Pragati Yojana: इन प्रशिक्षित युवाओं को गांवों में कृषि उद्यमी के रूप में तैयार किया जाएगा ताकि वे किसानों को नई तकनीक, सरकारी योजनाओं और बाजार से जोड़ने में मदद कर सकें।

खेती अब केवल परंपरागत काम नहीं रह गई है बल्कि युवाओं के लिए करियर और स्वरोजगार का मजबूत विकल्प बनती जा रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने ग्रामीण युवाओं के लिए एक नई पहल शुरू की है। सरकार ने 'प्रगति योजना' की शुरुआत की है जिसके तहत पहले चरण में आठ राज्यों के करीब 20 हजार युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन प्रशिक्षित युवाओं को गांवों में कृषि उद्यमी के रूप में तैयार किया जाएगा ताकि वे किसानों को नई तकनीक, सरकारी योजनाओं और बाजार से जोड़ने में मदद कर सकें। सरकार का मानना है कि खेती में नई तकनीकों और प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी से किसानों की आय बढ़ेगी, खेती की लागत कम होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यही वजह है कि इस योजना को कृषि क्षेत्र में बदलाव की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
'प्रगति' योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कृषि क्षेत्र में नई पहचान देना है। इसके तहत युवाओं को आधुनिक खेती, मिट्टी परीक्षण, कृषि मशीनों के उपयोग, डिजिटल कृषि सेवाओं और बाजार से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये युवा गांव-गांव जाकर किसानों को तकनीकी सलाह देंगे और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मदद करेंगे। सरकार चाहती है कि हर गांव में ऐसे प्रशिक्षित कृषि उद्यमी तैयार हों जो किसानों की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर कर सकें। इससे किसानों को हर छोटी जानकारी के लिए शहरों या सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
यह भी पढ़ें: कौन से अस्पताल में मिलेगा फ्री इलाज? 2 मिनट में ऐसे लगाएं पता
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कृषि उद्यमियों को गांव स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी। उनका काम केवल सलाह देना नहीं होगा बल्कि खेती को अधिक लाभकारी बनाने में किसानों की मदद करना भी होगा।
कृषि उद्यमी इन कार्यों में किसानों की मदद करेंगे-
फिलहाल योजना की शुरुआत पहले चरण में आठ राज्यों से की गई है। इनमें बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित अन्य चयनित राज्य शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य इस मॉडल को सफल बनाने के बाद धीरे-धीरे इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू करना है। इस पहल से उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं।
प्रगति योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है। अभी कई छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक खेती, मिट्टी परीक्षण, कृषि उपकरण या सरकारी योजनाओं की सही जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। ऐसे में प्रशिक्षित कृषि उद्यमी गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध कराएंगे। इससे किसानों को बेहतर बीज, उन्नत खेती की तकनीक, समय पर सलाह और बाजार तक आसान पहुंच मिल सकेगी।
आज भी बड़ी संख्या में ग्रामीण युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं। प्रगति योजना इस स्थिति को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। प्रशिक्षण के बाद युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि खुद कृषि सेवाओं के माध्यम से स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे। इससे गांवों में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
सरकार लगातार खेती में नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि सेवाएं, मिट्टी परीक्षण, मौसम आधारित खेती और आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग अब तेजी से बढ़ रहा है। प्रगति योजना के जरिए प्रशिक्षित युवा इन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाएंगे। इससे खेती पहले की तुलना में अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ बनने की उम्मीद है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'प्रगति' योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेती में बदलाव लाने का अभियान है। उनके अनुसार इस पहल के जरिए किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी क्योंकि यही युवा गांवों में आधुनिक खेती की नई सोच को आगे बढ़ाएंगे।
विज्ञापन