किसान ध्यान दें! KCC ब्याज दर में आया बड़ा बदलाव, जल्दी जान लें

KCC: बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब Kisan Credit Card (KCC) लोन पर अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी मिलेगी। केंद्र सरकार की 3% ब्याज छूट के अलावा राज्य सरकार 1% अतिरिक्त छूट देगी। यह लाभ 3 लाख तक के फसल ऋण पर मिलेगा।

KCC
किसान क्रेडिट कार्ड
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Jan 2026 02:52 PM
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बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना अब और भी लाभकारी हो गई है। इस योजना के तहत किसानों को खेती और घर की जरूरतों के लिए आसान ऋण मिलता है जिससे वे सूदखोरों के जाल में फंसने से बच सकते हैं। अब बिहार सरकार ने इस योजना में अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी देने का फैसला किया है जिससे किसानों का आर्थिक बोझ और कम होगा।

बिहार में KCC योजना के तहत अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी

बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत ऋण पर अतिरिक्त 1% ब्याज सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के साथ एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव की मौजूदगी में यह समझौता सम्पन्न हुआ। केंद्र सरकार पहले से ही किसान क्रेडिट कार्ड पर 3% ब्याज सब्सिडी देती है। अब राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 1% की सब्सिडी मिलने से कुल 4% की ब्याज छूट किसानों को मिलेगी।

कौन-कौन से किसान लाभान्वित होंगे?

यह लाभ उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक या सहकारी बैंक से तीन लाख रुपये तक का फसल उत्पादन ऋण लिया है। ध्यान रहे कि यह प्रोत्साहन केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निर्धारित समय पर ऋण का भुगतान करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से संस्थागत ऋण प्रवाह बढ़ेगा, कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार होगा। बिहार सरकार ने इस योजना के लिए पांच करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

किसान क्रेडिट कार्ड कैसे बनवाएं?

किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना अब आसान है। इसके लिए आपको अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां से KCC का आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें, इसे सही तरीके से भरें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ बैंक में जमा कर दें। KCC बनने के बाद आप किसी भी बैंक के ATM या माइक्रो ATM से ऋण राशि निकाल सकते हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेज

KCC के लिए आवेदन करने के लिए निम्न दस्तावेज आवश्यक हैं:

  • भरा हुआ आवेदन फॉर्म
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • पहचान पत्र (Aadhar Card, Voter ID आदि)
  • निवास प्रमाण पत्र
  • रेवेन्यू प्रशासन द्वारा प्रमाणित जमीन के कागज
  • फसल का ब्यौरा

बिहार सरकार की यह पहल किसानों के लिए एक सपनों जैसी राहत है। अब किसान आसानी से ऋण ले सकते हैं और अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी का लाभ उठाकर कृषि निवेश और उत्पादन बढ़ा सकते हैं। KCC योजना से किसानों को आर्थिक सुरक्षा और खेती में उन्नति के नए अवसर मिलेंगे।

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सरकार का बड़ा ऐलान, अब एक्सीडेंट होने पर होगा कैशलेस इलाज

इस योजना के तहत दुर्घटना के पहले 7 दिनों तक घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज मिलेगा। सभी प्रकार के मोटर वाहनों से हुई दुर्घटनाओं में इस योजना का लाभ मिलेगा। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान 80% मामलों में सफल कैशलेस इलाज प्रदान किया गया।

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सड़क दुर्घटना होने पर होगा कैशलेस इलाज
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Jan 2026 12:44 PM
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सड़क दुर्घटना के समय तुरंत इलाज मिलना अक्सर मुश्किल हो जाता है जिससे कई बार जानलेवा परिणाम भी सामने आते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही एक नई कैशलेस इलाज योजना लॉन्च करने वाले हैं। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज तुरंत उपलब्ध होगा। यह योजना समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करके मृत्युदर को कम करने का उद्देश्य रखती है।

योजना की मुख्य बातें

यह योजना सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से शुरू की जा रही है। योजना के तहत दुर्घटना के पहले 7 दिनों तक कैशलेस इलाज मिलेगा। योजना सभी प्रकार के मोटर वाहनों से हुई दुर्घटनाओं पर लागू होगी। इसका लाभ सड़क दुर्घटना के पीड़ित को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के तुरंत इलाज के रूप में मिलेगा।

पायलट प्रोजेक्ट और सफलता

14 मार्च, 2024 को यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चंडीगढ़ में शुरू हुई थी। इसके बाद इसे 6 और राज्यों में बढ़ाया गया। पायलट चरण में 6833 आवेदन आए जिनमें से 5480 पात्र पाए गए। लगभग 80% मामलों में कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया गया। योजना के तहत अब तक कुल 73,88,848 रुपये का वितरण किया जा चुका है।

योजना से मिलने वाले लाभ

इस योजना के लागू होने से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को कई फायदे होंगे:

1. समय पर इलाज: घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में इलाज मिल सकेगा।

2. आर्थिक राहत: 1.5 लाख रुपये तक के खर्च की चिंता नहीं रहेगी।

3. सभी वाहन शामिल: कार, बाइक या किसी भी वाहन से हुई दुर्घटना में लाभ मिलेगा।

4. मौत की दर में कमी: समय पर चिकित्सा मिलने से गंभीर चोटों और मृत्यु की संभावना कम होगी।

नितिन गडकरी ने क्या कहा?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह योजना सड़क दुर्घटनाओं में समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए लाई जा रही है। पीएम मोदी इसे पूरा देश में लागू करने वाले हैं। योजना सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के लिए एक जीवन रक्षक साबित होगी और भारत में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को तुरंत मदद पहुंचाना और आर्थिक बोझ से राहत देना है। सड़क दुर्घटना में घायल लोगों के लिए यह योजना एक नई उम्मीद और सुरक्षा की गारंटी लेकर आ रही है। आने वाले समय में यह योजना देशभर में लागू होकर सड़कों को और सुरक्षित बनाने में मदद करेगी।

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आपका FD TDS कटेगा या नहीं? तुरंत जानें अपनी सीमा और विकल्प

TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स कोई अलग टैक्स नहीं होता बल्कि यह वही टैक्स है जिसे बैंक ब्याज देने से पहले ही काटकर सरकार को जमा कर देता है। बाद में जब सीनियर सिटीजन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो यह कटा हुआ टैक्स उनके खाते में एडजस्ट हो जाता है।

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सीनियर सिटीजन के लिए सही FD निवेश प्लानिंग टिप्स
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Jan 2026 12:10 PM
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रिटायरमेंट के बाद सीनियर सिटीजन्स के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना जाता है। नियमित ब्याज से उन्हें हर महीने या सालाना एक स्थिर आमदनी मिलती है लेकिन जैसे ही FD से मिलने वाला ब्याज बढ़ता है, TDS को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो जाते हैं। खासतौर पर यह जानना जरूरी हो जाता है कि क्या 1 लाख रुपये से ज्यादा FD ब्याज पर TDS कटता है या नहीं और इससे बचने के क्या तरीके हैं।

क्या होता है TDS का मतलब?

TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स कोई अलग टैक्स नहीं होता बल्कि यह वही टैक्स है जिसे बैंक ब्याज देने से पहले ही काटकर सरकार को जमा कर देता है। बाद में जब सीनियर सिटीजन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो यह कटा हुआ टैक्स उनके खाते में एडजस्ट हो जाता है या रिफंड के रूप में वापस मिल सकता है। इसलिए TDS का मतलब यह नहीं है कि आपको ज्यादा टैक्स देना पड़ रहा है, बल्कि यह टैक्स की एडवांस कटौती होती है।

कब कटता है TDS?

इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, अगर किसी सीनियर सिटीजन को एक बैंक या पोस्ट ऑफिस की FD से पूरे वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये तक का ब्याज मिलता है तो उस पर बैंक TDS नहीं काटता। यह नियम सभी तरह के बैंकों पर लागू होता है चाहे वह सरकारी बैंक हो, प्राइवेट बैंक हो या कोऑपरेटिव बैंक।  हालांकि, अगर किसी सीनियर सिटीजन को एक ही बैंक की FD से साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा ब्याज मिलता है तो बैंक उस अतिरिक्त ब्याज पर TDS काटना शुरू कर देता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर हालत में TDS कटेगा। कुछ खास परिस्थितियों में 1 लाख रुपये से ज्यादा ब्याज होने के बावजूद भी बैंक TDS नहीं काटते हैं, बशर्ते सही प्रक्रिया अपनाई जाए।

TDS से कैसे बचा जा सकता है?

अगर किसी व्यक्ति ने अलग-अलग बैंकों में FD कर रखी है तो TDS का नियम हर बैंक पर अलग-अलग लागू होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर एक सीनियर सिटीजन को एक बैंक से 90,000 रुपये और दूसरे बैंक से 80,000 रुपये का ब्याज मिलता है तो कुल ब्याज 1,70,000 रुपये होने के बावजूद भी किसी भी बैंक से TDS नहीं कटेगा क्योंकि किसी एक बैंक में ब्याज 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हुआ है। इसी तरह सही FD प्लानिंग करके TDS से बचा जा सकता है।

बैंक कब नहीं काटता TDS?

सीनियर सिटीजन्स के लिए FD ब्याज पर TDS से बचने का सबसे आसान तरीका Form 15H है। यह एक घोषणा पत्र होता है जिसे सीनियर सिटीजन बैंक में जमा करते हैं। इसके जरिए वे यह बताते हैं कि उनकी कुल टैक्स योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं बनता इसलिए FD के ब्याज पर TDS न काटा जाए। अगर यह फॉर्म समय पर जमा कर दिया जाए तो बैंक ब्याज पर TDS नहीं काटता।

बनी रहती है टैक्स की जिम्मेदारी

हालांकि, यह समझना बहुत जरूरी है कि Form 15H तभी मान्य होता है जब सीनियर सिटीजन की कुल सालाना आय टैक्स छूट की सीमा के अंदर हो। अगर कुल आय टैक्स स्लैब में आती है तो सिर्फ Form 15H भर देने से TDS से बचा नहीं जा सकता और टैक्स देना ही पड़ेगा। ऐसे मामलों में TDS कटे या न कटे टैक्स की जिम्मेदारी बनी रहती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 1 लाख रुपये की यह सीमा सिर्फ बैंक और पोस्ट ऑफिस FD के ब्याज पर लागू होती है। सेविंग अकाउंट या अन्य स्रोतों से मिलने वाली ब्याज आय पर यह सीमा सिर्फ 10,000 रुपये होती है जिस पर TDS नियम अलग तरीके से लागू होते हैं।

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