हर घर में टीवी है, टीवी पर महाभारत (Mahabharata) आई, कृष्ण-सुदामा की कहानी आती है। हर बच्चा जानता है भगवान कृष्ण (Lord krishna) कौन है, भगवान कृष्ण (Lord krishna) द्वारा महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को दिये गए ज्ञान ‘अधर्म पर धर्म की विजय’ ही तो गीता की रचना है। वेद व्यास इसके रचयिता हैं। अधर्म का आखिरकार नाश ही होता है। यह तो हर कोई जानता है। कर्ण सा दयालु, दानी, वीर बलशाली पुरुष का पहिया यदि कीचड़ में न धँसता। यदि कर्ण को उस समय न मारा जाता तो महाभारत का अंत क्या होता? अधर्म पर धर्म की विजय भी काफी मुश्किल हो जाती। लगभग हर युवा यह बात जानता है। क्या हमारा आज बिल्कुल भी यह सोचना फर्ज नहीं बनता कि सकारात्मक ढंग से कही बात का असर कुछ अलग ही होता है।
श्रीराम लखन धार्मिक रामलीला, लव-कुश रामलीला, श्री सनातन धर्म रामलीला शुरू होने वाली हैं रामलीला के भूमि पूजन के उत्सव से लेकर रावण वध तक हर वर्ष 10 दिन तक भगवान श्री राम की लीलाएं जगह-जगह दिखाई जाएंगी। क्यों, रामलीला के चित्रण द्वारा बच्चों तथा बड़े होते युवाओं में अपने धर्म के प्रति आस्था तथा संस्कार भरते हैं।
रामलीला आयोजन समिति के सदस्य मुन्ना कुमार शर्मा के अनुसार रामलीला चित्रण में भूमि पूजन से लेकर रामलीला के मंचन में कहीं कोई कमी ना रह जाए हर श्रद्धालु ये कामना करते हैं।
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एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन का कहना है -कितने अनमोल होते हैं रामलीला के यह दिन,हम जानते नहीं हर किसी को फिर भी सब अपने से लगते हैं यानी मंचन करने वालों से लेकर रामलीला नित्य देखने आने वाले सभी अपने से हो जाते हैं। पंजाबी विकास मंच के चेयरमैन दीपक विग का कहना था कि रामलीला मंचन में जो बच्चे हर रोज़ रामलीला अपने बड़ों के साथ देखने आते हैं वे सुनना और मानना सीख जाते हैं। फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा का कहना है कि हम भगवान श्रीराम जी की दुनिया में खो से जाते हैं। 10 दिन तक चलने वाली रामलीला हमें जीवन का दर्शन करवाती है। जैसे कि हम किसी के मोह में इतना खो जाए कि हमें उसमें कोई बुराई ही ना दिखाई देने लगे तब भी और यदि हम किसी एक घटना के कारण किसी से इतनी घृणा करने लगे कि यदि वह हमारे काम का भी है तो हमें उसकी हर बात में गलती नजर आने लगे। जैसा कि सीता-हरण तथा बाली-सुग्रीव प्रसंग में हुआ था।