विज्ञापन
तालाब में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बोरिंग के साथ 5 किलोवाट क्षमता का सोलर पंप सेट लगाने का प्रावधान किया गया है। इसका फायदा यह होगा कि किसानों को डीजल या अनियमित बिजली पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

बिहार के बांका जिले के आदिवासी किसानों के लिए मछली पालन अब कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है। राज्य सरकार ने जिले के चयनित आदिवासी किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन इकाई स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान देने का फैसला किया है। इस योजना के तहत किसानों को तालाब निर्माण से लेकर गार्ड शेड, बोरिंग और सोलर पंप जैसी सुविधाओं के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। कुल लागत लगभग 10 लाख रुपये मानी गई है जिसमें से 8 लाख रुपये तक सरकार अनुदान के रूप में देगी। यानी किसान को अपनी ओर से केवल 2 लाख रुपये का अंशदान करना होगा।
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बांका जिले में 15 आधुनिक मत्स्य पालन इकाइयों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। यह योजना खास तौर पर उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जहां सालभर पानी की कमी, सिंचाई की दिक्कत और खेती पर मौसम की मार किसानों की आय को प्रभावित करती रही है। बांका, बेलहर, कटोरिया और चांदन जैसे प्रखंडों के कई हिस्से ऐसे हैं जहां जमीन पठारी है और जल संरक्षण आसान नहीं होता। यही वजह है कि मत्स्य विभाग ने इस योजना को सिर्फ तालाब निर्माण तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे पानी की स्थायी उपलब्धता और आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ने की कोशिश की है।
यह भी पढ़ें: बच्चे के जन्म पर मिलेगा सोना! क्या है पूरी योजना
इस योजना के तहत बनने वाले तालाब का जल क्षेत्र कम से कम 0.4 एकड़ होना जरूरी होगा। तालाब की औसत गहराई 8 से 10 फीट रखी जाएगी ताकि गर्मियों में भी पानी का स्तर बना रहे और मछली पालन प्रभावित न हो। इसके साथ तालाब के किनारे 8×10 फीट का एक पक्का गार्ड शेड भी बनाया जाएगा जहां किसान जरूरी सामान रख सकें और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियां आसानी से कर सकें। योजना का मकसद सिर्फ तालाब बनवाना नहीं है बल्कि एक ऐसी पूरी इकाई तैयार करना है जिसमें किसान सालभर मछली पालन कर सके। इसी वजह से इसमें बोरिंग, पानी की व्यवस्था और सोलर पंप जैसे घटक भी शामिल किए गए हैं ताकि किसान को बार-बार अलग से खर्च न करना पड़े।
बांका के जिन इलाकों में यह योजना लागू की जा रही है वहां बिजली और पानी दोनों ही कई बार बड़ी समस्या बन जाते हैं। सरकार ने इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए योजना में सौर ऊर्जा को भी शामिल किया है। तालाब में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बोरिंग के साथ 5 किलोवाट क्षमता का सोलर पंप सेट लगाने का प्रावधान किया गया है। इसका फायदा यह होगा कि किसानों को डीजल या अनियमित बिजली पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सोलर पंप से तालाब में पानी बनाए रखना आसान होगा और मत्स्य पालन की लागत भी कम हो सकती है। लंबे समय में यह सुविधा किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है क्योंकि खर्च कम होने का सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है।
यह भी पढ़ें: ठेला-रेहड़ी लगाने वाले लाखों लोगों के लिए काम की खबर, 30 जून है आखिरी मौका
मत्स्य विभाग के मुताबिक, इस पूरी आधुनिक मत्स्य पालन इकाई की अनुमानित लागत करीब 10 लाख रुपये है। आदिवासी किसानों को इसमें 80 प्रतिशत तक यानी अधिकतम 8 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। बाकी 20 प्रतिशत, यानी लगभग 2 लाख रुपये, लाभुक किसान को अपने स्तर से लगाना होगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि कम पूंजी वाले किसान भी इस योजना से जुड़ सकें और सिर्फ पैसों की कमी की वजह से पीछे न रह जाएं। 80 प्रतिशत अनुदान का मतलब यह है कि किसानों पर शुरुआती आर्थिक बोझ काफी कम होगा और वे कम निवेश में बेहतर आय वाला काम शुरू कर सकेंगे।
बांका जिले के बांका, बेलहर, कटोरिया और चांदन प्रखंडों के कई हिस्से भौगोलिक रूप से ऐसे हैं जहां खेती पूरी तरह आसान नहीं है। कई जगह पानी की कमी, जमीन की बनावट और बिजली की दिक्कत किसानों की कमाई पर असर डालती है। ऐसे में यह योजना सिर्फ एक अनुदान योजना नहीं बल्कि आजीविका बढ़ाने की दिशा में एक व्यावहारिक कोशिश मानी जा सकती है। मत्स्य पालन उन किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है जिनके पास तालाब निर्माण योग्य जमीन है और जो खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय का स्रोत बनाना चाहते हैं। अगर तालाब, बोरिंग और सोलर पंप जैसी बुनियादी सुविधाएं एक साथ मिल जाएं तो इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार और आय दोनों बढ़ सकती हैं।
जिला मत्स्य पदाधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में 15 नए तालाबों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है और इच्छुक किसानों से आवेदन प्राप्त कर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसका मतलब है कि फिलहाल इस चरण के लिए प्रशासनिक स्तर पर काम आगे बढ़ चुका है। हालांकि, योजना से जुड़ी विस्तृत पात्रता, दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी के लिए किसानों को बिहार मत्स्य विभाग या जिला मत्स्य कार्यालय की आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए। बिहार मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026-27 की योजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने की जानकारी भी उपलब्ध है।
विज्ञापन