
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी (BJP) अध्यक्ष का चुनाव जनवरी में प्रस्तावित था, लेकिन अब यह मई तक टल सकता है। इसकी एक बड़ी वजह गुजरात और उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्षों का चयन अधर में होना है। इन दोनों राज्यों के संगठनात्मक समीकरण राष्ट्रीय नेतृत्व के चुनाव को भी प्रभावित कर रहे हैं।
बता दें कि बीजेपी (BJP) के भीतर बदलाव की बड़ी योजना पर काम चल रहा है। नए अध्यक्ष के आते ही पार्टी के लगभग आधे राष्ट्रीय महासचिवों को बदला जा सकता है। युवा और संगठन से जुड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन के अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है न कि जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों को। मौजूदा तीन महासचिवों को दोबारा मौका मिल सकता है, जबकि कुछ नेता केंद्र सरकार से संगठन में लाए जा सकते हैं।
बीजेपी (BJP) ने संगठनात्मक चुनावों में भी साफ संदेश दिया है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला अध्यक्षों के लिए 60 वर्ष की उम्रसीमा तय की गई है और दस वर्षों का सक्रिय संगठनात्मक अनुभव आवश्यक माना गया है। हालांकि, कुछ अपवाद भी सामने आए हैं जैसे केरल में राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर को विशेष स्थिति में अहम भूमिका दी गई।
न केवल संगठन में, बल्कि केंद्र सरकार में भी फेरबदल की संभावना है। बिहार चुनाव से पहले मंत्रिपरिषद में सहयोगी दलों को जगह दी जा सकती है। हाल ही में NDA में शामिल हुई AIADMK को भी मोदी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है, जिससे दक्षिण भारत में गठबंधन की पकड़ मजबूत हो सके। BJP :