Sukanya Samriddhi Yojana: अगर माता-पिता NRI यानी Non-Resident Indian हैं तो क्या वे अपनी बेटी के नाम पर सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं? इस सवाल का जवाब जानने से पहले योजना की पात्रता और NRI से जुड़े नियम समझना जरूरी है।

बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए पैसे जुटाने के मकसद से सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में बड़ी संख्या में लोग निवेश करते हैं। यह योजना छोटी बचत योजनाओं में शामिल हैजिसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक नाबालिग बेटी के नाम पर खाता खुलवा सकते हैं लेकिन विदेश में रहने वाले भारतीयों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि अगर माता-पिता NRI यानी Non-Resident Indian हैं तो क्या वे अपनी बेटी के नाम पर सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं? इस सवाल का जवाब जानने से पहले योजना की पात्रता और NRI से जुड़े नियम समझना जरूरी है।
सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के लिए शुरू की गई एक छोटी बचत योजना है। इसका उद्देश्य बेटी की आगे की पढ़ाई और भविष्य के खर्चों के लिए रकम जुटाने में मदद करना है। इस योजना में खाता बेटी के नाम पर खोला जाता है जबकि उसके नाबालिग होने तक माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाते को संचालित करते हैं। योजना में खाता खोलने के लिए बच्ची की उम्र 10 साल से कम होनी चाहिए। SSY खाते से जुड़े नियमों में बच्ची की नागरिकता और उसके निवास की स्थिति भी अहम होती है। इसलिए विदेश में रहने वाले माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि NRI स्टेटस होने पर इस योजना में क्या नियम लागू होते हैं।
सामान्य नियम के अनुसार NRI अपनी बेटी के नाम पर नया सुकन्या समृद्धि खाता नहीं खोल सकता। योजना भारतीय नागरिक बेटियों के लिए है और खाता खोलते समय पात्रता की शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है। अगर कोई भारतीय नागरिक विदेश जाकर रहने लगा है और उसकी स्थिति NRI की हो गई है तो वह NRI बनने के बाद अपनी बेटी के नाम पर नया SSY खाता नहीं खोल सकता।
यह स्थिति थोड़ी अलग है। अगर किसी व्यक्ति ने NRI बनने से पहले अपनी पात्र बेटी के नाम पर सुकन्या समृद्धि खाता खुलवा लिया था तो केवल NRI स्टेटस मिलने से पहले से खुले खाते को लेकर नियम अलग हो सकते हैं। ऐसे मामले में खाते को जारी रखने और आगे जमा करने की पात्रता योजना के मौजूदा नियमों पर निर्भर करेगी। इसलिए NRI बनने के बाद खाते में निवेश जारी रखने से पहले संबंधित बैंक या डाकघर से मौजूदा नियमों की पुष्टि करना बेहतर है।
सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है। आपके दिए विवरण के मुताबिक वर्तमान दर 8.2 फीसदी सालाना है। यह दर हमेशा एक जैसी रहे ऐसा जरूरी नहीं है। सरकार हर तिमाही छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करती है। इसलिए लंबे समय के निवेश की योजना बनाते समय मौजूदा ब्याज दर को स्थायी मानकर गणना नहीं करनी चाहिए।
सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलने के बाद 15 साल तक जमा किया जा सकता है। हालांकि, खाते की अवधि और जमा करने की अवधि को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए। अगर किसी वित्त वर्ष में खाते में न्यूनतम जरूरी रकम जमा नहीं की जाती है तो खाता डिफॉल्ट हो सकता है। ऐसे खाते को तय नियमों के तहत जुर्माना देकर दोबारा नियमित कराया जा सकता है।
योजना में किसी वित्त वर्ष में न्यूनतम जमा नहीं करने पर खाते को नियमित करने के लिए ₹50 का डिफॉल्ट शुल्क देना पड़ सकता है। इसके साथ उस साल की न्यूनतम जमा राशि भी पूरी करनी होती है। इसलिए खाते को एक्टिव और नियमित रखने के लिए समय पर सालाना जमा करना जरूरी है।
सुकन्या समृद्धि योजना में कुछ शर्तों के साथ बेटी की उच्च शिक्षा के लिए खाते से पैसे निकालने की सुविधा मिलती है। आम तौर पर बच्ची के 18 साल की उम्र पूरी करने या 10वीं कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए खाते में जमा रकम का 50 फीसदी तक निकाला जा सकता है।
अगर आप विदेश में रहते हैं और अपनी बेटी के भविष्य के लिए Sukanya Samriddhi Yojana में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो खाता खोलने से पहले अपनी और बेटी की नागरिकता व निवास की स्थिति जरूर जांच लें। NRI के लिए नया SSY खाता खोलने की अनुमति नहीं है जबकि पहले से खुले खाते की स्थिति अलग नियमों के तहत देखी जाती है।
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