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PM Ujjwala Yojana: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 2016 में गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक रसोई गैस पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआत में लाभार्थियों को साल में 12 सिलेंडरों तक सब्सिडी का लाभ मिलता था। बाद में इस संख्या को घटाकर 9 किया गया और अब इसे घटाकर सिर्फ 4 कर दिया गया है।

Ujjwala Yojana: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के करोड़ों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को लेकर नया फैसला लिया है जिसका सीधा असर देश के करीब 10.5 करोड़ परिवारों पर पड़ेगा। अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में केवल चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ मिलेगा। पहले यह सीमा नौ सिलेंडर तक थी। सरकार के इस फैसले के बाद कई परिवारों को अपनी रसोई का बजट दोबारा तय करना पड़ सकता है क्योंकि अतिरिक्त रिफिल पर अब पहले जैसी आर्थिक राहत नहीं मिलेगी।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 2016 में गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक रसोई गैस पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआत में लाभार्थियों को साल में 12 सिलेंडरों तक सब्सिडी का लाभ मिलता था। बाद में इस संख्या को घटाकर 9 किया गया और अब इसे घटाकर सिर्फ 4 कर दिया गया है। यानी अब उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले परिवारों को सालभर में केवल चार गैस सिलेंडरों पर ही अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इसके बाद लिए जाने वाले सिलेंडरों पर उन्हें सामान्य दरों का भुगतान करना होगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत गैस खपत को ध्यान में रखकर लिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश उज्ज्वला उपभोक्ता साल में औसतन चार से पांच सिलेंडर ही इस्तेमाल करते हैं। इसी आधार पर सब्सिडी की नई सीमा तय की गई है। सरकार का दावा है कि यह बदलाव वास्तविक जरूरतों और खपत के आंकड़ों को देखते हुए किया गया है ताकि सहायता सही तरीके से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती रहे।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत हालिया बढ़ोतरी के बाद 942 रुपये तक पहुंच चुकी है। हालांकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी के बाद उन्हें एक सिलेंडर करीब 642 रुपये में उपलब्ध हो रहा है। यह सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है जिससे उन्हें रसोई गैस खरीदने में कुछ राहत मिलती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2022 में उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की विशेष सब्सिडी शुरू की गई थी। बाद में अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया। सरकार का कहना है कि पिछले चार वर्षों में उज्ज्वला योजना के तहत करीब 52 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी लाभार्थियों को दी जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक एक सिलेंडर की आपूर्ति पर सरकार और तेल कंपनियों का कुल खर्च करीब 1600 रुपये तक पहुंच जाता है जबकि उपभोक्ता को काफी कम कीमत पर गैस उपलब्ध कराई जाती है।
केंद्र सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में अब भी कम हैं। अधिकारियों के अनुसार तेल कंपनियों को घरेलू गैस सिलेंडर की बिक्री पर प्रति सिलेंडर करीब 700 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उज्ज्वला योजना देश की सबसे बड़ी सामाजिक योजनाओं में से एक है और इसके तहत करोड़ों गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार किए जाने का असर बड़ी संख्या में लाभार्थियों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह फैसला वास्तविक खपत के आधार पर लिया गया है लेकिन आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस बदलाव का लाभार्थियों के घरेलू बजट और गैस उपयोग पर कितना असर पड़ता है।
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