
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल हाल ही में पंजाब दौरे पर थे, जहां वह लुधियाना में भी गए थे। यहां के उद्योगपतियों ने पार्टी के नेतृत्व को बताया कि शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन(Farmer Protest) से व्यापार को भारी नुकसान हो रहा है, और अगर यह प्रदर्शन(Farmer Protest) जारी रहा तो आगामी लुधियाना उपचुनाव में पार्टी को वोट नहीं मिलेंगे। उद्योगपतियों ने बताया कि इससे ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और व्यापार में रुकावटें आ रही हैं। इस फीडबैक को देखते हुए, आम आदमी पार्टी ने किसानों को हटाने का कदम उठाया।
आम आदमी पार्टी सरकार ने जानबूझकर यह कदम उठाया। सरकार ने पहले ही दोनों बॉर्डरों पर पुलिस बल तैनात कर दिया था और किसानों के धरने(Farmer Protest) को खत्म करने के लिए एक रणनीति बनाई थी। हालांकि, सरकार नहीं चाहती थी कि किसान नेताओं से सीधे टकराव हो, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती थी। जैसे ही किसान नेता चंडीगढ़ से वापस लौटे, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और उसके बाद शंभू और खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उनके अस्थाई टेंटों को हटाया।
कांग्रेस और बीजेपी ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है, उनका कहना है कि यह किसानों के साथ धोखा है और उनकी इच्छाओं का उल्लंघन किया गया है। वहीं, अटकलें लगाई जा रही हैं कि आम आदमी पार्टी लुधियाना उपचुनाव जीतने के लिए इस कदम को उठा रही है और इससे वह अरविंद केजरीवाल को राज्यसभा भेजने का रास्ता साफ करना चाहती है। पंजाब सरकार का कहना है कि किसान दिल्ली में जाकर विरोध कर सकते हैं, क्योंकि उनका प्रदर्शन केंद्र सरकार से है, न कि राज्य सरकार से।Farmer Protest: