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इस बार ऐसे लोगों तक प्रशासन खुद पहुंचे और उन्हें योजना का लाभ दिलाए। यह अभियान पूरे उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों की सूची तैयार करें, उनसे संपर्क करें और उन्हें आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने में मदद दें।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाने वाले छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत एक खास अभियान शुरू किया है। सरकार चाहती है कि ऐसे लोग जो अभी तक इस योजना से नहीं जुड़ पाए हैं उन्हें भी आसानी से लोन और दूसरी सुविधाओं का लाभ मिल सके। इसी मकसद से 1 जून से 30 जून तक पूरे प्रदेश में एक महीने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का फोकस उन लोगों तक पहुंचना है जो रोज सड़क किनारे, बाजारों में या छोटे ठेलों पर सामान बेचकर अपना घर चलाते हैं।
पीएम स्वनिधि योजना खास तौर पर रेहड़ी-पटरी, ठेला, खोमचा, फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले और छोटे स्तर पर सामान बेचने वाले कारोबारियों के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत ऐसे व्यापारियों को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे अपना छोटा कारोबार फिर से खड़ा कर सकें या उसे बढ़ा सकें। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बहुत से छोटे दुकानदारों को बैंक से सामान्य तरीके से लोन नहीं मिल पाता लेकिन इस योजना के जरिए उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार अब इस योजना की रफ्तार तेज करना चाहती है। राज्य सरकार का फोकस सिर्फ लोन दिलाने पर नहीं बल्कि उन लोगों की पहचान करने पर भी है जो पात्र होने के बावजूद अब तक योजना से बाहर हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित करके आवेदन, सत्यापन और लोन स्वीकृति की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।
राज्य सरकार ने 1 जून से 30 जून तक जो विशेष अभियान शुरू किया है उसका मकसद साफ है अधिक से अधिक पात्र रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ना। कई बार जानकारी की कमी, दस्तावेजों की दिक्कत या प्रक्रिया समझ में न आने की वजह से छोटे कारोबारी आवेदन नहीं कर पाते। सरकार चाहती है कि इस बार ऐसे लोगों तक प्रशासन खुद पहुंचे और उन्हें योजना का लाभ दिलाए। यह अभियान पूरे उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों की सूची तैयार करें, उनसे संपर्क करें और उन्हें आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने में मदद दें।
इस अभियान को सिर्फ विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रखा गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर ग्राम्य विकास विभाग ने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को अपने-अपने क्षेत्रों में लाभार्थियों की पहचान और योजना से जोड़ने का काम दिया गया है।
इस विशेष अभियान में पात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए ‘सेंसस टाउन रिपोर्ट’ और विभाग के पास उपलब्ध सूची का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी प्रशासन पहले यह देखेगा कि किन इलाकों में बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी और छोटे फुटपाथ व्यवसायी काम कर रहे हैं फिर वहां ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो अब तक योजना से नहीं जुड़े हैं। इसके बाद उनसे संपर्क किया जाएगा और आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अगर किसी के दस्तावेज अधूरे हैं या उसे योजना की शर्तों की जानकारी नहीं है तो उसे भी समझाने और मदद देने की कोशिश की जाएगी। इस तरह सरकार का लक्ष्य सिर्फ सूची बनाना नहीं बल्कि वास्तव में लोगों को योजना का लाभ दिलाना है।
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