इस योजना के तहत बढ़ई, लोहार, कुम्हार, सुनार, मोची, बढ़ई, दर्जी, राजमिस्त्री और अन्य 18 पारंपरिक पेशों से जुड़े लोगों को कम ब्याज पर लोन, आधुनिक टूलकिट, फ्री ट्रेनिंग और स्किल अपग्रेडेशन की सुविधा दी जाती है।

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए 13 नवंबर का दिन बेहद खास बन गया। पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त के इंतजार के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य की भावांतर भुगतान योजना के तहत 1.33 लाख सोयाबीन किसानों के खातों में सीधा 233 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। सरकार का कहना है कि किसानों की मेहनत का पूरा हक उन्हें सीधे उनके खाते में पहुंचाया जा रहा है ताकि ना किसी लाइन में लगना पड़े और ना किसी तरह की परेशानी हो।
देवास जिले में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सोयाबीन उत्पादकों को मिली इस सौगात को राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसान और जवान दोनों देश की रीढ़ हैं। एक सीमा पर खड़ा होकर देश की रक्षा करता है और दूसरा खेतों में पसीना बहाकर लोगों की भूख मिटाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भावांतर योजना के जरिए किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलाने का यह बड़ा प्रयास है।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में भावांतर योजना के लिए 9 लाख किसानों का पंजीयन कराया गया है और अब उनमें से एक लाख से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में पैसे भेजे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि किसानों को एमएसपी के लिए भटकने या लाइन लगाने की जरूरत नहीं है। किसान सिर्फ माल तुलवाएं और पैसा सीधा खाते में पहुंच जाए। यही सरकार का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करने का जो वादा किया गया था, उसे सरकार ने पूरा कर दिया है। हर सात दिन पर मॉडल रेट तय होंगे और किसानों को लगातार राशि मिलती रहेगी। भावांतर योजना के तहत 15 जनवरी तक किसानों से फसल खरीदकर भुगतान किया जाएगा।
सरकार किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई नए कदम भी उठा रही है। नरवाई जलाने की समस्या से निपटने के लिए सीएनजी प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है, ताकि किसानों को खेत में बचने वाले कचरे का भी पैसा मिल सके। इसके अलावा मंडला, बालाघाट और जबलपुर सहित 11 जिलों में मोटे अनाज खरीदने पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जा रहा है। धान और गेहूं किसानों को भी बोनस का लाभ मिला है और गेहूं की कीमतें चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही हैं। किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए भी अनुदान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों की वजह से ही प्रदेश की अलग पहचान बनी है। पुराने समय से अब तक किसान लोगों के भंडार भरते आ रहे हैं और आज मध्य प्रदेश सोयाबीन उत्पादन में देश का सबसे बड़ा राज्य बन चुका है। उन्होंने बताया कि पिछली बार सोयाबीन 4800 रुपये क्विंटल बिका था, जबकि इस बार इसकी कीमत 5328 रुपये तक पहुंच गई है। किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलाने के लिए ही भावांतर योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश ने पूरे देश में सबसे पहले की थी।