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मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उद्यमी योजना बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत दिव्यांगजनों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें से 5 लाख रुपये तक की राशि अनुदान के रूप में माफ की जाती है।

अगर आप दिव्यांग हैं और अपने दम पर कुछ करने का सपना रखते हैं तो यह मौका आपके लिए खास है। बिहार सरकार की मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उद्यमी योजना के तहत अब दिव्यांगजनों को अपना उद्योग शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। खास बात यह है कि इस राशि में से 5 लाख रुपये तक माफ भी किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनें और अपने पैरों पर खड़े होकर रोजगार पैदा करें। आवेदन की आखिरी तारीख 15 मार्च तय की गई है इसलिए समय रहते आवेदन करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी सोच के तहत दिव्यांगजनों को भी उद्यमिता की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य है दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना। उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना।
स्वरोजगार के जरिए सम्मानजनक जीवन का अवसर देना।
इस योजना के तहत प्रति लाभुक अधिकतम 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत स्वीकृत की जाएगी। यह राशि ऋण और अनुदान के रूप में दी जाएगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि 10 लाख रुपये में से 5 लाख रुपये पूरी तरह से माफ किए जाएंगे यानी लाभार्थी को केवल शेष राशि ही चुकानी होगी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल 100 दिव्यांगजनों का चयन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को लोन देने से पहले जरूरी व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे अपने व्यवसाय को सही तरीके से चला सकें।
अगर आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। आवेदन करने के लिए आपको-
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज होना अनिवार्य है। इनमें शामिल हैं-
आवेदन से पहले इन सभी दस्तावेजों को तैयार रखें ताकि फॉर्म भरते समय कोई परेशानी न हो।
यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं देती, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मविश्वास और सम्मान भी देती है। जब कोई व्यक्ति अपना व्यवसाय शुरू करता है तो वह सिर्फ खुद के लिए ही नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करता है। सरकार का यह कदम दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
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