उनके द्वारा स्थापित कंपनी टी-सीरीज तीन हजार करोड रुपए से भी अधिक का कारोबार कर रही है

खाली कैसेट का कमाल
यह बात वर्ष 1970 की है उन दिनों भारत सरकार ने टेप रिकॉर्डर को आयात करने पर लगने वाली आयत ड्यूटी (Import Duty )घटा दी थी। इस कारण भारत में टेप रिकॉर्डर आने लगे थे। गुलशन कुमार ने एक के टेप रिकॉर्डर खरीदा एक गानो की कैसेट खरीदी और एक खाली यानी ब्लैक कैसट खरीदी। टेप रिकॉर्डर के जरिए उन्होंने गानों की कैसेट को ब्लैक कैसेट में कॉपी किया। कॉपी करके उस कैसेट को बेच दिया। इस प्रकार म्यूजिक से उनकी पहली कमाई हुई। फिर तो यह सिलसिला चल निकला उन दिनों गुलशन कुमार 7 रुपए में एक कैसेट तैयार करके उसे 25 में बेच देते थे। इस कारोबार से उन्होंने खूब धन कमाया और देखते ही देखते उन्होंने टी-सीरीज कंपनी खड़ी कर दी। वर्ष 1976 में दिल्ली के निकट स्थापित हुए नोएडा शहर में टी-सीरीज सुपर कैसेट्स, कंपनी की 15 फैक्ट्री लगाई। उन दिनों म्यूजिक कंपनी का मतलब ही सुपर कैसेट्स यानी टी-सीरीज हुआ करता था। वर्ष 1994 आते-आते तो गुलशन कुमार पूरे उत्तर भारत में प्रमुख उद्योगपति बन चुके थे। फिर वह मनहूस दिन भी आया जब वर्ष 1997 में कुछ गद्दारों ने संगीत सम्राट गुलशन कुमार की हत्या कर दी थी। इस हत्या से हत्यारे ने Gulshan Kumar का शरीर तो मिटा दिया किंतु उनका नाम तो अमर हो चुका था । जो आज भी अमर है और हमेशा अमर रहेगा।