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इस योजना का उद्देश्य सिर्फ रहने की जगह देना नहीं है बल्कि बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका देना है। यहां उन्हें ऐसा माहौल दिया जाता है जहां वे खुद को अकेला महसूस न करें। सरकार चाहती है कि हर बुजुर्ग को सुरक्षित और सुकून भरी जिंदगी मिले चाहे उसका परिवार हो या न हो।

राजस्थान में बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए एक अच्छी पहल शुरू की गई है। Swayamsiddha Ashram Yojana के जरिए सरकार ऐसे लोगों को सहारा देने की कोशिश कर रही है जिनके पास रहने या देखभाल की सुविधा नहीं है। इस योजना को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य सिर्फ रहने की जगह देना नहीं है बल्कि बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका देना है। यहां उन्हें ऐसा माहौल दिया जाता है जहां वे खुद को अकेला महसूस न करें। सरकार चाहती है कि हर बुजुर्ग को सुरक्षित और सुकून भरी जिंदगी मिले चाहे उसका परिवार हो या न हो।
फिलहाल यह योजना राजस्थान के 17 जिलों में लागू की जा चुकी है। इनमें अजमेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, सीकर और उदयपुर जैसे कई जिले शामिल हैं। इन जगहों पर स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से आश्रम चलाए जा रहे हैं जहां बुजुर्गों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी ली जाती है।
इन आश्रमों में रहने वाले लोगों को रहने की जगह, खाना, कपड़े और इलाज जैसी जरूरी सुविधाएं दी जाती हैं। इसके साथ ही उनके लिए मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों की भी व्यवस्था होती है ताकि वे खुश और सक्रिय रह सकें। यह सब मिलकर उन्हें एक परिवार जैसा माहौल देता है जहां वे अपनी जिंदगी आराम से जी सकें।
इस योजना का फायदा ऐसे लोग उठा सकते हैं जो बुजुर्ग हैं और किसी सहारे के बिना जीवन जी रहे हैं। पुरुषों के लिए उम्र सीमा 58 साल और महिलाओं के लिए 55 साल रखी गई है। इसके अलावा वे लोग भी पात्र हैं जो किसी कारण से अपने परिवार से अलग हैं या जिनके पास रहने का कोई सहारा नहीं है।
इस योजना को देखकर साफ पता चलता है कि सरकार बुजुर्गों के लिए संवेदनशील है। आज के समय में जब कई बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं ऐसे में यह योजना उनके लिए एक बड़ी राहत बन सकती है। यह पहल न सिर्फ उन्हें छत देती है बल्कि उन्हें सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीने का मौका भी देती है।
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