएडा शहर के नोएडा स्टेडियम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कथा चल रही है। कथा व्यास की गद्दी पर प्रसिद्ध संत जगदगुरू रामभद्राचार्य आरुढ़ है। यहां तक तो सब अच्छा था किंतु भगवान राम की कथा के लिए बनाए गए इस मंच से कुछ ऐसा काम किया जा रहा है जिसे कथा की मर्यादा के अनुरुप नहीं कहा जा सकता। आपको विस्तार से बताते हैं कि भगवान राम की आड़ में कैसे राजनीति की जा रही है ?
पूरी दुनिया में शायद ही कोई ऐसा प्राणी हो जो भगवान श्रीराम द्वारा प्रस्तुत किए गए मर्यादा निर्वहन से सहमत न हो। यह अलग बात है कि नास्तिक वर्ग के लोग उन्हें भगवान मानते हैं अथवा नहीं। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे यानि वे मर्यादा को निभाने में सर्वोत्तम पुरुष थे। इस बात पर असहमति जताने वाला कम से कम चेतना मंच के लिए इन पंक्तियों को लिखने तक मुझे कोई नहीं मिला। उन्हीं भगवान राम की कथा के मंच से राजनीति होने लगे तो सवाल अवश्य ही उठता है।
नोएडा के सेक्टर 21ए स्थित नोएडा स्टेडियम में चल रही भगवान श्रीराम की कथा में रविवार को एक बार फिर जमकर राजनीतिक टिप्पणियां की गई। एक टिप्पणी यहां हम आपको बता देते हैं। भगवान राम की कथा सुनाते सुनाते कथा व्यास श्री रामभद्राचार्य जी का भाजपा प्रेम जाग उठा। तब उन्होंने कहा कि राम के नाम में ही पूरी सृष्टि का सार समाया हुआ है। ''रा'' से राष्ट्र बनता है और ''म'' से मंगल बनता है। अत: राम के बिना राष्ट्र का मंगल हो ही नहीं सकता। बात यहीं तक रुक जाती तो शायद गनीमत थी। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्र के प्रमुख पदों पर केवल राष्ट्र के मूल निवासियों को ही बैठने का अधिकार है। यानि विदेशी मूल (श्रीमती सोनिया गांधी) के नागरिक का भारत के किसी प्रमुख पद पर बैठने का अधिकार नहीं है। राम कथा के मंच से इस प्रकार की टिप्पणी को क्या नाम दें, इसका फैसला आप स्वयं करें।
नोएडा स्टेडियम में यह रामकथा 27 जुलाई से शुरू हुई थी। कथा के पहले ही दिन मंच पर आते ही कथा व्यास रामभद्राचार्य ने कहा था कि भाजपा की सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने, तीन तलाक खत्म करने व अयोध्या में राम मंदिर बनवाने के अपने वायदे पूरे कर दिए हैं। बाबा आगे बोले थे कि 2024 में सरकार बनने के बाद भाजपा देश में गौकशी (गाय काटने) समाप्त करने करने की मांग को पूरा कर देगी। उनकी इस टिप्पणी को नोएडा में आने पर भाजपा के नेताओं द्वारा किए गए उनके स्वागत के आवेश में की गई टिप्पणी माना जा रहा है। रविवार को कांग्रेस नेता श्रीमती सोनिया गांधी का खुला विरोध करने से यह साफ हो गया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कथा की आड़ में यहां कोई दूसरा ''खेल'' चल रहा है।
Read More - बाबा बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के गुरू ने कह दी बड़ी बात, खुद को बताया सेवक Swami Rambhadracharyaवैसे तो हम जगदगुरू रामभद्राचार्य का परिचय प्रकाशित कर चुके हैं। एक बार फिर बता दें कि कथाव्यास रामभद्राचार्य ज्ञान का भंडार हैं। मात्र दो वर्ष की आयु में अपनी आंखों की रोशनी गंवाने के बावजूद उन्होंने केवल सुन सुन कर अधिकतर ग्रंथों का अदभुत ढंग से ज्ञान प्राप्त किया है। इतना ही नहीं उनके शिष्य बताते हैं कि रामभद्राचार्य को 22 भाषाओं का ज्ञान है। इतने ज्ञानवान संत के द्वारा भगवान राम का नाम लेकर ''राजनीति एजेंडा'' चलाना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के व राम भक्त के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य का जन्म 14 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था। उनका जन्म का नाम पंडित गिरिधर था। रामभद्राचार्य संत तुलसीदास के नाम पर चित्रकूट में एक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान तुलसी पीठ के संस्थापक और प्रमुख भी है। चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक भी है और इसके आजीवन चांसलर है, जहां विशेष रूप से विकलांग छात्रों को स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शिक्षा प्रदान की जाती है।
आपको बता दें कि रामभद्राचार्य बहुत ही अल्पायु में यानी दो माह की उम्र में ही अंधे हो गए थे और यहां तक कि 17 साल की उम्र तक उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा भी नहीं ली थी। उन्होंने सीखने या रचना करने के लिए कभी भी ब्रेल या किसी अन्य सहायता का इस्तेमाल भी नहीं किया लेकिन फिर भी यह उनका चमत्कार और प्रतिभा है कि रामभद्राचार्य लगभग जन्मांध होते हुए बिना किसी औपचारिक शिक्षा के 22 भाषाएं बोल सकते हैं।
Read More - बड़ी खबर : जल्दी ही बसना शुरू हो जाएगा नया शहर New Noida, तैयार हो रहा है नक्शासंस्कृत, हिंदी, अवधी, मैथिली और कई अन्य भाषाओं के वह सहज कवि और लेखक भी है। उन्होंने 100 से अधिक किताबें लिखी हैं जिनमें चार महाकाव्य कविताएं हैं उन्हें संस्कृत व्याकरण न्याय और वेदांत सहित विविध क्षेत्रों में प्रकांड ज्ञान के लिए जाना जाता है। उन्हें भारत में तुलसीदास पर महान लेखकों में से एक माना जाता है। रामभद्राचार्य जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता पंडित श्री राजदेव मिश्रा और माता श्रीमती शचि देवी थी। उनके घर में धार्मिक वातावरण था उनकी बड़ी चाची संत मीराबाई की भक्त थी। गिरधर जी की 2 महीने की उम्र में ही आंखों की रोशनी चली गई थी।
उनकी आंखें ट्रेकोमा से संक्रमित हो गई थी और गांव में इलाज ना होने की वजह से उनकी आंखों की रोशनी जाती रही। बाद में उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी आंखों का इलाज किया गया लेकिन उनकी दृष्टि वापस नहीं आ सकी, रामभद्राचार्य जी तभी से अंधे हैं। वह पढ़ लिख नहीं सकते क्योंकि वह ब्रेल लिपि का उपयोग भी नहीं करते हैं , उन्होंने जितना सीखा केवल सुनकर सीखा और वह बोलकर ही अपनी रचनाओं को लिखवाते रहे। Swami Rambhadracharya