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'जन कल्याण कोष सह योजना' को किसानों और पशुपालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि परिवार के मुखिया या दुधारू पशु के अचानक नुकसान से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। ऐसे समय में यह योजना आर्थिक सहारा देने का काम करेगी।

बिहार के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। राज्य के प्रमुख डेयरी ब्रांड 'सुधा' ने अपने सदस्य किसानों और पशुपालकों के लिए एक ऐसी योजना शुरू की है, जो मुश्किल समय में उनके परिवारों के लिए सहारा बनेगी। वैशाल पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (VPDUSS) ने 'जन कल्याण कोष सह योजना' की शुरुआत की है। इस योजना का मकसद उन किसानों और पशुपालकों को आर्थिक मदद पहुंचाना है जो किसी दुर्घटना, असामयिक मृत्यु या पशुधन की हानि जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। पटना के दशरथ मांझी सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, दुग्ध समितियों के पदाधिकारी और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर जरूरतमंद और प्रभावित परिवारों के बीच कुल 30 लाख रुपये की सहायता राशि भी वितरित की गई।
'जन कल्याण कोष सह योजना' को किसानों और पशुपालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि परिवार के मुखिया या दुधारू पशु के अचानक नुकसान से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। ऐसे समय में यह योजना आर्थिक सहारा देने का काम करेगी। कार्यक्रम में मौजूद डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव और कॉम्फेड के अध्यक्ष शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि सहकारिता का असली उद्देश्य जरूरत के समय लोगों के साथ खड़ा होना है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की योजनाओं को बिहार के अन्य दुग्ध संघों में भी लागू किया जाना चाहिए।
इस योजना के तहत सक्रिय दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों और दुग्ध समितियों से जुड़े कर्मियों को विशेष परिस्थितियों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यदि किसी सदस्य किसान की असामयिक मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा यदि किसी पशुपालक के दुधारू पशु की मृत्यु हो जाती है या उसे बड़ा नुकसान होता है तब भी इस कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता दी गई जो हाल के समय में किसी न किसी विपरीत परिस्थिति से गुजरे थे। वैशाल पाटलिपुत्र दुग्ध संघ के अध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 30 लाख रुपये सीधे लाभार्थियों और उनके आश्रितों के बीच वितरित किए गए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सहकारिता की भावना का जीवंत उदाहरण है। इसका उद्देश्य किसानों को यह भरोसा दिलाना है कि संकट के समय पूरा दुग्ध संघ उनके साथ खड़ा है।
कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ ने कहा कि 'सुधा' ब्रांड की सफलता के पीछे गांवों में रहने वाले लाखों मेहनती किसान और पशुपालक हैं। उन्होंने कहा कि जब भी कोई किसान या उसका परिवार किसी मुश्किल दौर से गुजरता है तब संस्था का कर्तव्य बनता है कि वह उसके साथ खड़ी रहे। उन्होंने बताया कि जन कल्याण कोष पूरी तरह सहकारिता की भावना पर आधारित है और इसका लाभ सीधे उन लोगों तक पहुंचाया जाएगा जो वास्तव में सहायता के पात्र हैं।
वैशाल पाटलिपुत्र दुग्ध संघ के प्रबंध निदेशक रुपेश राज ने कहा कि यह योजना केवल सहायता राशि बांटने तक सीमित नहीं है। यह उन किसानों और पशुपालकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने अपनी मेहनत से डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि किसी प्रियजन या पशुधन के नुकसान की भरपाई कोई भी राशि नहीं कर सकती, लेकिन मुश्किल समय में दिया गया सहयोग परिवार को आगे बढ़ने का साहस जरूर देता है। यही सोच इस योजना की सबसे बड़ी ताकत है।
'जन कल्याण कोष सह योजना' की शुरुआत को बिहार के दुग्ध उत्पादक किसानों और पशुपालकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह योजना न केवल आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी बल्कि किसानों में विश्वास भी बढ़ाएगी कि विपरीत परिस्थितियों में वे अकेले नहीं हैं। सुधा डेयरी की यह पहल आने वाले समय में हजारों परिवारों के लिए राहत और भरोसे का माध्यम बन सकती है। सहकारिता की भावना पर आधारित यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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