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आजकल उत्तर प्रदेश में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर LPG गैस की बढ़ती कीमतें और कभी-कभी होने वाली किल्लत लोगों को परेशान कर रही हैं वहीं उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं इसका समाधान खुद निकाल रही हैं खासकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर इलाके में।

आजकल उत्तर प्रदेश में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर LPG गैस की बढ़ती कीमतें और कभी-कभी होने वाली किल्लत लोगों को परेशान कर रही हैं वहीं उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं इसका समाधान खुद निकाल रही हैं खासकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर इलाके में। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में महिलाएं अब बायोगैस प्लांट योजना के जरिए न सिर्फ अपने घर का चूल्हा जला रही हैं बल्कि आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल ने गांवों में एक नई सोच पैदा की है जहां महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं बल्कि अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही हैं।
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से LPG गैस की सप्लाई और कीमत दोनों ही प्रभावित हुई हैं। जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। ऐसे में बायोगैस एक बढ़िया ऑप्शन बनकर सामने आया है। गोबर से बनने वाली यह गैस घर के चूल्हे के लिए पूरी तरह उपयोगी है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग मुफ्त में तैयार हो जाती है।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के आसपास की कई महिलाएं अब इस योजना का हिस्सा बन चुकी हैं। वे डेयरी से जुड़कर दूध बेचती हैं और साथ ही गोबर से बायोगैस तैयार करती हैं। इससे उन्हें दोहरा फायदा मिल रहा है जहां एक तरफ कमाई हो रही है वहीं दूसरी तरफ घर का ईंधन भी आसानी से मिल रहा है। इस पहल से महिलाएं अब अपने परिवार की जिम्मेदारी में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और खुद को मजबूत महसूस कर रही हैं।
इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह है कि बायोगैस प्लांट से निकलने वाला अवशेष बेकार नहीं जाता। इसका इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है जो खेती के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे किसानों की खाद पर होने वाला खर्च भी कम हो रहा है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। इस योजना को आगे बढ़ाने में सरकारी संस्थाओं और संगठनों का भी बड़ा योगदान है। डेयरी से जुड़े समूहों के साथ मिलकर बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके। अब तक गोरखपुर क्षेत्र में सैकड़ों महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं और लगातार नए प्लांट लगाए जा रहे हैं।
इस योजना से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें गैस सिलेंडर की चिंता नहीं रहती। उनका समय भी बच रहा है और पैसे की भी बचत हो रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि वे अब खुद को किसी पर निर्भर नहीं मानतीं। अपने दम पर घर चलाने और कमाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती है।
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