Bihar School Live Classes: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इसके लिए विशेष ऑनलाइन क्लासेज शुरू की गई हैं। इन क्लासेज में छात्रों को नियमित लाइव लेक्चर, रिकॉर्डेड वीडियो, डिजिटल नोट्स, अभ्यास प्रश्न, मॉक टेस्ट और टेस्ट सीरीज उपलब्ध कराई जाएगी।

बिहार में सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भी महंगी कोचिंग और निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने 'बिहार स्कूल लाइव क्लासेज' कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के जरिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञ शिक्षकों की लाइव क्लास, डिजिटल स्टडी मटेरियल और JEE, NEET व CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराई जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को पहले से अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाना है। लाइव क्लासेज के जरिए छात्र सीधे विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ सकेंगे और पढ़ाई के दौरान अपने सवाल भी पूछ सकेंगे। इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी वही गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी जो आमतौर पर बड़े शहरों या निजी स्कूलों में उपलब्ध होती है।
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों को अब JEE, NEET और CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग से महंगी कोचिंग लेने की जरूरत नहीं होगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इसके लिए विशेष ऑनलाइन क्लासेज शुरू की गई हैं। इन क्लासेज में छात्रों को नियमित लाइव लेक्चर, रिकॉर्डेड वीडियो, डिजिटल नोट्स, अभ्यास प्रश्न, मॉक टेस्ट और टेस्ट सीरीज उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों को बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एक साथ करने में मदद मिलेगी।
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फिलहाल इस योजना की शुरुआत पटना के 10 मॉडल सरकारी स्कूलों से की गई है। इन स्कूलों के छात्रों को विशेषज्ञ शिक्षकों से लाइव पढ़ाई की सुविधा मिल रही है। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि जुलाई के अंत तक पटना जिले के सभी 422 हाई स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू कर दी जाए। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस योजना का विस्तार राज्य के सभी मॉडल स्कूलों और फिर अन्य सरकारी विद्यालयों तक किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इसका लाभ उठा सकें।
योजना के साथ ही पटना के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में दो आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम भी शुरू किए गए हैं। इनमें इंटरएक्टिव पैनल, डिजिटल स्क्रीन और आधुनिक शिक्षण उपकरण लगाए गए हैं। इन तकनीकी सुविधाओं की मदद से शिक्षक विषयों को ज्यादा आसान और रोचक तरीके से पढ़ा सकेंगे जबकि छात्र भी पढ़ाई में अधिक सक्रिय भागीदारी कर पाएंगे।
शिक्षा विभाग ने इस योजना को मजबूत बनाने के लिए सात स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के साथ समझौता किया है। इन संस्थाओं का सहयोग शिक्षकों के प्रशिक्षण, डिजिटल कंटेंट तैयार करने और नई शिक्षण तकनीकों को बढ़ावा देने में लिया जाएगा। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई छात्र केवल इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की अच्छी तैयारी नहीं कर पाते क्योंकि उनके पास महंगी कोचिंग का खर्च उठाने की सुविधा नहीं होती। बिहार सरकार का कहना है कि यह योजना ऐसे ही छात्रों को बराबरी का अवसर देने की दिशा में शुरू की गई है। डिजिटल शिक्षा और विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद से अब सरकारी स्कूलों के छात्र भी बेहतर तैयारी कर सकेंगे और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अपनी जगह बना सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि बिहार का कोई भी छात्र केवल संसाधनों की कमी की वजह से पीछे न रह जाए। इसी सोच के साथ डिजिटल शिक्षा को सरकारी स्कूलों तक पहुंचाया जा रहा है ताकि हर छात्र को बेहतर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का समान अवसर मिल सके। अगर यह योजना तय समय के अनुसार पूरे राज्य में लागू होती है तो आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के लाखों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा तैयारी का लाभ मिल सकेगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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