अब SIT इन दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर 24 जनवरी को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आते ही लापरवाही तय करने, जवाबदेही तय करने और कार्रवाई के बड़े फैसलों की तस्वीर साफ हो सकती है।

Noida News : नोएडा से इस वक्त एक बड़ी और बेहद अहम अपडेट सामने आई है। नोएडा के होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने मामले की जांच कर रही SIT को 60 से अधिक पन्नों में तैयार अपना विस्तृत पक्ष सौंप दी है, जिसमें 7 अहम बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके साथ ही डिजास्टर मैनेजमेंट रिपोर्ट भी जांच टीम के हवाले कर दी गई है। अब SIT इन दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर 24 जनवरी को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आते ही लापरवाही तय करने, जवाबदेही तय करने और कार्रवाई के बड़े फैसलों की तस्वीर साफ हो सकती है।
यह मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की निगरानी में भी है। एनजीटी ने इस केस में नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव और गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ और सख्त शब्दों में निर्देश दिया है कि 10 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले सभी संबंधित पक्ष हलफनामे के जरिए अपना विस्तृत जवाब रिकॉर्ड पर जमा करें। संकेत हैं कि एनजीटी इस मामले में जवाबदेही और पर्यावरणीय लापरवाही के पहलुओं पर भी कड़ी नजर रखेगा। घटना के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में लोगों के बीच गुस्सा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह मौत जिला प्रशासन, पुलिस और प्राधिकरण तीनों के सिस्टम फेलियर की तरफ इशारा करती है। इसी बीच सूत्रों का कहना है कि SIT ने शुरुआती फैक्ट-फाइंडिंग का मौखिक फीडबैक शासन स्तर पर साझा किया है। आने वाले दिनों में लापरवाही पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
SIT की पड़ताल के केंद्र में जिन 7 सवालों को लेकर सबसे ज्यादा हलचल है, उन पर नोएडा प्राधिकरण ने अपना लिखित पक्ष सामने रख दिया है। प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी के 21 प्लॉटों के आवंटन से लेकर OC/CC जारी होने की शर्तों और उनके अनुपालन तक का ब्योरा दिया है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट साइट पर सड़क निर्माण और कनेक्टिविटी कब और किस मानक पर हुई, बैरिकेडिंग, साइन बोर्ड, चेतावनी संकेत और स्ट्रीट लाइट जैसी रोड सेफ्टी व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी रहीं—इन बिंदुओं पर भी जानकारी दी गई है। जांच के दायरे में पानी-सीवर, ड्रेनेज और जलनिकासी सिस्टम की उपलब्धता, संचालन और जिम्मेदारी भी शामिल है। वहीं, किसे कब पजेशन/हैंडओवर दिया गया और ग्राउंड पर उस समय की स्थिति क्या थी यह टाइमलाइन भी SIT को सौंपी गई है। सबसे अहम बात यह कि प्राधिकरण से हादसे से पहले ट्रक दुर्घटना पर उठाए गए कदम और युवराज मेहता की मौत के बाद तत्काल कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा गया था।
इस पूरे मामले की असल जड़ नोएडा सेक्टर-150 का वही वाणिज्यिक इलाका है, जहां पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार समा जाने से युवराज मेहता की जान चली गई। इसी घटना पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की। रिपोर्ट में बताया गया कि घने कोहरे के बीच युवराज ने अचानक वाहन दाईं ओर मोड़ा और कार सीधे जलभराव वाले गड्ढे में जा गिरी। जानकारी के मुताबिक जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन वर्षों से बरसाती पानी और आसपास की सोसाइटी से निकलने वाला अपशिष्ट जल वहीं जमा होता रहा।
एनजीटी ने यह भी नोट किया कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा 2015 में तैयार की गई वर्षा जल प्रबंधन योजना कई सर्वे और साइट विजिट के बावजूद जमीन पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई। अधिकरण ने स्थानीय निवासियों के उन आरोपों पर भी ध्यान दिया, जिनमें कहा गया कि नोएडा में जलभराव को लेकर सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। Noida News