
Noida News : नोएडा शहर को उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी (Capital) कहा जाता है। नोएडा शहर की स्थापना 17 अप्रैल वर्ष-1976 को हुई थी। नोएडा शहर बसने से पहले नोएडा पूरी तरह से एक ग्रामीण क्षेत्र था। नोएडा शहर को 125 गाँवों की जमीन पर बसाया गया है। अच्छी बात यह है कि जिन गाँवों की जमीन पर नोएडा शहर को बाया गया वें गाँव ज्यों के त्यों आबाद रखे गए। नोएडा शहर को बसाने वाले नोएडा प्राधिकरण ने गाँवों के विकास का काम भी किया है। यहां हम नोएडा शहर के बीचोंबीच स्थित एक अनोखे गाँव की जानकारी आपको दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर के बीचोंबीच बसा हुआ यह एक ऐसा गांव है जिसे पहलवानों वाला गांव भी कहा जाता है। नोएडा क्षेत्र के इस गांव का नाम सर्फाबाद है। सर्फाबाद उत्तर प्रदेश का एक ऐसा गांव है, जिस अकेले गांव से एक दो नहीं सैकड़ों पहलवान तैयार होकर देश भर में अपना नाम रोशन कर चुके हैं। नोएडा शहर का हिस्सा बन चुका सर्फाबाद गांव यादव समाज का गांव है। नोएडा क्षेत्र में यादव समाज के अधिकतर गांव सर्फाबाद के आसपास ही बसे हुए हैं। भारतीय सेना में रहकर देश का नाम रोशन करने वाले प्रसिद्ध पहलवान मलखान सिंह नोएडा के इसी सर्फाबाद गांव के रहने वाले हैं। सेना से रिटायर्ड होकर कैप्टन मलखान सिंह आज भी नोएडा के सर्फाबाद गांव में ही रहते हैं। 78 वर्ष की आयु में भी कैप्टन मलखान सिंह पहलवान जैसे सही नजर आते हैं। नोएडा क्षेत्र के लोग मलखान सिंह को प्यार से कप्तान साहब बुलाते हैं। अकेले मलखान सिंह ही क्यों नोएडा के सर्फाबाद गांव की तो मानो मिटटी के कण-कण में ही पहलवान बसते हैं। नोएडा क्षेत्र के प्रसिद्ध किसान नेता सुखबीर खलीफा भी सर्फाबाद के ही रहने वाले हैं। सुखबीर खलीफा ने प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अनेक दंगल लडक़र नोएडा क्षेत्र का नाम रोशन किया है और आज अपने अखाड़े से सैकड़ों पहलवानों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। प्रसिद्ध पहलवान बलबन्ता, सुबोध तथा मूलम पहलवान इस गांव की शान हैं।
नोएडा क्षेत्र का सर्फाबाद गांव पहलवानों का गांव होने के साथ ही साथ अखाड़ों का भी गांव है। चारों तरफ नोएडा जैसे आधुनिक शहर से घिरा सर्फाबाद गांव में आज भी चार अखाड़े चलते हैं। इन अखाड़ों में सबसे बड़ा अखाड़ा गुरू सुखबीर खलीफा का अखाड़ा है। साथ ही मलूक पहलवान तथा भाटी के अखाड़े में नोएडा क्षेत्र के अनेक युवक-युवतियों को कुश्ती तथा दंगल के दांव सिखाने का काम कर रहे हैं। गुरू सुखबीर खलीफा एक प्रसिद्ध किसान नेता बन चुके हैं। उनकी पहली प्राथमिकता आज भी नोएडा क्षेत्र के बच्चों को पहलवान बनाने की ही है। गुरू सुखबीर खलीफा बताते हैं कि नोएडा तो 1976 में बना है। उनका गांव सर्फाबाद तो कम से कम 300 साल पुराना गांव है। सदियों से उनके गांव में कुश्ती व दंगल को शौक रहा है। यहां बच्चा और कुछ बने न बने किन्तु पहलवान जरूर बनता है। बच्चे को कान पकडक़र अखाड़े में भेज दिया जाता है।
नोएडा क्षेत्र के सर्फाबाद गांव की पहलवानी के रूप में राष्ट्रीय पहचान है। सर्फाबाद गांव के गुरू सुखबीर खलीफा के अखाड़े से कुश्ती सीखकर आदेश पहलवान, लाला पहलवान, भूरा यादव पहलवान, मैक्स यादव पहलवान, अंशिका रावत पहलवान तथा नेहा यादव पहलवान राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में नोएडा तथा सर्फाबाद गांव का नाम रोशन करने में लगे हुए हैं। वर्ष-2023 के एशियन गेम्स में कुश्ती का जौहर दिखाने वाले नरसिंह पाटिल पहलवान भी नोएडा के सर्फाबाद गांव के अखाड़े के ही पहलवान हैं। पहलवानी के साथ ही साथ नोएडा क्षेत्र के पहलवान यहां से निकलकर खेल के कोटे से बड़ी संख्या में फौज में भर्ती होते हैं तथा देश की भरपूर सेवा करते हैं। यही कारण है कि नोएडा के सर्फाबाद गांव को पहलवानी की “फैक्ट्री” भी कहा जाता है। Noida News :