तमिलनाडु का बजट 5 अगस्त को पेश किया जाएगा जबकि 6 अगस्त को कृषि बजट आएगा। माना जा रहा है कि सरकार का फोकस शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा रहेगा। हालांकि इन प्रस्तावों की अंतिम घोषणा बजट पेश होने के बाद ही साफ होगी।

तमिलनाडु की राजनीति में नई शुरुआत करने वाले मुख्यमंत्री थलपति विजय छात्रों और युवाओं के लिए कई बड़े फैसले लेने की तैयारी में हैं। उनकी सरकार के पहले बजट में शिक्षा क्षेत्र को खास प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बजट में छात्रों के लिए आर्थिक सहायता, किसानों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा और बिना गारंटी एजुकेशन लोन जैसी योजनाओं का ऐलान किया जा सकता है। तमिलनाडु का बजट 5 अगस्त को पेश किया जाएगा जबकि 6 अगस्त को कृषि बजट आएगा। माना जा रहा है कि सरकार का फोकस शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा रहेगा। हालांकि इन प्रस्तावों की अंतिम घोषणा बजट पेश होने के बाद ही साफ होगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की संभावित योजनाओं में एक योजना सरकारी स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए बताई जा रही है। इसके तहत अगर कोई छात्र सरकारी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी कॉलेज में दाखिला लेता है तो उसे आर्थिक सहायता के तौर पर एकमुश्त 8000 रुपये दिए जा सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य ऐसे छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है जो आर्थिक परेशानियों के कारण उच्च शिक्षा जारी रखने में दिक्कत महसूस करते हैं। सरकार का मानना है कि आर्थिक मदद मिलने से ज्यादा से ज्यादा छात्र कॉलेज तक पहुंच सकेंगे।
तमिलनाडु सरकार किसानों के परिवारों के लिए भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रस्तावित योजना के तहत जिन किसानों के पास 2 एकड़ से कम जमीन है उनके बच्चों को उच्च शिक्षा मुफ्त देने की योजना बनाई जा सकती है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का फोकस खासतौर पर उन परिवारों पर है जो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पाते।
उच्च शिक्षा को आसान बनाने के लिए सरकार एजुकेशन लोन योजना में भी बदलाव कर सकती है। जानकारी के मुताबिक, अंडर ग्रेजुएशन से लेकर रिसर्च स्तर तक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को 20 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इस लोन की खास बात यह होगी कि इसके लिए छात्रों या उनके परिवारों को किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं होगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में आगे बढ़ने वाले छात्रों को काफी मदद मिल सकती है।
थलपति विजय सरकार बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए मिड-डे मील योजना में भी बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार, बच्चों को सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी देने पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे बच्चों के पोषण से जोड़कर देख रहे हैं जबकि कुछ लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं।
इसके अलावा सरकार नवजात बच्चों के लिए भी एक योजना शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत नवजात बच्चों को उपहार के रूप में सोने की अंगूठी देने का प्रस्ताव शामिल है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के जरिए परिवारों के साथ जुड़ाव बढ़ाना और नवजात बच्चों के स्वागत को खास बनाना बताया जा रहा है।
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