उत्तराखंड सरकार ने जारी किया नंदा गौरा योजना का पैसा, कैसे मिलेगा आपको फायदा?
उत्तराखंड सरकार की नंदा गौरा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 33,251 बेटियों को कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का सशक्त अभियान है।

उत्तराखंड की बेटियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नंदा गौरा योजना ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि कदमों में भी बेटियों के साथ खड़ी है। इस योजना के तहत इस साल 33,251 बेटियों के खाते में कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं। यह केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश भी है। योजना की खासियत यह है कि यह बालिका जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और भविष्य तक हर कदम पर उन्हें साथ देती है जिससे समाज में बेटियों की भूमिका और अधिकार मजबूत हों।
नंदा गौरा योजना क्या है?
नंदा गौरा योजना उत्तराखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक हर कदम पर आर्थिक और सामाजिक सहायता देती है। योजना के तहत बालिका के जन्म पर 11,000 रुपये और 12वीं उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने पर 51,000 रुपये मिलता है। इससे बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। यह योजना समाज में लैंगिक असमानता को कम करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
मुख्यमंत्री और मंत्री का संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं है बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त अभियान है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह योजना बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने, संस्थागत प्रसव बढ़ाने, बाल विवाह रोकने और बेटियों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने में प्रभावी साबित हुई है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार बेटियों के हर कदम पर उनका साथ दे रही है।
जिलेवार लाभार्थियों की संख्या
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में योजना के लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार है-
अल्मोड़ा: जन्म 643, 12वीं 2963
बागेश्वर: जन्म 240, 12वीं 1167
चमोली: जन्म 196, 12वीं 1761
चम्पावत: जन्म 285, 12वीं 1410
देहरादून: जन्म 678, 12वीं 2637
नैनीताल: जन्म 1012, 12वीं 3196
पौड़ी: जन्म 227, 12वीं 1990
पिथौरागढ़: जन्म 243, 12वीं 1936
रुद्रप्रयाग: जन्म 172, 12वीं 1235
टिहरी: जन्म 485, 12वीं 2775
ऊधमसिंहनगर: जन्म 1372, 12वीं 4772
उत्तरकाशी: जन्म 360, 12वीं 1496
कुल लाभार्थी: 33,251
कुल वितरित राशि: ₹145.93 करोड़
नंदा गौरा योजना का महत्व
यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। यह बेटियों को सशक्त, आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने का प्रयास है। इसके जरिए राज्य सरकार लैंगिक असमानता को कम करने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने और समाज में बेटियों के सम्मान को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। नंदा गौरा योजना का सबसे बड़ा असर यह है कि यह बेटियों को सपनों को साकार करने और शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देती है जिससे उनका भविष्य मजबूत और सुरक्षित बन सके।
उत्तराखंड की बेटियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नंदा गौरा योजना ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि कदमों में भी बेटियों के साथ खड़ी है। इस योजना के तहत इस साल 33,251 बेटियों के खाते में कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं। यह केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश भी है। योजना की खासियत यह है कि यह बालिका जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और भविष्य तक हर कदम पर उन्हें साथ देती है जिससे समाज में बेटियों की भूमिका और अधिकार मजबूत हों।
नंदा गौरा योजना क्या है?
नंदा गौरा योजना उत्तराखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक हर कदम पर आर्थिक और सामाजिक सहायता देती है। योजना के तहत बालिका के जन्म पर 11,000 रुपये और 12वीं उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने पर 51,000 रुपये मिलता है। इससे बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। यह योजना समाज में लैंगिक असमानता को कम करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
मुख्यमंत्री और मंत्री का संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं है बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त अभियान है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह योजना बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने, संस्थागत प्रसव बढ़ाने, बाल विवाह रोकने और बेटियों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने में प्रभावी साबित हुई है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार बेटियों के हर कदम पर उनका साथ दे रही है।
जिलेवार लाभार्थियों की संख्या
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में योजना के लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार है-
अल्मोड़ा: जन्म 643, 12वीं 2963
बागेश्वर: जन्म 240, 12वीं 1167
चमोली: जन्म 196, 12वीं 1761
चम्पावत: जन्म 285, 12वीं 1410
देहरादून: जन्म 678, 12वीं 2637
नैनीताल: जन्म 1012, 12वीं 3196
पौड़ी: जन्म 227, 12वीं 1990
पिथौरागढ़: जन्म 243, 12वीं 1936
रुद्रप्रयाग: जन्म 172, 12वीं 1235
टिहरी: जन्म 485, 12वीं 2775
ऊधमसिंहनगर: जन्म 1372, 12वीं 4772
उत्तरकाशी: जन्म 360, 12वीं 1496
कुल लाभार्थी: 33,251
कुल वितरित राशि: ₹145.93 करोड़
नंदा गौरा योजना का महत्व
यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। यह बेटियों को सशक्त, आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने का प्रयास है। इसके जरिए राज्य सरकार लैंगिक असमानता को कम करने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने और समाज में बेटियों के सम्मान को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। नंदा गौरा योजना का सबसे बड़ा असर यह है कि यह बेटियों को सपनों को साकार करने और शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देती है जिससे उनका भविष्य मजबूत और सुरक्षित बन सके।












