TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स कोई अलग टैक्स नहीं होता बल्कि यह वही टैक्स है जिसे बैंक ब्याज देने से पहले ही काटकर सरकार को जमा कर देता है। बाद में जब सीनियर सिटीजन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो यह कटा हुआ टैक्स उनके खाते में एडजस्ट हो जाता है।

रिटायरमेंट के बाद सीनियर सिटीजन्स के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना जाता है। नियमित ब्याज से उन्हें हर महीने या सालाना एक स्थिर आमदनी मिलती है लेकिन जैसे ही FD से मिलने वाला ब्याज बढ़ता है, TDS को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो जाते हैं। खासतौर पर यह जानना जरूरी हो जाता है कि क्या 1 लाख रुपये से ज्यादा FD ब्याज पर TDS कटता है या नहीं और इससे बचने के क्या तरीके हैं।
TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स कोई अलग टैक्स नहीं होता बल्कि यह वही टैक्स है जिसे बैंक ब्याज देने से पहले ही काटकर सरकार को जमा कर देता है। बाद में जब सीनियर सिटीजन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो यह कटा हुआ टैक्स उनके खाते में एडजस्ट हो जाता है या रिफंड के रूप में वापस मिल सकता है। इसलिए TDS का मतलब यह नहीं है कि आपको ज्यादा टैक्स देना पड़ रहा है, बल्कि यह टैक्स की एडवांस कटौती होती है।
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, अगर किसी सीनियर सिटीजन को एक बैंक या पोस्ट ऑफिस की FD से पूरे वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये तक का ब्याज मिलता है तो उस पर बैंक TDS नहीं काटता। यह नियम सभी तरह के बैंकों पर लागू होता है चाहे वह सरकारी बैंक हो, प्राइवेट बैंक हो या कोऑपरेटिव बैंक। हालांकि, अगर किसी सीनियर सिटीजन को एक ही बैंक की FD से साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा ब्याज मिलता है तो बैंक उस अतिरिक्त ब्याज पर TDS काटना शुरू कर देता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर हालत में TDS कटेगा। कुछ खास परिस्थितियों में 1 लाख रुपये से ज्यादा ब्याज होने के बावजूद भी बैंक TDS नहीं काटते हैं, बशर्ते सही प्रक्रिया अपनाई जाए।
अगर किसी व्यक्ति ने अलग-अलग बैंकों में FD कर रखी है तो TDS का नियम हर बैंक पर अलग-अलग लागू होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर एक सीनियर सिटीजन को एक बैंक से 90,000 रुपये और दूसरे बैंक से 80,000 रुपये का ब्याज मिलता है तो कुल ब्याज 1,70,000 रुपये होने के बावजूद भी किसी भी बैंक से TDS नहीं कटेगा क्योंकि किसी एक बैंक में ब्याज 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हुआ है। इसी तरह सही FD प्लानिंग करके TDS से बचा जा सकता है।
सीनियर सिटीजन्स के लिए FD ब्याज पर TDS से बचने का सबसे आसान तरीका Form 15H है। यह एक घोषणा पत्र होता है जिसे सीनियर सिटीजन बैंक में जमा करते हैं। इसके जरिए वे यह बताते हैं कि उनकी कुल टैक्स योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं बनता इसलिए FD के ब्याज पर TDS न काटा जाए। अगर यह फॉर्म समय पर जमा कर दिया जाए तो बैंक ब्याज पर TDS नहीं काटता।
हालांकि, यह समझना बहुत जरूरी है कि Form 15H तभी मान्य होता है जब सीनियर सिटीजन की कुल सालाना आय टैक्स छूट की सीमा के अंदर हो। अगर कुल आय टैक्स स्लैब में आती है तो सिर्फ Form 15H भर देने से TDS से बचा नहीं जा सकता और टैक्स देना ही पड़ेगा। ऐसे मामलों में TDS कटे या न कटे टैक्स की जिम्मेदारी बनी रहती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 1 लाख रुपये की यह सीमा सिर्फ बैंक और पोस्ट ऑफिस FD के ब्याज पर लागू होती है। सेविंग अकाउंट या अन्य स्रोतों से मिलने वाली ब्याज आय पर यह सीमा सिर्फ 10,000 रुपये होती है जिस पर TDS नियम अलग तरीके से लागू होते हैं।