इस योजना के जरिए महिलाओं को अपने आइडिया पर काम करने, नया कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का मौका देने की कोशिश की जा रही है। इससे महिलाओं में कारोबार के प्रति रुचि बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

रक्षाबंधन के मौके पर बिहार की बेटियों के लिए सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं और छात्राओं को आगे बढ़ाने के लिए तीन अहम योजनाओं की शुरुआत की। इनमें अपना कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए ‘बिहार की बेटी स्टार्टअप योजना’ और उच्च शिक्षा के साथ रिसर्च करने वाली छात्राओं के लिए ‘मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप’ शामिल है। इसके अलावा पुलिस दीदी यानी अभया ब्रिगेड के लिए 4,700 दोपहिया वाहनों का भी लोकार्पण किया गया। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का मकसद बेटियों को पढ़ाई, रोजगार और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ाना है।
अगर बिहार की कोई महिला अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहती है, तो उसके लिए सरकार की नई योजना काफी मददगार हो सकती है। ‘बिहार की बेटी स्टार्टअप योजना’ के तहत महिला उद्यमियों को 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। शुरुआत में करीब 2,100 महिलाओं को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है। सरकार का फोकस सिर्फ आर्थिक मदद देने तक सीमित नहीं है। इस योजना के जरिए महिलाओं को अपने आइडिया पर काम करने, नया कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का मौका देने की कोशिश की जा रही है। इससे महिलाओं में कारोबार के प्रति रुचि बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
उच्च शिक्षा हासिल करने वाली बेटियों के लिए भी सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप’ योजना की शुरुआत की है। इसके तहत करीब 1,000 छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का सीधा फायदा उन छात्राओं को मिल सकता है जो PHD के जरिए आगे पढ़ाई और रिसर्च करना चाहती हैं। सरकार का मानना है कि आर्थिक मदद मिलने से बेटियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और रिसर्च पर बेहतर तरीके से ध्यान देने में मदद मिलेगी। खासकर उन छात्राओं के लिए यह सहायता अहम हो सकती है, जिन्हें उच्च शिक्षा के दौरान आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के साथ सरकार ने ‘पुलिस दीदी’ यानी अभया ब्रिगेड के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। इस अभियान के तहत 4,700 दोपहिया वाहनों का लोकार्पण किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कामों को और बेहतर तरीके से जमीन तक पहुंचाना है। सरकार की कोशिश है कि पुलिस दीदी के जरिए महिलाओं और लड़कियों तक मदद और सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं ज्यादा आसानी से पहुंच सकें। दोपहिया वाहन मिलने से टीमों को अलग-अलग इलाकों में पहुंचने और जरूरत के समय तेजी से काम करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को बिहार की तरक्की से जोड़ते हुए कहा कि राज्य की महिलाएं अब सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि बिहार की 43 लाख जीविका दीदियां ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और जीविका दीदियों का राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान 1.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य बड़ी संख्या में और जीविका दीदियों को लखपति दीदी बनाना है। सरकार के मुताबिक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने से परिवार के साथ-साथ पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
बिहार सरकार की ओर से शुरू की गई इन योजनाओं को देखें तो इनमें बेटियों के लिए शिक्षा से लेकर रोजगार और सुरक्षा तक अलग-अलग पहल शामिल हैं। एक तरफ स्टार्टअप योजना महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए आर्थिक सहारा देगी, वहीं PHD फेलोशिप छात्राओं को उच्च शिक्षा और रिसर्च के दौरान मदद देगी। रक्षाबंधन के मौके पर इन योजनाओं की शुरुआत का संदेश भी साफ है कि सरकार महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने और उनकी प्रतिभा को आगे लाने पर जोर दे रही है। अगर इन योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचता है तो आने वाले समय में बिहार की कई बेटियां पढ़ाई पूरी करने के साथ अपना कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
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