PF New Rule: अगर आपका भी EPFO में खाता हैतो नौकरी छोड़ने, PF से पैसे निकालने, नॉमिनी जोड़ने या क्लेम करने से पहले इन बदलावों को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि नए नियमों में क्या बदला है और इसका सीधा असर PF खाताधारकों पर कैसे पड़ेगा।

अगर आप नौकरी करते हैं और आपका PF खाता है, तो EPFO के नए नियम आपके लिए काफी अहम हैं। केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को Employees' Provident Funds Scheme, 2026, Employees' Pension Scheme, 2026 और Employees' Deposit-Linked Insurance Scheme, 2026 को अधिसूचित किया है। इन नई योजनाओं ने पुराने 1952, 1995 और 1976 के नियमों की जगह ली है। नए नियमों में PF से पैसे निकालने की प्रक्रिया को आसान करने, डिजिटल सेवाओं को बढ़ाने और रिटायरमेंट के लिए PF की कुछ रकम सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। अगर आपका भी EPFO में खाता हैतो नौकरी छोड़ने, PF से पैसे निकालने, नॉमिनी जोड़ने या क्लेम करने से पहले इन बदलावों को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि नए नियमों में क्या बदला है और इसका सीधा असर PF खाताधारकों पर कैसे पड़ेगा।
नए EPF Scheme, 2026 में PF योगदान की मूल व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारी की ओर से सामान्य तौर पर बेसिक वेतन और लागू वेतन घटकों के आधार पर 12 प्रतिशत योगदान जारी रहेगा। नियोक्ता की ओर से भी निर्धारित नियमों के अनुसार योगदान किया जाता है। मौजूदा वैधानिक वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह है। इसका मतलब यह है कि ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा के आधार पर कर्मचारी का अनिवार्य PF योगदान अधिकतम ₹1,800 प्रति माह होता है। इससे ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों के मामले में उच्च वेतन पर योगदान करने की अलग व्यवस्था हो सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि नए नियमों ने PF योगदान को अचानक बदल दिया है।
पहले PF से आंशिक निकासी के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई नियम और शर्तें थीं। इससे कर्मचारियों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि किस स्थिति में कितना पैसा निकाला जा सकता है। नए नियमों में इन प्रावधानों को तीन बड़ी कैटेगरी में रखा गया है। इनमें जरूरी जरूरतें, घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। जरूरी जरूरतों में बीमारी, पढ़ाई और शादी जैसी स्थितियां आती हैं। घर से जुड़ी जरूरतों में मकान खरीदने, बनाने या उससे जुड़े खर्च शामिल हैं। इससे PF निकासी के नियम पहले की तुलना में ज्यादा आसान तरीके से समझे जा सकते हैं।
नए नियमों में PF की रकम को लेकर एक अहम बदलाव किया गया है। सदस्य के कुल PF बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखना होगा। बाकी पात्र राशि का इस्तेमाल निर्धारित परिस्थितियों में निकासी के लिए किया जा सकता है।
नए नियमों में अलग-अलग तरह की आंशिक निकासी के लिए सेवा अवधि की शर्तों को काफी हद तक एक जैसा किया गया है। अब सामान्य तौर पर पात्र आंशिक निकासी के लिए PF में कम से कम 12 महीने की सदस्यता पूरी करना जरूरी होगी। पहले अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग अवधि की शर्तें थीं। कुछ मामलों में यह अवधि कई साल तक होती थी। नए नियमों में इसे 12 महीने करने का मकसद कर्मचारियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना है। बीमारी, पढ़ाई, शादी और अन्य पात्र जरूरतों के लिए निकासी की शर्तें संबंधित नियमों के अनुसार लागू होंगी।
नौकरी छोड़ने या नौकरी जाने की स्थिति में PF से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव पूरी रकम निकालने की समयसीमा को लेकर है। पहले लगातार दो महीने बेरोजगार रहने के बाद पूरी PF रकम निकालने का प्रावधान था। अब नौकरी छूटने के बाद सदस्य अपने पात्र PF बैलेंस का 75 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकता है जबकि बाकी 25 प्रतिशत रकम को सामान्य तौर पर एक साल की बेरोजगारी पूरी होने तक सुरक्षित रखना होगा। इसके बाद पूरी रकम निकालने का रास्ता खुलता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में पूरी रकम निकालने के अलग प्रावधान हैं।
यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। 36 महीने की अवधि EPF की सामान्य आंशिक निकासी के लिए नहीं है। यह नए EPS Scheme, 2026 में नौकरी छोड़ने के बाद मिलने वाले withdrawal benefit से जुड़ी है। अगर कोई सदस्य जरूरी पेंशन सेवा पूरी करने से पहले नौकरी छोड़ देता है और वह मासिक पेंशन के लिए पात्र नहीं हैतो नए नियमों के तहत EPS withdrawal benefit के लिए आखिरी पेंशन योगदान की देय तारीख से 36 महीने पूरे होने की शर्त लागू होती है या सदस्य के सुपरएनुएशन की उम्र पूरी होने पर, जो पहले हो। इसलिए PF और Pension यानी EPF और EPS के नियमों को एक ही मानना सही नहीं होगा।
EPFO ने नॉमिनेशन से जुड़ी प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाने पर जोर दिया है। नए नियमों के तहत ऑनलाइन नॉमिनेशन को ज्यादा महत्व दिया गया है। इससे कर्मचारी अपने नॉमिनी की जानकारी ऑनलाइन दर्ज और अपडेट कर सकता है। नॉमिनेशन को अपडेट रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में PF, पेंशन और बीमा से जुड़े लाभ के दावे में परिवार को परेशानी कम हो सकती है। नए नियमों के तहत पुराने नॉमिनेशन में नए प्रावधानों से असंगति होने पर नया नॉमिनेशन करने की जरूरत भी पड़ सकती है। इसलिए शादी या परिवार में बदलाव जैसी स्थिति के बाद नॉमिनी की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
नए नियमों में क्लेम के निपटारे को तेज करने पर भी जोर दिया गया है। यहां यह समझना जरूरी है कि सभी तरह के क्लेम के लिए एक ही समयसीमा नहीं है। नई व्यवस्था में PF withdrawal claims के लिए तेज settlement का प्रावधान किया गया है जबकि EPS और EDLI से जुड़े क्लेम को 20 दिनों के भीतर निपटाने की समयसीमा रखी गई है। बिना उचित कारण देरी होने पर जिम्मेदारी तय करने और 12 प्रतिशत की दर से penal interest की व्यवस्था भी की गई है। इसका मकसद सिर्फ क्लेम जल्दी निपटाना नहीं है बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाना भी है ताकि कर्मचारियों को अपने पैसे या लाभ के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
नए नियमों को आसान भाषा में समझें तो PF की मूल व्यवस्था अभी भी काफी हद तक पहले जैसी है। कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान का ढांचा जारी है और मौजूदा वैधानिक वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह है। बड़ा बदलाव मुख्य रूप से PF निकासी, बेरोजगारी के बाद पूरी रकम निकालने की समयसीमा, आंशिक निकासी की शर्तों, नॉमिनेशन और क्लेम प्रक्रिया में आया है। सबसे खास बात यह है कि नौकरी जाने की स्थिति में कर्मचारी को पूरी तरह अपने PF पैसे से वंचित नहीं किया गया है। पात्र सदस्य 75 प्रतिशत तक रकम निकाल सकता है जबकि बाकी रकम को रिटायरमेंट बचत के तौर पर सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
PF से पैसे निकालने से पहले अपनी सदस्यता अवधि, नौकरी की स्थिति और निकासी के कारण की जांच जरूर करें। यह भी देख लें कि आपका UAN, बैंक अकाउंट और KYC की जानकारी सही है या नहीं। नॉमिनी की जानकारी भी समय-समय पर अपडेट करते रहें। नए नियमों का मकसद PF की प्रक्रिया को कठिन बनाना नहीं, बल्कि उसे ज्यादा आसान और व्यवस्थित करना है। एक तरफ जरूरत पड़ने पर कर्मचारी को PF की रकम तक पहुंच मिलती है वहीं दूसरी तरफ 25 प्रतिशत रकम को सुरक्षित रखकर रिटायरमेंट के लिए बचत बनाए रखने की कोशिश की गई है। इसलिए PF का पैसा निकालने से पहले लागू नियम और अपनी पात्रता को समझना सबसे जरूरी है।
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