अब उत्तर प्रदेश में बेटियों को मिलेगा बराबरी का हक, भेदभाव खत्म करने की तैयारी
भारत
चेतना मंच
07 Sep 2025 01:32 PM
उत्तर प्रदेश की बेटियां अब अपने पिता की कृषि भूमि में बराबर का हिस्सा पाएंगी, चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित। उत्तर प्रदेश राज्य सरकार राजस्व संहिता-2006 में बड़ा संशोधन करने जा रही है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश में विवाह के आधार पर बेटियों के बीच किया जा रहा भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। राजस्व परिषद ने संशोधन का मसौदा तैयार कर उत्तर प्रदेश शासन को भेजने की तैयारी कर ली है। इसे महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता की दिशा में उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। UP News :
मौजूदा कानून क्या कहता है?
फिलहाल राजस्व संहिता-2006 की धारा 108(2) के तहत, किसी पुरुष भूमिधर की मृत्यु के बाद उसकी जमीन का उत्तराधिकार विधवा, पुत्र और अविवाहित पुत्री को मिलता है। विवाहित बेटियों को सबसे बाद में प्राथमिकता दी जाती है। माता-पिता, फिर भाई और अविवाहित बहन के बाद। इसी वजह से लाखों बेटियां अपने वैधानिक हक से वंचित रह जाती हैं। प्रस्तावित संशोधन में विवाहित और अविवाहित शब्द हटाए जाएंगे। यानी अब विवाहित और अविवाहित बेटियों के बीच कोई फर्क नहीं रहेगा। उत्तराधिकार की प्रक्रिया में भाई-बहनों के बीच भी वैवाहिक स्थिति को आधार नहीं बनाया जाएगा। इससे हर बेटी को पिता की संपत्ति में समान हिस्सा मिलेगा।
महिला सशक्तीकरण की बड़ी पहल
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव न केवल बेटियों को बराबरी का अधिकार देगा, बल्कि ग्रामीण समाज में उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा। कृषि भूमि का मालिकाना हक गांवों में इज्जत और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। अब बेटियां भी इस अधिकार से वंचित नहीं रहेंगी।
उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक फैसले की ओर
यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश और राजस्थान की तर्ज पर लाया गया है, जहां विवाहित बेटियों को पहले से ही बराबरी का हक है। यूपी सरकार इसे कैबिनेट और फिर विधानसभा-परिषद में पेश करेगी। दोनों सदनों से मंजूरी के बाद ही कानून में बदलाव संभव होगा। अगर प्रस्ताव पास हो गया, तो उत्तर प्रदेश उन राज्यों की कतार में खड़ा होगा, जिन्होंने सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों के क्षेत्र में ठोस पहल की है। यह केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और बराबरी की लड़ाई में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। UP News