जम्मू-कश्मीर मुहाफ़िज़ योजना: कैसे करें आवेदन? एक क्लिक में पढ़ें पूरी जानकारी

जम्मू और कश्मीर मुहाफ़िज़ योजना असंगठित श्रमिकों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिकों और उनके परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। मुहाफ़िज़ योजना के तहत श्रमिकों को आकस्मिक मृत्यु, विकलांगता और गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक मदद दी जाती है।

Jammu Kashmir Muhafiz Yojana
मुहाफिज योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar27 Feb 2026 01:39 PM
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जम्मू और कश्मीर सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कमजोर वर्ग के श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक आर्थिक स्थिरता के लिए मुहाफ़िज़ योजना शुरू की। यह योजना मुख्य रूप से उन श्रमिकों के लिए है जो पंजीकृत हैं और जिन्हें आकस्मिक दुर्घटना, गंभीर बीमारी या अन्य कठिनाइयों के दौरान मदद की जरूरत होती है। योजना का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को वित्तीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करना है ताकि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर आर्थिक बोझ कम हो।

योजना का उद्देश्य और महत्व

मुहाफ़िज़ योजना 2018 में शुरू की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य निर्माण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना है। इस योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को बीमा सुरक्षा, विकलांगता राहत और उनके बच्चों के लिए शिक्षा सहायता जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे श्रमिकों और उनके परिवारों को गंभीर परिस्थितियों में मदद मिलती है और वे जीवन के आर्थिक और सामाजिक दबाव से बच सकते हैं।

श्रमिकों को मिलने वाले लाभ

इस योजना में श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए कई प्रकार की आर्थिक सहायता शामिल है। अगर किसी पंजीकृत श्रमिक की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो उनके परिवार को ₹2,00,000 से ₹4,00,000 तक की राहत राशि दी जाती है। इसके अलावा, आंशिक या पूर्ण स्थायी विकलांगता की स्थिति में श्रमिकों को ₹1,00,000 से ₹2,00,000 तक का मुआवजा मिलता है। योजना के अंतर्गत बच्चों को शिक्षा सहायता भी प्रदान की जाती है जिसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को प्रति वर्ष ₹1,200 की छात्रवृत्ति मिलती है।

मुहाफ़िज़ योजना के लिए पात्रता

इस योजना का लाभ केवल पंजीकृत श्रमिकों को ही मिलता है। आवेदन करने वाले को जम्मू और कश्मीर का नागरिक होना चाहिए और उनका पंजीकरण JKBOCWWB के अंतर्गत होना जरूरी है। साथ ही, श्रमिक का संबंध निर्माण या असंगठित क्षेत्र से होना चाहिए और वे सक्रिय कर्मचारी होने चाहिए। योजना में बीमा दावों के लिए वैध नामांकित व्यक्ति का नाम भी देना अनिवार्य है।

आवेदन प्रक्रिया

जम्मू और कश्मीर मुहाफ़िज़ योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। सबसे पहले आवेदक को JKBOCWWB के आधिकारिक पोर्टल से आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा। विकलांगता सहायता या आकस्मिक मृत्यु लाभ के लिए अलग-अलग दावा फॉर्म होते हैं जिन्हें सही तरीके से भरकर अपने जिले के संबंधित कल्याण बोर्ड कार्यालय में जमा करना होता है।

आवश्यक दस्तावेज

योजना के लिए आवेदन करते समय आवेदक को कुछ जरूरी दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। इनमें पहचान पत्र, श्रम कार्ड, बैंक खाता विवरण, रोजगार प्रमाण पत्र, नामांकित व्यक्ति का विवरण और पते का प्रमाण शामिल हैं। इन दस्तावेजों के बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।

योजना का सामाजिक प्रभाव

जम्मू और कश्मीर मुहाफ़िज़ योजना ने हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों को सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रदान की है। इस योजना से श्रमिक अपने बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और जीवन के कठिन समय में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना सरकार की सामाजिक सुरक्षा की पहल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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कृषक बंधु योजना: जानिए कैसे करें आवेदन और कौन-कौन है लाभार्थी?

Krishak Bandhu Scheme: पश्चिम बंगाल सरकार की कृषक बंधु योजना के तहत अब भूमिहीन कृषि मजदूर भी आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को सालाना कुल 4000 रुपये दिए जाएंगे, जो सीधे उनके बैंक खातों में जमा होंगे।

Krishak Bandhu Scheme
कृषक बंधु योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar27 Feb 2026 03:03 PM
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पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। कृषक बंधु योजना के तहत अब सिर्फ जमीन वाले किसान ही नहीं बल्कि जो लोग भूमिहीन कृषि मजदूर हैं वे भी सालाना 4000 रुपये तक की आर्थिक सहायता पा सकेंगे। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों और कृषि मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा देना और उनके जीवन को आसान बनाना है।

बिना जमीन वाले कृषि मजदूरों के लिए नया अवसर

अब पश्चिम बंगाल के सभी भूमिहीन कृषि मजदूर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। जिन लोगों के पास अपनी खेती की जमीन नहीं है या जो शेयरक्रॉपर/बटाईदार के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, वे भी शामिल किए जाएंगे। इस योजना के तहत साल में दो किस्तों में 2000-2000 रुपये दिए जाएंगे एक रबी सीजन में और दूसरी खरीफ सीजन में। इसका मतलब है कि कुल मिलाकर हर साल 4000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में आएंगे। यह नई सुविधा अगले अप्रैल महीने से लागू हो जाएगी।

कृषक बंधु योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

कृषक बंधु योजना में आवेदन ऑफलाइन किया जाता है। इसके लिए राज्य सरकार अपने इलाके में सरकारी शिविर या दुआरे सरकार / आत्मनिर्भर बंगाली कैंप लगाती है। इन शिविरों में आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। कैंप में कृषि विभाग के सहायक अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर आवेदन को मंजूरी देते हैं। जांच पूरी होने के बाद राशि सीधे बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेज दी जाती है।

किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?

योजना के तहत आवेदन करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखने होंगे-

  • आधार कार्ड
  • वोटर कार्ड
  • बैंक पासबुक के पहले पेज की फोटोकॉपी
  • आधार और बैंक से लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और आवेदक के हस्ताक्षर
  • कृषि मजदूर होने का स्व-घोषणा पत्र (Self-declaration)
  • आधार जानकारी उपयोग करने की अनुमति (Consent)

इन दस्तावेजों के साथ आवेदन करना सुनिश्चित करें, ताकि आपका आवेदन बिना किसी रुकावट के प्रक्रिया में आ जाए।

कृषक बंधु योजना का महत्व

यह योजना न केवल आर्थिक मदद देती है बल्कि कृषि मजदूरों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा लाती है। भूमिहीन किसानों को अब भी योजना का लाभ मिलेगा जिससे उनकी आय बढ़ेगी और वे कृषि के लिए जरूरी संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। यह राज्य सरकार का एक मजबूत कदम है जो किसानों और कृषि मजदूरों की भलाई को सुनिश्चित करता है।

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उत्तराखंड सरकार ने जारी किया नंदा गौरा योजना का पैसा, कैसे मिलेगा आपको फायदा?

उत्तराखंड सरकार की नंदा गौरा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 33,251 बेटियों को कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का सशक्त अभियान है।

Nanda Gaura Yojana
नंदा गौरा योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar27 Feb 2026 12:13 PM
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उत्तराखंड की बेटियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नंदा गौरा योजना ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि कदमों में भी बेटियों के साथ खड़ी है। इस योजना के तहत इस साल 33,251 बेटियों के खाते में कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं। यह केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश भी है। योजना की खासियत यह है कि यह बालिका जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और भविष्य तक हर कदम पर उन्हें साथ देती है जिससे समाज में बेटियों की भूमिका और अधिकार मजबूत हों।

नंदा गौरा योजना क्या है?

नंदा गौरा योजना उत्तराखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक हर कदम पर आर्थिक और सामाजिक सहायता देती है। योजना के तहत बालिका के जन्म पर 11,000 रुपये और 12वीं उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने पर 51,000 रुपये मिलता है। इससे बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। यह योजना समाज में लैंगिक असमानता को कम करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री और मंत्री का संदेश

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं है बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त अभियान है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह योजना बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने, संस्थागत प्रसव बढ़ाने, बाल विवाह रोकने और बेटियों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने में प्रभावी साबित हुई है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार बेटियों के हर कदम पर उनका साथ दे रही है।

जिलेवार लाभार्थियों की संख्या

उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में योजना के लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार है-

अल्मोड़ा: जन्म 643, 12वीं 2963

बागेश्वर: जन्म 240, 12वीं 1167

चमोली: जन्म 196, 12वीं 1761

चम्पावत: जन्म 285, 12वीं 1410

देहरादून: जन्म 678, 12वीं 2637

नैनीताल: जन्म 1012, 12वीं 3196

पौड़ी: जन्म 227, 12वीं 1990

पिथौरागढ़: जन्म 243, 12वीं 1936

रुद्रप्रयाग: जन्म 172, 12वीं 1235

टिहरी: जन्म 485, 12वीं 2775

ऊधमसिंहनगर: जन्म 1372, 12वीं 4772

उत्तरकाशी: जन्म 360, 12वीं 1496

कुल लाभार्थी: 33,251

कुल वितरित राशि: ₹145.93 करोड़

नंदा गौरा योजना का महत्व

यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। यह बेटियों को सशक्त, आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने का प्रयास है। इसके जरिए राज्य सरकार लैंगिक असमानता को कम करने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने और समाज में बेटियों के सम्मान को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। नंदा गौरा योजना का सबसे बड़ा असर यह है कि यह बेटियों को सपनों को साकार करने और शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देती है जिससे उनका भविष्य मजबूत और सुरक्षित बन सके। 

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