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केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली एलपीजी सब्सिडी को लेकर नया नियम लागू किया है। पहले लाभार्थियों को सालभर में ज्यादा सिलेंडरों पर सब्सिडी का लाभ मिलता था लेकिन अब इसकी संख्या कम कर दी गई है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना देश की उन सबसे बड़ी योजनाओं में शामिल है जिसने करोड़ों गरीब परिवारों की रसोई की तस्वीर बदल दी। चूल्हे के धुएं से परेशान महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का लाभ अब तक 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों तक पहुंच चुका है लेकिन अब इस योजना से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है जिसका असर सीधे लाभार्थियों की जेब पर पड़ने वाला है। केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली एलपीजी सब्सिडी को लेकर नया नियम लागू किया है। पहले लाभार्थियों को सालभर में ज्यादा सिलेंडरों पर सब्सिडी का लाभ मिलता था लेकिन अब इसकी संख्या कम कर दी गई है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अब एक सिलेंडर पर कितनी सब्सिडी मिलेगी और सालभर में खाते में कितना पैसा आएगा।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना था ताकि महिलाएं धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकें। योजना के तहत पात्र महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया गया और पहली रिफिल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। योजना को लोगों से इतना अच्छा समर्थन मिला कि बाद में इसका दूसरा चरण भी शुरू किया गया। इसके तहत देशभर में करोड़ों परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अभी भी प्रति एलपीजी सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है। हालांकि बदलाव यह हुआ है कि अब यह सब्सिडी साल में सीमित सिलेंडरों पर ही मिलेगी। यदि किसी शहर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है तो लाभार्थी को पहले पूरी राशि का भुगतान करना होगा। इसके बाद सरकार की ओर से 300 रुपये सीधे बैंक खाते में भेज दिए जाएंगे। इस तरह एक सिलेंडर की वास्तविक लागत 642 रुपये के आसपास रह जाती है।
सबसे बड़ा बदलाव सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या को लेकर हुआ है। पहले योजना के लाभार्थियों को सालभर में अधिक सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी लेकिन अब यह सुविधा केवल 4 सिलेंडर तक सीमित कर दी गई है। इसका मतलब है कि लाभार्थी परिवार को एक वर्ष में सिर्फ चार बार ही 300 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। बाकी सिलेंडर बाजार कीमत पर ही खरीदने होंगे।
नए नियम के अनुसार, यदि किसी लाभार्थी को साल में चार सिलेंडरों पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है तो कुल मिलाकर उसके बैंक खाते में 1200 रुपये की सब्सिडी आएगी। पहले जहां सालभर में अधिक सिलेंडरों पर सहायता मिल जाती थी वहीं अब लाभार्थियों को सीमित संख्या में ही यह सुविधा मिलेगी। इसलिए परिवारों को अपने गैस उपयोग की बेहतर योजना बनानी होगी।
उज्ज्वला योजना सिर्फ गैस सिलेंडर की सब्सिडी तक सीमित नहीं है। योजना के तहत पात्र परिवारों को गैस कनेक्शन से जुड़ी कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। इसमें गैस चूल्हा, सिलेंडर, रेगुलेटर, एलपीजी होज पाइप और जरूरी दस्तावेजों की व्यवस्था शामिल है। सरकार की ओर से कनेक्शन लेने के समय मिलने वाली सहायता राशि लाभार्थियों को शुरुआती खर्च से राहत देती है जिससे गरीब परिवार आसानी से एलपीजी का उपयोग शुरू कर सकें।
इस योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को दिया जाता है। आवेदन परिवार की महिला सदस्य के नाम पर किया जाता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल परिवार, अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थी और अन्य पात्र वर्ग इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण आवास योजनाओं के लाभार्थी, वनवासी परिवार, चाय बागान क्षेत्रों में रहने वाले परिवार और सरकार द्वारा निर्धारित अन्य गरीब वर्ग भी इस योजना के दायरे में आते हैं।
उज्ज्वला योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, पासपोर्ट साइज फोटो और पात्रता से जुड़े दस्तावेज जरूरी होते हैं। आवेदन करते समय सभी दस्तावेज सही और अपडेटेड होने चाहिए ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
आज भी देश के कई ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार पारंपरिक ईंधन का उपयोग करते हैं। ऐसे में उज्ज्वला योजना न केवल स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने का काम करती है बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि नए नियम के बाद सब्सिडी का दायरा सीमित हुआ है लेकिन योजना का उद्देश्य अभी भी गरीब परिवारों तक सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा पहुंचाना ही है। ऐसे में लाभार्थियों के लिए नए नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि वे योजना का पूरा लाभ उठा सकें।
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