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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव मासिक वजीफे में किया गया है। पहले इंटर्नशिप करने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 5,000 रुपये दिए जाते थे लेकिन अब यह बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है। इस राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी।

देश के युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme - PMIS) में बड़ा बदलाव करते हुए इसे पहले से ज्यादा फायदेमंद बना दिया है। अब इस योजना के तहत इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को हर महीने 9,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। पहले यह राशि 5,000 रुपये थी। यानी अब छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ बेहतर आर्थिक सहारा भी मिलेगा। सरकार का मानना है कि सिर्फ डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं है बल्कि युवाओं को पढ़ाई के दौरान ही काम का अनुभव भी मिलना चाहिए। यही वजह है कि इस योजना में कई अहम बदलाव किए गए हैं। उम्र सीमा बढ़ाई गई है अंतिम वर्ष के छात्र भी शामिल किए गए हैं और नई इंडस्ट्रीज को भी इसमें जोड़ा गया है। इससे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव मासिक वजीफे में किया गया है। पहले इंटर्नशिप करने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 5,000 रुपये दिए जाते थे लेकिन अब यह बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है। इस राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी। यानी छात्रों को आर्थिक रूप से मजबूत सहारा मिलेगा। इसके अलावा 6,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी जो दो किस्तों में मिलेगी। इससे इंटर्नशिप के दौरान आने वाले खर्चों को संभालना आसान होगा।
सरकार ने पात्रता नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले इस योजना के लिए 21 से 24 वर्ष तक के उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते थे लेकिन अब उम्र सीमा बढ़ाकर 18 से 25 वर्ष कर दी गई है। इस बदलाव का फायदा उन युवाओं को मिलेगा जो पहले उम्र की वजह से आवेदन नहीं कर पाते थे। अब ज्यादा छात्र इस योजना का हिस्सा बन सकेंगे और अपने करियर की शुरुआत मजबूत तरीके से कर पाएंगे।
अब सिर्फ पढ़ाई पूरी कर चुके युवा ही नहीं बल्कि अंतिम वर्ष के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह बदलाव छात्रों के लिए काफी फायदेमंद माना जा रहा है क्योंकि वे पढ़ाई के साथ ही इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर पाएंगे। हालांकि, इसके लिए उन्हें अपने कॉलेज या यूनिवर्सिटी से NOC यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र देना होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इंटर्नशिप उनकी पढ़ाई में रुकावट न बने।
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। उन्हें कंपनियों और उद्योगों में काम करने का मौका मिलेगा जिससे वे असली कामकाज को समझ सकेंगे। अक्सर देखा जाता है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद युवाओं को नौकरी मिलने में मुश्किल होती है क्योंकि उनके पास व्यावहारिक अनुभव नहीं होता। PMIS इस कमी को दूर करने की कोशिश है, ताकि छात्र पहले से ही नौकरी के माहौल को समझ सकें।
सरकार ने इस योजना को सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा है। अब इसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते सेक्टर भी शामिल किए गए हैं। इन क्षेत्रों में आने वाले समय में रोजगार के बड़े अवसर माने जा रहे हैं। ऐसे में युवाओं को शुरुआत से ही इन इंडस्ट्रीज़ का अनुभव मिलेगा जो उनके भविष्य के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों के अनुसार तैयार किया गया है। नई शिक्षा नीति में अनुभव आधारित शिक्षा और इंडस्ट्री एक्सपोजर पर खास जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि छात्र सिर्फ थ्योरी तक सीमित न रहें बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाए। PMIS इसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
आज के समय में नौकरी पाना सिर्फ डिग्री पर निर्भर नहीं करता। कंपनियां ऐसे उम्मीदवार चाहती हैं जिन्हें काम की समझ हो और जो शुरुआत से बेहतर प्रदर्शन कर सकें। ऐसे में PM Internship Scheme युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बनकर सामने आई है। इसमें आर्थिक सहायता भी है स्किल डेवलपमेंट भी है और इंडस्ट्री अनुभव भी। यानी यह योजना सिर्फ इंटर्नशिप नहीं बल्कि करियर की मजबूत शुरुआत बन सकती है।
जो छात्र इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं उन्हें पात्रता शर्तों को ध्यान से समझना चाहिए। अगर आप अंतिम वर्ष में हैं तो NOC की तैयारी पहले से कर लें। साथ ही आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन की तारीखों पर नजर बनाए रखें। सरकार का साफ संदेश है कि युवा सिर्फ नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार उम्मीदवार बनें। PMIS में किया गया यह बदलाव उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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