हथियार, बत्ती, बॉडीगार्ड… सब नकली, नोएडा में चल रहा था हाई-प्रोफाइल ठगी
नोएडा
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 01:30 PM
नोएडा
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 01:30 PM
उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा में एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी का पर्दाफाश किया है जो मानवाधिकार, सेवा और राजनीतिक प्रभाव का दिखावा कर लोगों से ठगी कर रही थी। इस गिरोह के तार पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं और इसके मास्टरमाइंड एक पिता-पुत्र की जोड़ी बिभास चंद्र अधिकारी और अर्घ्या अधिकारी हैं। ये लोग फिल्मों जैसा सेटअप खड़ा कर अपराध और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे लोगों को फर्जी समन भेजते थे और पैसों की उगाही करते थे। Noida News
पुलिस जैसी नाम वाली संस्थाओं से चल रहा था खेल
ठगी के इस रैकेट की जड़ में दो संगठन थे, जिनके नाम सुनकर कोई भी भ्रमित हो सकता था, इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो, नेशनल ब्यूरो ऑफ सोशल इन्वेस्टिगेशन एंड सोशल जस्टिस। इन संगठनों के नाम, वेबसाइट, ऑफिस, स्टाफ और दस्तावेज इतने असली लगते थे कि लोगों को शक होने का कोई मौका ही नहीं मिलता था। आरोपी न केवल समन जारी करते थे बल्कि पीड़ितों को नोएडा और कोलकाता स्थित अपने ऑफिस में बुलाकर डरा-धमकाकर पैसे वसूलते थे।
बनावटी रसूख और ग्लैमर का इस्तेमाल
बिभास अधिकारी ने खुद को धार्मिक गुरु, समाजसेवी और शिक्षाविद् के रूप में प्रचारित किया था। वे पश्चिम बंगाल के बिरभूम जिले के कृष्णापुर स्थित 'आश्रम' से धार्मिक प्रवचन देते थे और उनके पास आयुर्वेदिक कॉलेज, दवा फैक्ट्री, B.Ed और नर्सिंग कॉलेज जैसी संस्थाएं हैं। उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर वे खुद को कई केंद्रीय मंत्रियों और राजनेताओं के साथ दिखाते थे पूर्व आयुष मंत्री श्रीपद नाइक, कैलाश विजयवर्गीय, कपिल मिश्रा, TMC सांसद शताब्दी रॉय और अन्य। उनका बेटा अर्घ्या अधिकारी VIP गाड़ियों, हथियारबंद बॉडीगार्ड्स और नीली बत्ती वाली कारों के साथ अक्सर कैमरे में पोज देता नजर आता था।
फर्जी दस्तावेज और फर्जी पहचान
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, सरकारी सीलें, प्रेस कार्ड, नामपट्ट, बैज और वेबसाइट की सामग्री बरामद की है। ये वेबसाइट्स खुद को इंटरपोल, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन, एशिया पोल और यूरेशिया पोल से जुड़ा बताती थीं। वेबसाइट पर दावा किया गया था कि इनके ऑफिस यूके और अमेरिका समेत भारत के हर राज्य में हैं। इतना ही नहीं, वेबसाइट पर एक पूर्व हाईकोर्ट जज और एक पूर्व IPS अधिकारी को भी संगठन से जुड़ा बताया गया था।
सियासत का सहारा
बिभास अधिकारी कभी TMC के नलहटी ब्लॉक अध्यक्ष हुआ करते थे, लेकिन शिक्षक भर्ती घोटाले में नाम आने के बाद पार्टी ने उन्हें किनारे कर दिया। इसके बाद उन्होंने खुद की राजनीतिक पार्टी ऑल इंडिया आर्य महासभा बनाई और पंचायत चुनावों में सात उम्मीदवार उतारे। उनके आश्रम पर CBI और ED की भी रेड पड़ चुकी है और घंटों पूछताछ हो चुकी है।
बिरभूम में बिभास के खिलाफ उगाही के आरोप पहले भी लग चुके हैं। एक बार जब उन्हें नीली बत्ती वाली गाड़ी में पकड़ा गया, तो केवल बत्ती हटाने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया। यह स्थानीय पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है। Noida News