
आए दिन वहां बच्चों की स्कूटी या, बाइक पलटती। लोग गिरते और घायल होते। बढिय़ा यह था कि स्पीड ब्रेकर से 100 कदम की दूरी पर ही एक अस्पताल भी है। अत: जो गिरता लोग शोर मचाते और घायल को उठाकर अस्पताल पहुंचा देते। अब कितने घायल हुए या उनमें से कोई अपनी कुर्बानी भी दे गया? सब चुप किसी वजह से ये साहब अपना मकान बेचकर चले गए। वहां पर जो नए आए उनको सबसे पहले यह स्पीड ब्रेकर ही खटकने लगा। वे बार-बार आरडब्लूए के पास जाते शिकायत करते। एक दिन एक युवा अपनी माताजी को मोटरसाइकिल के पीछे बिठाकर इस सडक़ से गुजर रहा था अंधेरा हो गया था। स्पीड ब्रेकर से मोटरसाइकिल टकराई माताजी धड़ाम से नीचे गिरी। सिर जाकर सीधा स्पीड ब्रेकर से टकराया। अत्यधिक ब्लीडिंग से वह महिला वही स्वर्ग सिधार गई।
मंजु शर्मा उस घर की महिला उस बच्चे की दहाड़े सुनकर बाहर भागकर आईं। वह बिलख उठीं उन्होंने मुझे फोन किया में भी भागी उस समय मैं सैक्टर-11 आरडब्ल्यूए की महासचिव थी। इससे पहले कि मैं भाग-दौड़ करती। वहां एक और हादसा हो गया उसमें भी इन स्पीड ब्रेकरों ने कुर्बानी ली। क्योंकि उस व्यक्ति के पास पैसे अधिक नहीं थे। वह उस महेंगे अस्पताल नहीं गया। अत: उनके वहीं प्राण पखेरू उड़ गए। जितनी तकलीफ सामने घर में रहने वाली मंजू शर्मा को थी उससे कहीं अधिक तकलीफ मुझे थी, मैंने उस ब्रेकर को ठीक करवना ही है अपना लक्ष्य निर्धारित किया और फिर बिना स्वयं पर रहम लगातार उसका पीछा किया। परिणाम स्वरुप उस स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई कम की गई। स्पीड ब्रेकर पर पेंट भी हुआ। आज 2 वर्ष बीत गए अब कहीं कोई हादसा नहीं हुआ।
ऐसी ही समस्या एलआईजी फ्लैट सेक्टर-99 आरडब्लूए की है। नोएडा प्राधिकरण वर्क सर्कल-3 की उदासीनता और लापरवाही का शिकार वहां के बच्चे-बड़े भुगत रहे हैं। सेक्टर-99 के अध्यक्ष नरोत्तम शर्मा का कहना है कि 2019-20 में बनाए गए सेक्टर-99 में यह स्पीड ब्रेकर नित्य लोगों को घायल कर रहे हैं। वे बार-बार प्राधिकरण से इसकी शिकायत कर रहे हैं। आखिर कब होगा इसका उपाय? और कुछ नहीं तो उस पर सफेद पेंट ही करवा दिया जाए ताकि वहां से निकलने वाले रंग का रिफ्लेक्शन देखकर ही सावधान तो हो जाएँ? पिछले कुछ ही दिनों की बात कर रहे हैं। चार-पांच बुजुर्ग और एक महिला को गंभीर चोटें आईं हैं। महिला के दोनों घुटनों में कई टांके लगे हैं।